कारुलाल विजावत के नेत्रदान से दो लोगों को मिलेगी नई नेत्र ज्योति
नेत्रदान से मृत्यु के बाद भी जहां आंखों की ज्योति को जीवित रखा जा सकता है,वही वह दो दृष्टिहीनों की दुनिया में भी रोशनी का संचार करता है । परोपकार की यह भावना कोटा से 150 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य, मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के ग्राम बोलिया में, जोकि कोटा से 150 किलोमीटर दूर है,देखने को मिली,जहां 14 दिन के अंदर दूसरा नेत्रदान संपन्न हुआ।
बोलिया निवासी प्रकाश भंडारी ने बताया की, गुरुवार रात्रि को पान विक्रेता कारुलाल विजावत के निधन का समाचार व्यापारी राकेश चौधरी को प्राप्त हुआ,उन्होंने विजावत के पुत्र सुनील, अनिल, मनीष और संजय ने नेत्रदान की चर्चा की ।
ज्ञात हो कि,अभी 14 दिन पहले,पड़ौस में रह रहे,राकेश चौधरी के पिता स्व० मोहनलाल चौधरी के नेत्रदान के समय विजावत परिवार भी उपस्थित था, नेत्रदान में किसी भी तरह की चेहरे पर विकृति नहीं आती एवं जलकर राख होने जा रही आंखें, किसी असहाय नेत्रहीन को नई नेत्र ज्योति प्रदान करती है, इसी भाव के तहत विजावत परिवार के द्वारा नेत्रदान की सहज सहमति प्रदान की गई ।
ज्योति मित्र आकाश भंडारी के द्वारा नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल भवानीमंडी को सूचना देने पर शाइन इंडिया फाउंडेशन कोटा के डॉ कुलवंत गौड़ ने रात्रि 1 बजे ज्योति रथ से बोलिया पहुंचकर नेत्रदान प्राप्त किया। नेत्रदान प्रक्रिया में अंकित तरसिग, विकेश चौधरी आदि का सहयोग रहा।
नेत्रदानी विजावत का कॉर्निया अच्छा पाया गया है, इसे आई बैंक सोसाइटी जयपुर भिजवा दिया गया है,जहां यह दो नेत्रहीनों को नई रोशनी दे सकेगा।
देर रात्रि में संपन्न नेत्रदान प्रक्रिया के बाद शाइन इंडिया फाउंडेशन के द्वारा बड़ी संख्या में उपस्थित नगरवासियों की उपस्थिति में परिवार को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार नेत्रदान के निर्णय के लिए पूर्व में संकल्प की औपचारिकता होना आवश्यक नहीं है, संक्रमण को छोड़कर सामान्य सभी मृत्यु का नेत्रदान संभव है, नेत्रदान में समय का अत्यंत महत्व है,ऐसे में परिवार के द्वारा शीघ्र निर्णय इस विषय में अत्यधिक महत्वत्ता रखता है।