यह धेरेची निरंतर खून साफ़ (ब्लड प्यूरिफिकेशन्न करने में मदद करती है और धीरे धीरे शरीर से टॉक्सिन और अतिरिक्त तरल पदार्थों एक्स्ट्रा फ्लूइड) को निकालती है। ऐसा होने से किडनी की गंभीर समस्याओं से ग्रसित मरीजों को स्थिर करने में मदद मिलती है।
उदयपुरः विश्व किडनी दिवस के अवसर पर और गंभीर रूप से बीमार किडनी के मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पारस हेल्थ उदयपुर ने एक एडवांस्ड कंटीन्यू अस रीनल थेरेपी (CRRT) सिस्टम लॉन्च किया है। इससे इसकी क्रिटिकल नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी सेवा और ज्यादा अच्छी होगी। इस पहल को डॉ. आशुतोष सोनी, कंसल्टेंट, नेफ्रोलॉजी, हॉस्पिटल की नेफ्रोलॉजी और क्रिटिकल केयर टीमों के साथ मिलकर लीड कर रहे हैं, ताकि किडनी की गंभीर बीमारियों वाले उन मरीज़ों को मदद की जा सके जिन्हें इंटेसिव केयर में लगातार मॉनिटरिंग और इलाज की ज़रूरत होती है।
कंटीन्यूअस रीनल थेरेपी को कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (CRRT) के नाम से भी जाना जाता है। यह डायलिसिस का एक विशेष रूप होता है जो आईसीयू में सबसे गंभीर मरीजों के लिए उपयोग में लाया जाता है। सामान्य डायलिसिस को आम तौर पर कुछ घंटों में किया जाता है, लेकिन यह थेरेपी लगातार 24 घंटे तक चलती है। इससे खून से विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन) और ज्यादा तरल पदार्थ धीरे-धीरे नियंत्रण में निकल जाता है, और 24 घंटे तक खून लगातार साफ़ होता रहता है। यह धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने में मदद करता है और यह उन मरीज़ों के लिए खास तौर पर फायदेमंद होता है जिनका शरीर नियमित रूप से डायलिसिस नहीं झेल सकता है।
भारत में किडनी की बीमारी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। अध्ययनों के अनुसार क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से लगभग 14% आबादी प्रभावित है, जबकि इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। असल में भारत में CKD से प्रभावित 138 मिलियन से ज़्यादा वयस्क लोगों के होने का अनुमान है। यह आंकड़ा भारत को दुनिया भर में किडनी की बीमारी के सबसे ज़्यादा बोझ वाले देशों में से एक बनाता है। एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि जागरूकता की कमी और कम शुरुआती स्क्रीनिंग के कारण कई मरीज़ों का पता एडवांस स्टेज में ही चल पाता है।
पारस हेल्थ उदयपुर के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ आशुतोष सोनी ने कहा, "किडनी बीमारियों से ग्रसित मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब उनकी किडनी लगभग पूरी तरह से नुकसानग्रस्त हो चुकी होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किडनी बीमारी के शुरुआती लक्षण बहुत ही हल्के होते हैं जिन्हें नजर अंदाज करना ज्यादा आसान होता है। नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, समय पर डायबिटीज और हाइपरटेंशन की बीमारी का सही नियंत्रण रखने और किडनी डिस्फंक्शन की जल्दी पहचान से जटिलताओं को रोका जा सकता है क्योंकि जटिलता होने पर इंटेंसिव ट्रीटमेंट जैसे कि कंटीन्यूअस रिनल थेरेपी की जरूरत होती है। विश्व किडनी दिवस जैसे मौके हमें याद दिलाते हैं कि जागरूकता और रोकथाम देखभाल भी एडवांस्ड इलाज़ जितना ही ज़रूरी होता है।"
पारस हेल्थ उदयपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर डा प्रसून कुमार का मरीज है जो कि केयर में मरीजों के लिए ज्यादा सुरक्षित होता है। मेरेची हमारी क्लीनिकल टीमों को मरीज के स्वस्थ होने तक पलुइड बैलेंस और ऑन सपोर्ट को ज्यादा प्रभावी और नियंत्रित तरीके से प्रबंधित करने में मदद करती है।
इस घेरेपी का उपयोग अक्सर एक्यूट किडनी इंजरी और दूसरी गंभीर बीमारियों में किया जाता है, जहाँ किडनी शरीर से विषाक्त पदार्थों को ठीक से नहीं निकाल पाती। गोरे धीरे विषाक्त पदार्थ को साफ करके और तरल पदार्थ के स्तर (फ्लूइड लेबल) को संतुलित करके यह जरूरी अंगों पर दबाव कम करने में मदद करता है और गंभीर संक्रमण, ऑर्गन फेलियर या बड़ी सर्जरी के बाद होने वाली दिक्कतों से जूझ रहे मरीजों की रिकवरी में मदद करता है। यह नेफ्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट के बीच करीबी तालमेल भी बनाता है, जिससे उन जटिल मामलों की नियंत्रित करने में मदद मिलती है जिनमें लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। पह अस्थिर ब्लड प्रेशर वाले ICU मरीजों के लिए सुरक्षित डायलिसिस सपोर्ट देता है और शरीर से ज्यादा फ्लूइड और विषाक्त पदार्थों को धीरे-धीरे निकालने में मदद करता है, जिससे किडनी की गंभीर स्थितियों में स्थिरता बेहतर होती है और रिकवरी में मदद मिलती है।
इसके साथ पारस हेल्थ उदयपुर अपनी एडवांस्ड नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और क्रिटिकल केयर सर्विसेज को बढ़ाना जारी रखे हुए है। इन सेवाओं से यह सुनिश्चित होता है कि उदयपुर और आस-पास के इलाकों में मरीज़ों को सबसे ज्यादा ज़रूरत पड़ने पर स्पेशलाइज्ड किडनी देखभाल मिल सके।