उदयपुर, खेल-खेल में बच्चों की जिज्ञासा कभी-कभी उनके जीवन पर भारी पड़ सकती है। ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला उदयपुर के भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में सामने आया, जहाँ चिकित्सकों ने अपनी कुशलता और त्वरित निर्णय से एक 2 वर्षीय मासूम के पेट से लोहे की एलनकी (L&Key) निकालकर उसे मौत के मुँह से बाहर निकाला।
टूल बॉक्स से खेलते समय हुआ हादसा
दरअसल भीलवाड़ा जिले के गंगापुर निवासी 2 वर्षीय जयराज अपने परिजनों से मोबाइल फोन लेने की जिद कर रहा था। जयराज के पिता पेशे से कार मैकेनिक हैं, जिसके चलते घर में अक्सर औजारों का टूल बॉक्स रखा रहता है। मोबाइल न मिलने पर बच्चा कमरे में रखे टूल बॉक्स के सामान से खेलने लगा। इसी दौरान बच्चे की माँ रसोई के कार्यों में व्यस्त हो गई।
खेलते-खेलते मासूम जयराज ने टूल बॉक्स में रखी एक सख्त लोहे की एलनकी निगल ली। कुछ ही देर में बच्चे को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और उसकी हालत बिगड़ने लगी। घबराए परिजन उसे तुरंत स्थानीय निजी अस्पताल ले गए, जहाँ प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे भीलवाड़ा और फिर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर रेफर कर दिया।
परिजनों ने गंगापुर निवासी शंकर सुखवाल से संपर्क किया, जिन्होंने बच्चे को तुरंत पीएमसीएच भीलों का बेदला में भर्ती कराने की सलाह दी। अस्पताल पहुँचते ही गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. मयंक आमेटा ने बिना एक पल गंवाए बच्चे का एक्स-रे और सीटी स्कैन करवाया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि लोहे की एलनकी बच्चे के पेट में फंसी हुई थी।
डॉ. मयंक आमेटा ने बताया कि एलनकी जैसे नुकीले और सख्त औजार को एंडोस्कोपी के माध्यम से निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा कार्य था। इसे निकालते समय श्वसन नली (Food pipe&Windpipe) के फटने या आंतरिक चोट लगने का गहरा खतरा रहता है, जो जानलेवा साबित हो सकता था। लेकिन अस्पताल में उपलब्ध विश्वस्तरीय आधुनिक सुविधाओं और अनुभवी टीम के कारण हमने इसे बिना सर्जरी के सफलतापूर्वक निकाल लिया।
इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम देने वाली टीम में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. आशीष मेहता, डॉ. मयंक आमेटा,निश्चेतना विभाग की डॉ.गरिमा भण्डारी, एंडोस्कोपी टेक्नीशियन विजय व अजीम, और नर्सिंग स्टाफ लवीशा, कृष्णा एवं नरेश शामिल थे। चिकित्सकों की इस तत्परता ने न केवल बच्चे की जान बचाई, बल्कि उसे एक बड़ा ऑपरेशन कराने के कष्ट से भी बचा लिया। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने चिकित्सकों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य हमेशा से ही आमजन को सर्वाेत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना रहा है। आपातकालीन स्थितियों में सही समय पर लिया गया फैसला ही जीवन रक्षक होता है। हमारे डॉक्टर्स ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता साबित की है।
डॉ.मयंक आमेटा ने आमजन और विशेषकर छोटे बच्चों के माता-पिता को सलाह दी है कि बच्चों की पहुँच से छोटी और नुकीली चीजें जैसे सिक्के, सेल, बटन, पिन और औजार दूर रखें।
Pacific Group
मासूम की जान पर बन आई एलनकी,
पीएमसीएच के चिकित्सकों ने एंडोस्कोपी से सुरक्षित निकाल दिया नया जीवन
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