जैसलमेर रबी की बुआई में तिलहनी व दलहनी फसलों के लिए एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट-16 प्रतिशत फास्फोरस), व एनपीके को अधिक लाभप्रद बताया है।

संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार, जैसलमेर डॉ. जे. आर. भाखर ने किसानों को डीएपी की जगह सिंगल सुपर फॉस्फेट(एसएसपी) व एनपीके उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी गई। साथ ही उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा फास्फेटिक उर्वरक के रूप में केवल डीएपी पर अधिक निर्भरता को कम करते हुए वैकल्पिक उर्वरको एसएसपी व एनपीके का अधिक उपयोग करने की आवश्यकता जताई है। इसके साथ ही एसएसपी एक फॉस्फोरस युक्त उर्वरक है, जिसमें 16 प्रतिशत फॉस्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर की मात्रा पायी जाती है। इसमें उपलब्ध सल्फर के कारण यह उर्वरक तिलहनी एवं दलहनी फसलो के लिए डीएपी उर्वरक की अपेक्षा अधिक लाभदायक होता है। फसलों में संतुलित पोषण के लिए डीएपी के बजाय एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) ग्रेड्स उर्वरक अधिक उपयुक्त है।

उन्होंने बताया कि तिलहनी व दलहनी फसलों के लिए डीएपी में उपलब्ध नत्रजन व फास्फोरस के वैकल्पिक उर्वरक एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट-16 प्रतिशत फास्फोरस), का यूरिया के साथ संयोजन निम्नानुसार किए जाने से फसलों को आवश्यक तत्व सुगमता से उपलब्ध होने के साथ आवश्यक अन्य तत्वों (सल्फर व कैल्सियम) की पूर्ति भी हो सकेगी।

Û 3 बैग (50 किग्रा प्रति बैग) एसएसपी के साथ एक बैग यूरिया।

Û एन. पी. के उर्वरक यथा 12ः32ः16 व 20ः20ः0ः13 आदि का उपयोग विभाग के बताए अनुसार।

उल्लेखनीय है कि एसएसपी पौधो की वृद्धि और जडो के विकास के लिए बेहतर है। यह फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढाता है। एसएसपी में 16 प्रतिशत फॉस्फोरस के साथ 11 प्रतिशत अतिरिक्त सल्फर होता है। सल्फर पौधों में क्लोरोफिल बनाने में मदद करता है और तिलहनी फसलोें में तेल तथा दलहनी फसलों में प्रोटिन की मात्रा बढाता है।

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