कृमियों (कीड़ों) के कारण मात्र 1.5 ग्राम हेमोग्लोबिन के साथ अत्यंत गंभीर स्थिति में आये रोगी का गीतांजली हॉस्पिटल में हुआ सफल इलाज

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Published on : 15 May, 24 07:05

कृमियों (कीड़ों) के कारण मात्र 1.5 ग्राम हेमोग्लोबिन के साथ अत्यंत गंभीर स्थिति में आये रोगी का गीतांजली हॉस्पिटल में हुआ सफल इलाज

गीतांजली मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल उदयपुर सभी चिकित्सकीय सुविधाओं से परिपूर्ण हैl यहां निरंतर रूप से जटिल से जटिल उपचार व ऑपरेशन कर रोगियों को स्वस्थ जीवन दिया जा रहा है| गीतांजली हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग से डॉ पंकज गुप्ता,डॉ धवल व्यास, डॉ मनीष दोडमानी के अथक प्रयासों से 20 वर्षीय रोगी को स्वस्थ जीवन प्रदान किया गया|

विस्तृत जानकारी:

डॉ पंकज ने बताया कि रोगी को अत्यंत गंभीर स्थिति में गीतांजली हॉस्पिटल लाया गया तब उसका सांस फूल रहा था, चलने में असक्षम था, शरीर पूरा पीला पढ़ चुका था उसका हेमोग्लोबिन मात्र 1.5 ग्राम था| रोगी को आते ही आई.सी.यू में भर्ती किया गया| लगभग छः माह पहले रोगी को खून चढ़ाया जाने के बाद भी रोगी में गंभीर रूप से खून की कमी थी| गीतांजली हॉस्पिटल आने पर भी रोगी को खून चढ़ाया गया| रोगी में खून की इतनी भारी मात्रा में कमी होने के कारण का पता लगाया गया| रोगी की एंडोस्कोपी की गयी जिसमें कृमियों (कीड़ों) के हज़ारों की संख्या गुच्छे थे कि वह रोगी का खून पी रहे थे| रोगी का तुरंत उपचार शुरू किया गया व कृमियों को मारने की दवा (डीवर्मिंग) 15 दिन तक लगातार दी गयी| रोगी को तीसरे दिन आई.सी.यू से वार्ड में शिफ्ट किया गया|

रोगी के पिता ने बताया कि रोगी पिछले कई वर्षों से खून की कमी से झूझ रहा था और बार बार खून चढ़वाना पढ़ रहा था परन्तु शरीर में कृमियों के होने के बारे में सिर्फ गीतांजली हॉस्पिटल आने पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ पंकज गुप्ता द्वारा ही की गयी|

डॉ पंकज ने यह भी बताया ये कीड़े किसी भी उम्र में हो सकते हैं खासकर जो कृषक हैं या गीली मिट्टी में काम करने वाले लोग हैं तब ये कीड़े त्वचा के माध्यम से खून में चले जाते हैं इसके पश्चात् फेफेड़ों में और फिर ये कीड़े आँतों में चले जाते हैं| इसके लिए सरकार द्वारा भी डीवर्मिंग कार्यक्रम चलाये जाते हैं जिसके तहत हर छः माह के अन्तराल पर डीवर्मिंग दवाई दी जाती है|

मुख्य सन्देश

यदि किसी भी कृषक व मिट्टी में काम करने वाले व्यक्ति जिनके खून की कमी है जिस कारण चेहरे में पीलापन, सांस जलसी फूल रहा है या धड़कन तेज़ हो रही है उसको तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाएँ जिससे समय रहते रोगी को इलाज मिल सके|

गीतांजली हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी तथा जी. आई. सर्जरी से संबंधित सभी एडवांस तकनीके व संसाधन एंडोस्कोपी यूनिट में उपलब्ध हैं जिससे जटिल से जटिल समस्याओं का निवारण निरंतर रूप से किया जा रहा है।

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल पिछले सतत् 17 वर्षों से एक ही छत के नीचे सभी विश्वस्तरीय सेवाएं दे रहा है और चिकित्सा क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करता आया है, गीतांजली हॉस्पिटल में कार्यरत डॉक्टर्स व स्टाफ गीतांजली हॉस्पिटल में आने प्रत्येक रोगी के इलाज हेतु सदेव तत्पर है|


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