जम्मू। जम्मू-कश्मीर के बागवानों और फल व्यापारियों के लिए खुशखबरी घाटी की रसीली, लाल-सुर्ख चेरी अब भारतीय रेल की रफ्तार से मुंबई के बाजारों तक पहुंचेगी। इस सीजन की पहली चेरी स्पेशल पार्सल वैन 25 मई को जम्मू से रवाना होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम जम्मू-कश्मीर के बागवानी उत्पादों को देश के कोने-कोने तक रिकॉर्ड समय में पहुंचाने की दिशा में रेलवे की बड़ी छलांग है।
कब और कैसे पहुंचेगी चेरी
जम्मू मंडल के जनसम्पर्क निरीक्षक श्री राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि इस सीजन की पहली पार्सल वेन 24 मई को लगभग 12 टन चेरी लोड की गई। जिसके बाद पार्सल वेन क़ो ट्रेन संख्या 19028 जम्मू तवी-बांद्रा टर्मिनस विवेक एक्सप्रेस के साथ जोड़ी जाएगी। ट्रेन 25 मई को सुबह ठीक 05.45 बजे जम्मू से मुंबई के लिए रवाना होगी।
33 घंटे में जम्मू से मुंबईः ताजगी रहेगी बरकरार
फलों की नाजुक ताजगी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने विशेष इंतजाम किए हैं। यह पार्सल वैन महज 33 घंटे के रिकॉर्ड समय में जम्मू से बांद्रा टर्मिनस पहुंच जाएगी। इतनी तेज डिलीवरी से चेरी की गुणवत्ता बरकरार रहेगी और मुंबईवासियों को मिलेगी सीधे बागानों से तोड़ी गई ताजी चेरी का स्वाद।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जम्मू श्री उचित सिंघल ने इस महत्वपूर्ण सफलता पर बताया कि भारतीय रेलवे जम्मू-कश्मीर के बागवानों की मेहनत को सही दाम और देशव्यापी बाजार दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है। चेरी बेहद नाजुक फल है, जिसे घंटों में बाजार पहुंचाना चुनौती है। हमारी टीम ने इसके लिए स्पेशल लॉजिस्टिक्स तैयार किया है। इस सीजन में व्यापारियों की हर मांग पूरी करने के लिए हमारे पास पर्याप्त पार्सल वैन और संसाधन उपलब्ध हैं।
उत्साह चरम पर
सीजन की खेप में लगभग 12 टन प्रीमियम गुणवत्ता वाली चेरी जिसमें लगभग 966 बॉक्स मुंबई भेजी जा रही है। इस सेवा को लेकर किसानों और व्यापारियों में जबरदस्त उत्साह है। अब तक जम्मू और श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन से चेरी परिवहन के लिए कुल 28 वीपी के इंडेंट प्राप्त हो चुके हैं।
श्री सिंघल ने आगे बताया कि इन 28 विशेष वीपी के अलावा, रूट की नियमित ट्रेनों में उपलब्ध एसएलआर कोच की सुविधा भी जारी रहेगी। इससे पहले 18 टन चेरी मुंबई भेजी जा चुकी हैं, छोटे और मध्यम व्यापारी भी अपनी कम मात्रा वाली खेप सुरक्षित और किफायती तरीके से भेज सकेंगे।
किसानों की मुस्कानए बाजार की शान
भारतीय रेलवे की यह तेज, सुरक्षित और समयबद्ध पार्सल सेवा न सिर्फ परिवहन समय घटाएगी, बल्कि जम्मू-कश्मीर के बागवानों को उनकी उपज का सर्वाेत्तम मूल्य दिलाकर ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ के सपने को भी मजबूत करेगी। अब घाटी की चेरी की मिठास पूरे देश में गूंजेगी।