उदयपुर। 29 दिसंबर को डूंगरपुर में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक जिले की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। बैठक के दौरान भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सांसद राजकुमार रोत एवं एक विधायक द्वारा इस समिति के सह अध्यक्ष सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के साथ किए गए अमर्यादित व्यवहार को लेकर आदिवासी अंचल सहित पूरे जिले में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी की स्थिति जिले में और अधिक मजबूत हुई है। आमजन में यह भावना स्पष्ट रूप से उभरी कि जिले में “कोई तो बोलने वाला मिला”, जिसने संविधान, विकास और सरकार के पक्ष में निर्भीक होकर आवाज उठाई।
दोवड़ा प्रकरण की नाराजगी में आई कमी, सामान्य व ओबीसी के साथ ही साथ भील वर्ग को मिला संतुलन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोवड़ा प्रकरण को लेकर जो असंतोष विशेष रूप से सामान्य और ओबीसी वर्ग में व्याप्त था, कुछ हद तक भील भी नाराज थे, इस घटनाक्रम के बाद उसमें काफी हद तक संतुलन आया है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा बैठक में सरकार और संविधान का पक्ष मजबूती से रखने से सभी वर्गों में यह संदेश गया कि भाजपा उनके हितों और सम्मान के प्रति संवेदनशील है।
जहां प्रशासन चुप रहा, वहां सांसद ने रखा सरकार का पक्ष
दिशा बैठक में एजेंडे से हटकर विषय उठाए जाने पर प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर, जोकि इस कमेटी का सचिव है, को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए सरकार और संवैधानिक व्यवस्था का पक्ष मजबूती से रखा। उन्हीं के हस्तक्षेप से गतिरोध के बाद भी मीटिंग पूरी हुई और बैठक के अंत में शेष रहे बिंदुओं को सांसद डॉ रावत ने पूरा किया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि दिशा समिति एक संवैधानिक मंच है और इसकी कार्यवाही नियमों के अनुरूप ही होनी चाहिए।
राजस्थान में भाजपा सरकार, स्वर भी सकारात्मक और जिम्मेदार
सांसद रावत ने यह भी रेखांकित किया कि राजस्थान में भाजपा की सरकार है और सरकार का स्वर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विकासोन्मुख, संतुलित और सकारात्मक है। बैठक में उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी क्षेत्रों के लिए किए जा रहे कार्यों और योजनाओं को तथ्यात्मक एवं सकारात्मक ढंग से सामने रखा।
संविधान की लक्ष्मण रेखा स्पष्ट की
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया कि चर्चा संविधान की लक्ष्मण रेखा के भीतर ही होगी। दिशा समिति का उद्देश्य विकास कार्यों की समीक्षा है, न कि राजनीतिक टकराव। इसी स्पष्टता ने बैठक की दिशा तय की।
मोदी सरकार द्वारा गठित समिति, उसी अनुरूप हो चर्चा
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिशा समिति का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा किया गया है, इसलिए इसकी बैठक में चर्चा और निर्णय उसी भावना, नियमों और मर्यादाओं के अनुरूप होने चाहिए। भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार इस बैठक में कोई भी बिंदु अध्यक्ष कम या ज्यादा नहीं करसकता।
तू-तू, मैं-मैं से बीएपी का उज्जड़ आचरण उजागर
जब सांसद ने संवैधानिक दायरे की बात रखी, तो बीएपी नेताओं द्वारा तू-तू, मैं-मैं शुरू कर दी गई। इस व्यवहार ने उनके आचरण को पूरी तरह उजागर कर दिया और यह स्पष्ट हो गया कि वे संवाद और समाधान के बजाय टकराव की राजनीति में विश्वास रखते हैं।
देख लेने’ की धमकी से जनता में बीएपी की बौखलाहट उजागर
बीएपी नेताओं द्वारा सांसद को देख लेने जैसी धमकी दिए जाने से उनकी बौखलाहट जनता के सामने आ गई। इससे आमजन को यह भी समझ में आया कि इस प्रकार की विचारधारा न केवल असंवैधानिक है, बल्कि समाज और युवाओं के लिए भी हानिकारक है। वागड़ में चर्चा यह भी है कि भाजपा की सरकार होते हुए भी यह विधायक इतनी बदतमीजी से क्यों बोला?
युवाओं को भटकाने वाला, विकास विरोधी चरित्र सामने आया
पूरे घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया कि बीएपी का राजनीतिक चरित्र विकास के विरोध और युवाओं को भ्रमित करने वाला है। वहीं, इसके विपरीत सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की छवि एक ऐसे नेता के रूप में उभरी है, जो आदिवासी अंचल में विकास, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य, सनातन मूल्यों की मजबूती और संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भाजपा, मोदी और भजनलाल सरकार के विजन के मजबूत प्रतिनिधि
बीएपी के विरोध और अवरोधों के बावजूद सांसद डॉ. मन्नालाल रावत लगातार केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचा रहे हैं और राज्य में भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों को मजबूती से रख रहे हैं। कुल मिलाकर, 29 दिसंबर की दिशा बैठक ने जहां बीएपी के विकास विरोधी और भटकावपूर्ण चरित्र को जनता के सामने उजागर किया, वहीं सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विकासपरक विजन के एक सशक्त, निर्भीक और जिम्मेदार प्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया।