शिक्षा, संघर्ष और चेतना: सावित्रीबाई फुले जयंती पर पुस्तकालय में बौद्धिक संवाद

( 1379 बार पढ़ी गयी)
Published on : 05 Jan, 26 13:01

पुस्तकालय में गूंजी सावित्रीबाई फुले की वैचारिक विरासत

शिक्षा, संघर्ष और चेतना: सावित्रीबाई फुले जयंती पर पुस्तकालय में बौद्धिक संवाद

            कोटा। राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, कोटा में सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर एक प्रेरणादायी प्रश्नोत्तरी एवं बौद्धिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सावित्रीबाई फुले के शैक्षिक, सामाजिक एवं साहित्यिक योगदान से पाठकों को अवगत कराना रहा।

            उद्घाटन सत्र में संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल भारत की प्रथम शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे सामाजिक चेतना की प्रखर वाहक भी थीं, जिन्होंने शिक्षा को वंचित वर्गों तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया।

            सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष श्री शशि जैन ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की समावेशी शिक्षा की अवधारणा की जड़ें सावित्रीबाई फुले के कार्यों में ही निहित हैं।    परामर्शदाता श्री रामनिवास धाकड़ ने उन्हें सामाजिक सुधार की मजबूत धुरी बताते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समान रूप से प्रासंगिक हैं।

            प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में पाठकों की सक्रिय भागीदारी रही। पाठकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले न केवल दलित एवं महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं, बल्कि उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ बुलंद कर काव्य को भी समृद्ध किया। प्रतिभागियों ने उनके साहित्यिक योगदान को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बताया।

            कार्यक्रम का सफल प्रबंधन श्री रोहित नामा एवं श्री अजय सक्सेना द्वारा किया गया। अंत में सभी ने सावित्रीबाई फुले के विचारों को आत्मसात करते हुए शिक्षा, समानता एवं सामाजिक न्याय के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.