ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के नेतृत्व में गर्मीण पुलिस लंबित प्रकरणों को निपटाने में राज्य में प्रथम नंबर  पर,अपराधों में भी कमी

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Published on : 03 Jan, 26 12:01

के डी अब्बासी

ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के नेतृत्व में गर्मीण पुलिस लंबित प्रकरणों को निपटाने में राज्य में प्रथम नंबर  पर,अपराधों में भी कमी

कोटा। ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के नेतृत्व में गर्मीण पुलिस लंबित प्रकरणों को निपटाने में राज्य में प्रथम नंबर पर आई है। पिछले वर्ष भी
ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के नेतृत्व में 23- 24 में ग्रामीण पुलिस लंबित प्रकरणों को निपटाने में राज्य में दूसरे स्थान पर आई थी।
कोटा ग्रामीण एसपी  सुजीत शंकर ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्षों  की तुलना में  कुल अपराधों में 15 प्रतिशत की कमी आई है।
उन्होंने  बताया कि 
कोटा वर्ष 2024-25 पुलिस के लिए उपलब्धियों भरा रहा। कोटा ग्रामीण जिले में अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। एसपी सुजीत शंकर ने वार्षिक आंकड़े जारी करते हुए बताया कि जिले में कुल अपराधों में 15 प्रतिशत की कमी आई है। महिला अपराधों में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हत्या के मामलों में चार की कमी हुई है, जबकि लूट और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों में 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।

एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि थानों में  लंबित मामलों को निपटाने में नो (पेंडेंसी) कोटा ग्रामीण प्रदेश में । पहले स्थान पर है। कुल 18,103 परिवादों में से 18,072 का निस्तारण किया जा चुका है। पेंडेंसी मात्र 3 प्रतिशत है, जो प्रदेश में सबसे कम है। दूसरे स्थान पर सलूंबर जिला है। मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के मामलों में 133 प्रकरणों में 195 आरोपियों को गिरफ्तार कर 6 करोड़ 17 लाख 41 हजार 575 रुपए मूल्य

के मादक पदार्थ जब्त किए गए। इनमें डोडा चूरा 833.115 किलो, गांजा 685.537 किलो, अफीम 1.327 किलो, स्मैक 0.714 किलो और चरस 0.098 किलो शामिल है। 31 वाहन भी जब्त किए गए। अवैध शराब के मामलों में 542 प्रकरणों में 547 आरोपियों को गिरफ्तार कर 43,363 लीटर शराब व 13 वाहन जब्त किए गए, जिनकी कीमत 3 करोड़ 68 लाख 5 हजार 200 रुपए है। इस वर्ष 598 लोग लापता हुए, जिनमें से 531 को तलाश लिया गया, जबकि 67 की तलाश जारी है। 11 गुमशुदा बालक-बालिकाओं को सुरक्षित दस्तयाब किया गया। सड़क हादसों में कमी आई है, हालांकि मृतकों की संख्या बढ़कर 161 हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 143 था।

साइबर फ्रॉड में 2 करोड़ 5 लाख 65 हजार 683 रुपए में से 62 लाख 4 हजार 690 रुपए होल्ड करवाए गए तथा 475 मोबाइल बरामद किए गए।

कड़ी मॉनिटरिंग से अपराध पर शिकंजा

एक टीम बनाई थी। उसमें जांच अधिकारी व डीएसपी को रोज मानिंटरिंग में रखा। रोज हर केस की अपडेट ली जाती। कहीं पेंच फंसता तो वे खुद दिशा-निर्देश देते थे। थाने के अलावा एसपी की टीम भी उस में जुट जाती। जांच अधिकारी पर केस को डिस्पोजल की समय सीमा तय की गई थी। परिवादों का खोलने व आरोपी को पकड़ने निस्तारण भी इसी प्रकार किया। इसके लिए भी अलग से टीम थी। अपराध में कमी के लिए शुरुआत से ही ऑपरेशन 5-2 चलाया हुआ था। इसमें बीट कांस्टेबल अपनी बीट में दो 'संही और 5 आपराधिक प्रवृति के लोगों को चिंहित करके कार्रवाई करता। पूरे साल में करीब 2 हजार आदतन बदमाशों को जेल भेजा। संपत्ति संबंधी अपराध में 80 फीसदी आरोपी पकड़े और इतनी ही रिकवरी हुई। उनके खिलाफ चालान भी किए। लापता लोगों के लिए ऑपरेशन सुदामा चलाया। इसमें 150 लोग एक ही महीने में तलाश लिए। मानव तस्करी यूनिट पर हर केस पर रोज मानिंटरिंग की गई।


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