गीतांजली इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, डबोक, उदयपुर में स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, अखिल भारतीय शिक्षा परिषद - नई दिल्ली एवं शिक्षा मंत्रालय के मिनीस्ट्री ऑफ इनोवेशन सेल के संयुक्त तत्वाधान में इनोवेशन डिजाईन और एंटरप्रन्योशिप पर बूट केम्प-2026 फेज -3 का आयोजन किया गया । यह बूटकेम्प दिनांक 7 – 9 जनवरी 2026 तक चला । कार्यक्रम का आन लाइन लोकार्पण एआईसीटीइ के वाइस चेयरमेन एंड चीफ़ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. अभय जेरे द्वारा किया गया जिसमे मेम्बर सेक्रेटेरी प्रोफेसर श्यामारथ, एडवायसर - रेग्युलेशन ब्यूरो - डॉ एन एच सिद्धालिंगा स्वामी, इनोवेशन डाइरेक्टर – श्री योगेश ब्रह्मांकर एवं असिस्टेंट इनोवेशन डाइरेक्टर उपस्थित थे |
संस्थान निदेशक डॉ. एस.एम. प्रसन्ना कुमार ने बताया कि यह बूट केम्प में एआईसीटीइ और शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल द्वारा वाधवानी फाउंडेशन के सहयोग से संचालित बहु-चरणीय इनोवेशन, डिज़ाइन और उद्यमिता बूटकैंप पहल का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परिकल्पित अनुसार विद्यालय स्तर पर नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना था । कार्यक्रम में सम्मलित पी एम श्री के सभी प्रिंसिपल एवं टीचर्स को वाधवानी फाउंडेशन के प्रमुख ट्रेनर श्री मकरंद रमेश वेलेनकर एवं श्री एच टी पाटिल द्वारा तकनिकी पहलुओं पर प्रशिक्षित किया गया । इस कार्यक्रम का कोआर्डिनेशन इनोवेशन सेल एआईसीटीइ के रीजनल कोआर्डिनेटर श्री आशिष त्रिपाठी द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. चिंतल पटेल के अनुसार इस कार्यक्रम में राजस्थान राज्य के विभिन्न पी एम श्री विद्यालयों से लगभग 190 प्रिंसपल और टीचर्स ने भाग लिया । समापन समारोह में शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ (इनोवेशन सेल), एआईसीटीई, जयपुर सहायक नवाचार निदेशक डॉ. दीपन साहू, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर पूर्व अध्यक्ष, डॉ. बी. एल. चौधरी, राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के डॉ. श्वेता फागेरिया, एवं “सिंपलकारो” की संस्थापक, सीएस राधिका बालसारिया ने अपने अपने रचनात्मक विचार प्रतिभागिओं के साथ साझा किये ।
एमबीए निदेशक डॉ. पी. के. जैन ने कहा कि इस बूट कैम्प में प्रतिभागियों ने नवाचारों पर चर्चा की, जिससे विभिन्न स्कूलों के अध्यापको को एक-दूसरे से सीखने का अवसर मिला। इस अवसर पर गिट्स के वित्त नियंत्रक बी. एल. जांगिड ने कहा कि इस कार्यक्रम से छात्रों एवं शिक्षकों की रचनात्मकता को बढ़ावा मिला और वे वास्तविक दुनिया की समस्याओं के लिए नए समाधान खोजने के लिए प्रेरित हुए।