उदयपुर। शब्दों, विचारों और संवेदनाओं का अद्भुत संगम ‘लफ़्ज़ों की महफ़िल’ डिजिटल पत्रिका का आज एक समारोह में भव्य शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम संयोजिका अमृता बोकड़िया ने बताया कि होटल वरजू विला में आयोजित इस साहित्यिक आयोजन में शहर के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, शायर, लेखक और साहित्य-प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम साहित्य जगत में एक नई ऊर्जा और उत्साह का कारण बना।
इस अवसर पर संस्थापक मुकेश माधवानी ने कहा कि लफ़्ज़ों की महफ़िल सिर्फ़ एक डिजिटल पत्रिका नहीं, बल्कि एक ऐसा समन्वित मंच है जहाँ अनुभवी और नवोदित लेखक साथ मिलकर साहित्य की नई दिशा तय करेंगे। उन्होंने बताया कि यह मंच भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी-उर्दू साहित्य को डिजिटल माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संपादक अकबर शाद ने कहा कि यह पत्रिका साहित्यिक सृजन, समीक्षा, शोध, रचनात्मक लेखन और नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने का व्यापक माध्यम बनेगी। उन्होंने रचनाकारों से आग्रह किया कि वे अपनी श्रेष्ठ रचनाएँ भेजकर इस महफ़िल को और भी समृद्ध करें।
कार्यक्रम संयोजिका अमृता बोकड़िया ने बताया कि लफ़्ज़ों की महफ़िल का उद्देश्य एक ऐसा डिजिटल साहित्यिक परिवार तैयार करना है जिसमें हर रचनाकार सहजता से जुड़ सके और अपनी अभिव्यक्ति को नए आयाम दे सके। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम भंडारी ने अपने उद्बोधन में इस डिजिटल पहल को समय की जरूरत बताया।
विशिष्ट अतिथियों में डॉ. कुंजन आचार्य, डॉ रजनी कुलश्रेष्ठ, पूर्णिमा बोकड़िया ,डॉ. इक़बाल सागर, कमल डांगी ,श्याम बाबू राय और इक़बाल हुसैन ने भी अपनी गरिमापूर्ण उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया और मंच को शुभकामनाएँ दीं।
संस्थापक मुकेश माधवानी, संपादक अकबर शाद, कार्यक्रम संयोजक अमृता बोकडिया, और सह-संयोजिका प्रेमलता कुमावत ने बताया कि ‘लफ़्ज़ों की महफ़िल’ का उद्देश्य हिंदी साहित्य को डिजिटल माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुँचाना और उभरते रचनाकारों को मंच प्रदान करना है।
पहला संस्करणः विविध रचनाओं से सजा साहित्यिक उजास-पत्रिका के प्रथम संस्करण में प्रकाशित होने वाले प्रमुख रचनाकारों में डॉ. प्रेम भंडारी, डॉ. इक़बाल सागर, चंद्रेश खत्री ‘चंद्र’, डॉ. चंद्रकांत बंसल, शाद उदयपुरी, अमृता बोकडिया, सरिता कुंवर राव, पूनम भू ‘पूनम’, अंजना सिन्हा ‘सखी’, सपना जैन शाह, हेमेंद्र सेठ और आज़म शाकरी शामिल है। इनकी रचनाओं ने पत्रिका के प्रारम्भिक संस्करण को एक समृद्ध साहित्यिक स्वर प्रदान किया।
इस आयोजन के वेन्यू पार्टनर वर्जू विला रहे, जिनका सहयोग सीईओ कमल डांगी और जनरल मैनेजर श्याम बाबू रॉय द्वारा किया गया। उनका योगदान कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण रहा।प्रिंटिंग कॉपी प्राईम स्कैन के हेमेंद्र सेठ द्वारा तैयार की गई ।
कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ शायर शाहिद हुसैन शायदा द्वारा कृतज्ञता ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, रचनाकारों और साहित्य-प्रेमियों का आभार व्यक्त किया और इस साहित्यिक यात्रा को और आगे बढ़ाने की शुभकामनाएँ दीं।
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लफ़्ज़ों की महफ़िल डिजिटल पत्रिका का शुभारंभ हुआ सफल-शब्दों की नई दुनिया का आगाज़
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