युवा विभाजनकारी ताकतों से सावधान रहते हुए राष्ट्रीय एकता और अखण्डता की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प में- देवनानी

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Published on : 01 Jan, 26 06:01

युवा अपने-अपने क्षेत्रों में भारत महान की अलख जगाए

युवा विभाजनकारी ताकतों से सावधान रहते हुए राष्ट्रीय एकता और अखण्डता की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प में- देवनानी

जयपुर। राजस्थान विधानसभाध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने युवाओं का आ‌ह्वान किया है कि वे देश दुनिया की विभाजनकारी ताकतों से सावधान रहे और राष्ट्रीय एकता और अखण्डता की भावना को बढ़ावा देने का संकल्प लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‌द्वारा लक्षित @ 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी और अहम भूमिका निभाये। साथ ही युवा अपने-अपने क्षेत्रों में भारत महान की अलख भी जगाए।

श्री देवनानी बुधवार को जयपुर के एस.एस. जैन सुबोध पीजी कॉलेज में भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय और राष्ट्रीय सेवा योजना जयपुर के क्षेत्रीय निदेशालय ‌द्वारा आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर के समापन अवसर पर शिविरार्थियों को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। इस शिविर में 11 राज्यों के 200 युवाओं ने भाग लिया। जिसमें 100 छात्र और इतनी ही छात्राएं शामिल हुई।

विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने दक्षिण एशिया में हो रही घटनाओं की चर्चा करते हुए युवाओं से अपील की कि वे राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को सर्वोपरी मानते हुए अपने आपको राष्ट्र को समर्पित करने की भावना का विकास करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता शिविर का मुख्य उ‌द्देश्य भी युवाओं को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय एकता, अखण्डता, भाईचारे और स‌दभावना  की भावना को सुदृढ करना ही है। यह शिविर भारतीय विचारधारा के प्रतीक है जहां शिक्षा, संस्कार, संस्कृति सहयोग, सहभागिता, भाईचारा और सामाजिक उत्तरदायित्व एक साथ आगे बढ़ते है। भारतीय संस्कृति इतनी अधिक सहिष्णुता वाली है जहां हम जीव मातृ पर दया कर चिटियों को भी आटा खिलाते है। साथ ही यह शिविर विविधता में एकता वाले हमारे देश में एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को भी आगे बढ़ाने वाला एक उपयोगी आयोजन है।

श्री देवनानी ने युवाओं से अपील की कि वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की कार्यशैली को अंगीकार करें और आपसी विश्वास, संवाद और सहभागिता की भावना से कार्य करते हुए आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने युवाओं से कहा था कि "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।" इसी प्रकार पश्चिमी बंगाल के हमारे गौरव सुभाष चन्द्र बोस ने भी देश की आजादी की लडाई लड़ी थी। युवाओं को इस भावना के साथ अपने जीवन का लक्ष्य तय करते हुए तथा आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी से सुशिक्षित होकर एक अच्छा नागरिक बनने के साथ ही समाज की कमजोर वर्गों के लिए कार्य करने की प्रेरणा भी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह शिविर तभी सार्थक कहा जायेगा, जबकि भारत के युवा तेजी से आगे बढ़ते हुए अपने देश की मुख्य धारा से जुड़कर आगे बढ़े।

विधानसभाध्यक्ष ने युवाओं का आव्हान किया कि वे अपने मन में मेरा भारत महान है कि भावना का विकास करें और गुलामी काल से ही भरी हुई हीनभावना से उभरकर दुनिया को यह दिखाने का साहस करें कि भारत पहले भी किसी से कम नहीं था और आज भी किसी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति और वेद और पुराण इस तथ्य को दर्शाते है कि भारत ने विश्व को जीने की कला और जीवनशैली सिखाई है जिसके प्रमाण मोहनजोदडों और हड्डपा जैसी प्राचीन सभ्यताओं में देखे जा सकते है। हमारा देश कला, संस्कृति, इतिहास, शिक्षा सहित किसी भी क्षेत्र में कभी पीछे नहीं रहा है। विज्ञान और तकनीकी की बात करे तो आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, चरक आदि विद्यवान इसके ज्वलन्त प्रमाण है। रामायण काल में पुष्पक विमान, महाभारत काल में हजारों मील दूर बैठे संजय का धृतराष्ट्र को महाभारत के युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाना, गणेश जी की सूण्ड जैसी सृजरी, अजन्ता ऐलोरा आदि की मूर्तियों की जीवन्नता की कैमिकल इंजिनियरिंग आदि अनेक ऐसे उदाहरण है जो कि भारत की समृद्ध सभ्यता, कला संस्कृति, विज्ञान और तकनीकी दर्शन आदि को दर्शाते है। आज के युवाओं को गहराई से भारत की इस महान संस्कृति का गहन करना चाहिए और अपने आपको गौरवान्वित महसूस करना चाहिए। श्री देवनानी ने बताया कि उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री रहते हुए स्कूली किताबों में से अकबर महान जैसे पाठ्यक्रम को हटाकर महाराणा प्रताप महान जैसे विषय एवं पाठ को शामिल कराया था। इसके पीछे राजस्थान और भारत के गौरवमयी इतिहास को प्रकाशमान करना ही मुख्य उद्देश्‍य रहा था।

विधानसभाध्यक्ष ने युवाओं से कहा कि वे केवल किताबी ज्ञान ही नहीं लेवे बल्कि उससे बाहर निकलकर अपने जीवन में व्यावहारिक ज्ञान को अपनाएं तथा राष्ट्र प्रेम और भक्ति को सबसे ऊपर रखते हुए स्वावलम्बी बनने का लक्ष्य बनाये। साथ ही भारत में निर्मित स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करें। उन्होंने युवाओं से किसी भी प्रकार का नशा नहीं करने तथा किसी प्रकार की गलत लत को छोड़ने का सकंल्प लेने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा को योग के महत्व को भी समझना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से पूरे विश्व में योग के महत्व को समझा है तथा पूरे विश्व में 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। श्री देवनानी ने युवाओं से अपील की वे प्रधानमंत्री जी की भावना के अनुरूप पर्यावरण, प्रदूषण और स्वच्छता जैसे अभियानों की सफलता में भी अपना सक्रिय योगदान प्रदान करें। इस अवसर पर राजस्थान, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली के शिविर प्रभारियों एवं छात्र-छात्राओं ने शिविर के संबंध में अपने अनुभव भी सुनाए।

विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने विभिन्न राज्यों से राष्ट्रीय एकता शिविर में आए युवाओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किये। साथ ही उनके साथ सामूहिक चित्र भी खिंचवाये।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना, जयपुर के क्षेत्रीय निदेशक श्री एस.पी भटनागर, शिविर समन्वयक डॉ. विशाल गौतम, सुबोध कॉलेज की प्राचार्य प्रो. डॉ रेणु जोशी, कॉलेज के सलाहकार पूर्व आईएस श्री प्रदीप बोरठ और डॉ विकास बैराठी भी मौजूद थे। समारोह के अन्त में राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस) के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. के. के कुमावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


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