उदयपुर। चिकित्सा जगत में तकनीक और अनुभव के मेल ने एक बार फिर एक जटिल मामले को सुलझाकर मरीज को नई जिंदगी दी है। भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में 68 वर्षीय एक बुजुर्ग का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया, जिनके प्रोस्टेट का आकार सामान्य से कई गुना बड़ा यानी 218 ग्राम था। इस सफल ऑपरेशन यूरोलॉजिस्ट एवं रिकंस्ट्रक्शनल सर्जन डॉ. हनुवन्त सिंह राठौड के साथ डॉ.हॉर्दिक पटेल,निश्चेतना विभाग के डॉ.प्रकाश औदिच्य,डॉ.अनिल,डॉ. प्रियांशी,डॉ.गोविन्द,घनश्याम एवं चन्द्रमोहन का योगदान रहा।
68 वर्षीय यह मरीज लंबे समय से पेशाब में रुकावट और पेशाब के साथ खून आने की गंभीर समस्या से पीड़ित था। परिजनों ने पहले अहमदाबाद के बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया और वहां ऑपरेशन भी कराया। हालांकि, प्रोस्टेट का आकार अत्यधिक बड़ा होने और सर्जरी के दौरान हो रही भारी ब्लीडिंग के कारण वहां ऑपरेशन सफल नहीं हो सका। निराश होकर परिजन मरीज को उदयपुर लेकर आए और पीएमसीएच के यूरोलॉजिस्ट एवं रिकंस्ट्रक्शनल सर्जन डॉ. हनुवन्त सिंह राठौड़ से संपर्क किया।
डॉ. हनुवन्त सिंह राठौड़ ने बताया कि मरीज जब पीएमसीएच आया, तो उसकी स्थिति काफी कष्टदायक थी। जांच में प्रोस्टेट का साइज 200 ग्राम से अधिक (लगभग 218 ग्राम) पाया गया। इतने विशाल प्रोस्टेट का पारंपरिक सर्जरी (चीरा लगाकर या पुरानी दूरबीन विधि) से ऑपरेशन करना जोखिम भरा होता है, क्योंकि इसमें रक्तस्राव को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण होता है।
डॉ. राठौड़ ने इस केस के लिए आधुनिक थूलियम लेजर तकनीक को चुना। यह जटिल ऑपरेशन मात्र 1 घंटे में सफलतापूर्वक कर लिया गया। लेजर तकनीक की मदद से प्रोस्टेट को निकाला गया, जिसमें मरीज को ब्लीडिंग की समस्या नहीं हुई। ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
बड़े प्रोस्टेट के लिए क्यों बेहतर है लेजर तकनीक?
डॉ.हनुवन्त सिंह राठौड़ ने बताया कि बड़े साइज के प्रोस्टेट के मामलों में लेजर विधि सबसे अधिक कारगर है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें संक्रमण का खतरा न के बराबर होता है और ब्लीडिंग की दिक्कत नहीं आती। जहां पारंपरिक सर्जरी में बड़े प्रोस्टेट के लिए काफी रिस्क होता है, वहीं लेजर से इसे सुरक्षित और कम समय में अंजाम दिया जा सकता है।
गौरतलब है कि डॉ.हनुवन्त विगत 5 बर्षो में 350 से ज्यादा ¬ प्रोस्टेट की लेजर द्वारा सर्जरी कर चुके है जिसमे प्रोस्टेट का साइज 100 ग्राम से ज्यादा था।
चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि पीएमसीएच का सदैव यही प्रयास रहता है कि हम दक्षिणी राजस्थान के मरीजों को विश्वस्तरीय अत्याधुनिक तकनीकें और अनुभवी विशेषज्ञों की सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध करा सकें। थूलियम लेजर जैसी आधुनिक सुविधाओं के कारण अब प्रोस्टेट के गंभीर से गंभीर मामलों का सटीक उपचार पीएमसीएच में संभव हो पा रहा है।
Pacific Group
पेसिफिक मेडिकल कॉलेज में 218 ग्राम प्रोस्टेट का थूलियम लेजर से सफल ऑपरेशन
बुजुर्ग मरीजों के लिए वरदान है यह तकनीक
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