उदयपुर। कहते हैं कि जाको राखे साइयां, मार सके न कोय और जब ईश्वर के साथ-साथ धरती के भगवान यानी डॉक्टरों का हुनर और जज्बा मिल जाए, तो मौत के मुंह में जा चुका इंसान भी हंसता-मुस्कुराता हुआ अपने घर लौट आता है। ऐसा ही एक हैरतअंगेज वाकया उदयपुर के भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में देखने को मिला। एक भीषण सड़क हादसे का शिकार होकर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे एक 36 वर्षीय युवक को डॉक्टरों के सामूहिक प्रयासों और त्वरित निर्णय के चलते नई जिंदगी मिली है। इस जटिल सफल केस में पीएमसीएच के चेस्ट एवं टीबी रोग विभाग के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. आमिर शौकत,डॉ.अतुल लुहाड़िया,डॉ.जल्पित पटेल,डॉ.निश्चय भारद्वाज,डॉ.अंशुल कुमार,नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ.एस.एस.कौशिक,डॉ.राजकुमार और आईसीयू के डॉ.चेतन गोयल, डॉ.इब्राहिम सहित नर्सिंग स्टाफ की टीम का सराहनीय योगदान रहा।
दरअसल 36 वर्षीय युवक मोटरसाइकिल से काम पर जा रहा था, तभी अचानक एक गाय से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि युवक दूर जा गिरा और मौके पर ही बेहोश हो गया। युवक को अत्यंत गंभीर स्थिति में पीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग में लाया गया। मरीज के गले पर एक गहरा और जानलेवा घाव था, जिसने उसकी श्वास नली को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसके अलावा, उसकी रीढ़ की हड्डी (सी5-सी6 सर्वाइकल स्पाइन) में फ्रैक्चर था, बायां फेफड़ा पूरी तरह पिचक चुका था और फेफड़ों के बीच के हिस्से में हवा भर गई थी, जिसके चलते मरीज का सांस लेना लगभग नामुमकिन हो रहा था।
चिकित्सकों ने बिना एक पल गंवाए मरीज के गले के गहरे घाव की तुरंत सर्जरी की श्वास नली की चोट को स्टेबलाइज (स्थिर) किया और वायुमार्ग को सुरक्षित किया। इसके बाद मरीज को तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया गया। पिचके हुए फेफड़े को फुलाने के लिए छाती में एक नली डाली गई, लेकिन स्थिति इतनी जटिल थी कि फेफड़ा फिर भी पूरी तरह से नहीं फूल पा रहा था और ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा था।
मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए इंटरवेंशन पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. आमिर शौकत ने तुरंत ब्रोंकोस्कोपी करने का फैसला किया। जांच में सामने आया कि श्वास नली में कट लगने के साथ-साथ बलगम का एक बहुत बड़ा थक्का बाएं मुख्य ब्रोंकस को पूरी तरह ब्लॉक किए बैठा था, जिससे फेफड़े तक हवा नहीं पहुंच पा रही थी। डॉ. आमिर ने अपनी आधुनिक इंटरवेंशन पल्मोनोलॉजी तकनीकों से श्वास नली को स्टेबलाइज किया और वहां फंसे बलगम को सुरक्षित बाहर निकाला। बलगम निकलते ही मरीज का बायां फेफड़ा तेजी से फैलने लगा और उसकी सांसें सामान्य होने लगीं।
मरीज के लिए न्यूमोमीडियास्टिनम (फेफड़ों के बीच हवा भरना) एक और बड़ा खतरा था। अगर समय रहते इसे ठीक न किया जाता, तो यह दिल और फेफड़ों पर दबाव बनाकर जान ले सकता था। लेकिन आईसीयू विशेषज्ञों की टीम ने चौबीसों घंटे मरीज की कड़ी निगरानी की। सटीक दवाइयों, ऑक्सीजन सपोर्ट और निरंतर आईसीयू केयर के चलते यह जानलेवा स्थिति भी धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो गई। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
डॉ. आमिर शौकत ने बताया कि यह चिकित्सा विज्ञान के आधुनिक दौर और बेहतरीन टीम वर्क के साथ ही त्वरित फैसले और ब्रोंकोस्कोपी ने मरीज को नया जीवनदान दिया है। मरीज पूरी तरह से ठीक है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।
पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने डॉक्टरों की सराहना करते हुए कहा कि यह सफल इलाज अस्पताल के उत्कृष्ट टीम वर्क, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और डॉक्टरों के अटूट जज्बे का प्रतीक है। हमारा संस्थान हर नागरिक को उच्च स्तरीय और जीवन रक्षक चिकित्सा सेवाएं देने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
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मौत के पहिए को मात देकर वापस लौटीं जिंदगी की सांसें
पीएमसीएच के चिकित्सकों ने 36 वर्षीय युवक को दी नई जिंदगी
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