उदयपुर, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पेसिफिक सेंटर ऑफ न्यूरो साइंसेज की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 12वां उदयपुर कोर्स ऑन न्यूरोसाइंसेज का आज शुभारंभ लाभगढ़ पैलेस रिज़ॉर्ट उदयपुर में हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का प्रमुख विषय स्ट्रोक,न्यूरोइंटरवेंशन एवं न्यूरोथियोलॉजी है। जिसमें देश-विदेश से आए न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, रेजिडेंट चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं भाग ले रहें है।
कोर्स डायरेक्टर प्रो.डॉ.अतुलाभ वाजपेयी ने बताया कि इस सम्मेलन का लक्ष्य चिकित्सा समुदाय को स्ट्रोक,न्यूरोइंटरवेंशन और न्यूरोथियोलॉजी के नवीनतम शोध और तकनीकों से जोड़ना है। न्यूरोसाइंस में हो रहे आधुनिक परिवर्तन एवं भारतीय आध्यात्मिक दृष्टिकोण को एक साथ मंच पर लाना इस आयोजन की प्रमुख विशेषता है।
’12वां उदयपुर कोर्स ऑन न्यूरोसाइंसेज’ का पहले दिन के प्रथम तकनीकी सत्र स्ट्रोक और न्यूरोइंटरवेंशन पर रहा केंद्रित। प्रातः 9 बजे से प्रारंभ हुए पहले तकनीकी सत्र में स्ट्रोक प्रबंधन और न्यूरोइंटरवेंशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन व्याख्यान दिए गए। डॉ.एम.वी. पद्मा ने स्ट्रोक रोगी के मूल्यांकन पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ.पवन ओझा ने एआई आधारित स्ट्रोक इमेजिंग’ की नवीनतम तकनीकों को साझा किया। डॉ.गिरीश राजपाल और डॉ. अमित असलम खान ने लार्ज वेसल ऑक्लूजन और मीडियम वेसल ऑक्लूजन जैसे जटिल स्ट्रोक के प्रकारों पर चर्चा की।
दूसरे सत्र में डॉ.तुफैल पाटणकर, डॉ.मुकेश शर्मा, और डॉ.अतुलाभ वाजपेयी ने ’कैरेटिड स्टेंटिंग’, ’स्ट्रोक क्लॉक अवधारणा’ और ’न्यूरोरिहैबिलिटेशन’ पर अपने अनुभव साझा किए।
डॉ.अतुलाभ वाजपेयी ने ’मस्तिष्क के भीतर की धमनियों में एथेरोस्क्लेरोसिस’ पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होने बताया कि मस्तिष्क के भीतर की धमनियों में एथेरोस्क्लेरोसिस’एक ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क के अंदर की रक्त धमनियों की भीतरी दीवारों पर वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थोंका जमाव हो जाता है। इससे रक्त प्रवाह धीमा या बाधित हो सकता है, जो ’’स्ट्रोक (लकवा)’’ का कारण बन सकता है।
सम्मेलन का दूसरा तकनीकी सत्र एन्यूरिज़्म प्रबंधन पर केंद्रित रहा जिसमें एन्यूरिज़्म के निदान व उपचार तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान डॉ.राकेश सिंह,डॉ.अनिल करापुरकर,डॉ.उदय एस.लिमये और डॉ.तुफैल पाटणकर’’ ने सेरेब्रल डीएसए हार्डवेयर चयन, बाइफरकेशन व साइड वॉल एन्यूरिज़्म जैसे विषयों पर चर्चा की। डॉ.नितिन डांगे,डॉ.मनीष चुग और डॉ.विवेक गुप्ता ने जायंट एवं ब्लिस्टर एन्यूरिज़्म के लिए इंट्रासेक्युलर डिवाइस,एफडी की जटिलताओं एवं कोबाल्ट-क्रोम व डीएफटी के तुलनात्मक उपयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
यह सम्मेलन न केवल वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान का अवसर है, बल्कि भारतीय चिकित्सा और संस्कृति के समन्वय का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सम्मेलन मे दूसरे दिन 28 सितम्बर को ’न्यूरोथियोलॉजी’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन होगा, जिसमें चिकित्सा, विज्ञान, और आध्यात्मिकता के संगम पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
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’12वां उदयपुर कोर्स ऑन न्यूरोसाइंसेज’ राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
स्ट्रोक,न्यूरोइंटरवेंशन एवं न्यूरोथियोलॉजी पर हुआ मंथन
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