उदयपुर। नए साल में जिलों की नगरी उदयपुर शहर के ग्राम पंचायत ईसवाल के सेलू गांव में मोयेन्द्र (प्रस्तावित नाम) फाउन्डेशन द्वारा एक नई सौगात के रूप में 10 बीघा भूमि पर राधा-कृष्ण मन्दिर गौ-शाला, हेप्पी होम, संगीत संग्रहालय बनाये जायेगें। जिसे सेवा साधना, गौ सेवा एवं संगीत के अनूठे संगम के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पुनीत कार्य हेतु ठाकुर जी की कृपा से श्रीमती रंजना भाटी पत्नी स्व. श्री मोहन सिंह भाटी द्वारा लगभग 10 बीघा भूमि मोयेन्द्र (प्रस्तावित नाम) फाउन्डेशन को दान दी जा रही है।
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अब जल्द ही उदयपुर के पर्यटन मानचित्र पर एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। शहर के समीप सेलू गांव में एक ऐसा विशेष परिसर विकसित किया जा रहा है, जहां एक ही स्थान पर राधा-कृष्ण मंदिर, गौशाला, हैप्पी होम और संगीत वाद्य यंत्रों का संग्रहालय स्थापित किया जाएगा।
मोयेंद्र फाउंडेशन (प्रस्तावित नाम) इस परियोजना में हैप्पी होम, गौशाला, राधा-कृष्ण मंदिर तथा संगीत वाद्य यंत्रों का संग्रहालय एक ही परिसर में विस्तृत, भव्य और सुव्यवस्थित रूप से विकसित किए जाएंगे। यह परियोजना हर वर्ग के लिए सुखद, प्रेरणादायक और उपयोगी होने के साथ-साथ उदयपुर का एक नया आकर्षण भी बनेगी।
कृष्ण-दासी (रंजना भाटी) मोयेन्द्र फाउन्डेशन (प्रस्तावित नाम) की मैनेजिंग डायरेक्ट और सुरों की मंडली के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि नया साल 2026 उदयपुर के लिए एक ऐतिहासिक शुरुआत लेकर आने वाला है। अरावली की गोद में बसे इस झीलों के शहर को अब एक नई, मानवीय और आध्यात्मिक पहचान मिलने जा रही है। मोयेंद्र फाउंडेशन (प्रस्तावित नाम) ने उदयपुर के समीप सेलू गांव में एक भव्य, बहुआयामी और प्रेरणादायक परिसर के निर्माण की घोषणा की है, जो कि ‘संगीत, साधना, सेवा और संवेदना का जीवंत संगम’ होगा। उन्होंने बताया कि यह सभी भाग एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे और पूरे परिसर को एक सामूहिक पहचान प्रदान करेंगे।
प्रसिद्ध आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने बताया कि लगभग 10 बीघा क्षेत्रफल में भव्य निर्माण कार्य किया जाएगा। इसे बहुत ही सुन्दर और भव्य रूप में तैयार किया जाएगा ताकि यह पर्यटन के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो सके। मन्दिर, गौशाला, हैप्पी होम और संगीत संग्रहालय का एक ही स्थान पर निर्माण होगा वाकई उदयपुर के लिए नया आकर्षण बनेगा।
उन्होंने कहा कि संगीत का मेवाड़ से पुराना नाता रहा है। संगीत संग्रहालय का निर्माण होने से यह मेवाड़ की संगीत विरासत का सजीव प्रमाण बनेगा। यह नई पीढ़ी को संगीत से जोड़ने के साथ-साथ मेवाड़ की पुरानी और लुप्त होती सुर परंपराओं को पुनर्जीवित करेगा।
समाज के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध परियोजना-प्रोफेशनल सर्विस लीडर पंकज गहलोत ने परियोजना पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हैप्पी होम, गौशाला, राधा-कृष्ण मंदिर, म्यूजियम और सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ सेक्शन-8 ट्रस्ट के अंतर्गत प्रस्तावित यह परियोजना समाज के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होगी। यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान, आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उदयपुर में एक ही स्थान पर संस्कृति, सेवा, श्रद्धा और संगीत का ऐसा संगम हम सभी के लिए गर्व का विषय होगा।
सेवा के साथ सांस्कृतिक विरासत को संजोने का कार्य करेगी परियोजना-समाजसेवी विजय सराफ ने बताया कि उदयपुर में प्रस्तावित यह बहुआयामी परियोजना समाज के विकास की दिशा में एक नई पहचान स्थापित करने जा रही है। इस योजना के अंतर्गत हैप्पी होम, गौशाला, राधा-कृष्ण मंदिर, संग्रहालय तथा आधुनिक आवश्यक सुविधाओं का समावेश किया गया है। यह पहल केवल भौतिक निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को सशक्त करने, आध्यात्मिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का कार्य करेगी।
एक ही परिसर में सेवा, आस्था, संस्कृति और संगीत का होगा समावेश-चांद कुमार पालीवाल ने बताया कि प्रस्तावित परियोजना सामाजिक सरोकारों और सांस्कृतिक चेतना का एक अनूठा उदाहरण बनने की ओर अग्रसर है। इस ्रपोजेकट में अनेक आवश्यक सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। यह पहल केवल बुनियादी ढाँचे के निर्माण तक सीमित न रहकर समाज में सकारात्मक सोच, आध्यात्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। एक ही परिसर में सेवा, आस्था, संस्कृति और संगीत का समावेश उदयपुर को एक प्रेरणादायी पहचान देगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण धरोहर सिद्ध होगा।
राधा-कृष्ण मंदिर कृ भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र- परिसर का हृदय होगा राधा-कृष्ण मंदिर, जो भक्ति, वास्तु-कला और अध्यात्म का सुंदर संगम बनेगा। पत्थर की नक्काशी, पारंपरिक वास्तुशिल्प और कलात्मक स्तंभ इसे पवित्र गरिमा देंगे। मंदिर का हर दृश्य सौन्दर्य, भक्ति रस और अध्यात्म का प्रतीक होगा।
मंदिर में होंगी ये प्रमुख सुविधाएँ- दिव्य गर्भगृह में स्थापित होंगी राधा-कृष्ण की मूर्तियाँ, जिनका श्रृंगार प्रतिदिन अलग रंग और भाव से किया जाएगा। प्रतिदिन चारों बेला की आरती, मंगला, श्रृंगार, संध्या और शयन कृ भक्तों के सहभाग के साथ होगी।सप्ताहिक भजन, कथा, प्रवचन, नाम-संकीर्तन और सत्संग सभाएँ,सत्संग सभागार में देशभर के संतों और विद्वानों के प्रवचन आयोजित होंगे, ध्यान और साधना कक्ष साधकों को मौन और एकांत का अनुभव कराएँगे,अन्न क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को सात्विक प्रसाद, पर्व अवसरों पर अन्नकूट, भंडारा और सामूहिक महोत्सव होगा।
परिसर का दूसरा महत्वपूर्ण भाग है हैप्पी होम, जो जरुरतमंद व्यक्तियों के लिए जीवन का नया अध्याय बनेगा। यह पारंपरिक आश्रम से कहीं अधिक एक ‘सुखद परिवार स्थल’ होगा, जहाँ जरुतदमंदों एवं बुजुर्गों को सुरक्षा, सुविधा और आत्मीयता एक साथ मिलेगी। परिवार बाहर रहता है, और वे अकेले जीवनयापन कर रहे हैं। यहां पर आकर इस परिवार के साथ रह सकेंगे।
हैप्पी होम में होंगी विस्तृत व्यवस्थाएँ-आरामदायक, वातानुकूलित और सुलभ कक्ष, जिनमें आवश्यकतानुसार आपात कॉल सुविधा, टी.वी. और निजी परामर्श व्यवस्था,पूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र और 24 घंटे चिकित्सक परामर्श, फिजियोथेरेपी और योग प्रकोष्ठ, जिससे शारीरिक-मानसिक स्फूर्ति बनी रहे, संगीत, ध्यान और रचनात्मक कार्यशालाएँ, ताकि हर व्यक्ति सक्रिय और उत्साही रहे, सामूहिक भोजन कक्ष में पौष्टिक, आयुवर्गानुसार भोजन,लाइब्रेरी, चर्चा कक्ष, जिनसे सामाजिक संवाद और आत्मसंतोष को बढ़ावा मिलंे, हर महीने उत्सव दिवस और सांस्कृतिक इंटरऐक्शन, जिसमें स्थानीय बच्चे और युवजन बुजुर्गों के साथ समय बिताएंगे।परिसर के तीसरे भाग में गौशाला बनाई जाएगी। जिसमें देशभर के विभिन्न नस्लों सहित लावारिस गायों को संरक्षण व उनका पालन पोषण किया जाएगा। गौशाला केवल आश्रय नहीं, बल्कि मानव-करुणा की प्रयोगशाला होगी। यहां गायों की सेवा के साथ प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व सिखाया जाएगा।
संगीत संग्रहालय अनुभव, रचना और शोध का जीवंत संसार-परिसर का चैथा और कलात्मक पक्ष होगा संगीत संग्रहालय, जो संगीत, संस्कृति और परंपरा को नई पीढ़ी के लिए जीवित रखेगा। यह एक इंटरऐक्टिव सांस्कृतिक संवाद केंद्र होगा, जहां संगीत केवल सुनाया नहीं जाएगा, बल्कि जिया और समझा जाएगा।
परियोजना को लेकर सदस्यों का कहना है कि यह पहल न केवल पर्यटन को नई पहचान देगी, बल्कि शहरवासियों को सेवा, साधना और संवेदनाओं से जोड़ने का माध्यम भी बनेगी। वृद्धजन, गौसेवा, संगीत प्रेमी और श्रद्धालु सभी को एक ही परिसर में सम्मान और सुकून मिलेगा। यह परियोजना उदयपुर के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर सिद्ध होगी। हम सब मिलकर जनसहयोग से इस सपने को साकार करेंगे और उदयपुर को एक नई, प्रेरणादायक पहचान देंगे।