उदयपुर, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल के फार्माकोलॉजी एवं फिजियोलॉजी विभाग की ओर से “गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। 11 एवं 12 मई को आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान में नैतिकता, पारदर्शिता, रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण शोध पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यशाला के प्रथम दिवस आयोजित उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ.एम.एम.मंगल विशिष्ट अतिथि डॉ. यू. एस. परिहार एवं डॉ. आर. के. पालीवाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता ही भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं का आधार है। इस तरह के शैक्षणिक आयोजन न केवल शोधकर्ताओं के ज्ञान को आधुनिक बनाते हैं, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान को एक नई दिशा और अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रदान करते हैं।
कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। पीजीआई चण्डीगढ़ के डॉ. आशीष कक्कड़ ने जैव-चिकित्सा अनुसंधान हेतु राष्ट्रीय नैतिक दिशानिर्देश पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस का परिचय देते हुए बताया कि किसी भी क्लिनिकल ट्रायल में मरीज की सूचित सहमति कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बिना पूर्ण पारदर्शिता के कोई भी शोध सफल नहीं माना जा सकता।
एम्स नागपुर से डॉ. खुशबू बिष्ट ने क्लिनिकल परीक्षणों के दौरान सुरक्षा रिपोर्टिंग के विषय पर बोलते हुए कहा कि अनुसंधान के दौरान मरीजों की सुरक्षा सर्वाेपरि है। किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की रिपोर्टिंग में देरी या लापरवाही शोध की विश्वसनीयता को खत्म कर सकती है।
एम्स कल्याणी के डॉ. अर्कपाल बंद्योपाध्याय ने क्लिनिकल परीक्षण एवं औषधि विकास विषय पर आधुनिक औषधि विकास की जटिल प्रक्रियाओं और अनुसंधान के क्षेत्र में आने वाली वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के दौरान डॉ. रोहिताश यादव ने उत्तम प्रकाशन पद्धति विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि केवल शोध करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रकाशित करना भी उतना ही जरूरी है। शोध प्रकाशन में डेटा की चोरी से बचना, पारदर्शिता बनाए रखना और नैतिक मूल्यों का पालन करना एक अच्छे शोधकर्ता की पहचान है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में लगभग 300 विद्यार्थियों, रेजिडेंट चिकित्सकों एवं संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा क्लिनिकल अनुसंधान, नैतिक दिशा-निर्देशों एवं गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
कार्यक्रम की आयोजन अध्यक्ष डॉ. विनोदीनी वरहाडे ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ शोधकर्ताओं, रेजिडेंट चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अनुसंधान कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैं तथा चिकित्सा अनुसंधान में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाती हैं।
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. रोहिताश यादव ने बताया कि गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान की आधारशिला है तथा इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को क्लिनिकल अनुसंधान, रोगी सुरक्षा एवं प्रकाशन नैतिकता के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक एवं अद्यतन जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ.झलक पटेल, डॉ.प्रिंसी पांडे,डॉ.नमन सिंघल,डॉ.प्रत्युष उपाध्याय, डॉ.देवान्जली,डॉ.अंजना एवं रीना शर्मा का विशेष योगदान रहा।
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गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस” पर पेसिफिक मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
चिकित्सा अनुसंधान में नैतिकता, पारदर्शिता, रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण शोध पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना उद्देश्य
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