दयपुर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ज्येष्ठ प्रचारक रहे कर्मयोगी हस्तीमल हिरण की मकर संक्रांति पर पुण्य स्मृति के अवसर पर विश्व संवाद केन्द्र समिति द्वारा कार्यालय परिसर में स्मरण-चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उनके तपस्वी जीवन, राष्ट्रसमर्पण और विचारों को स्मरण करते हुए विस्तार से चर्चा की गई।
हस्तीमल हिरण ने अपना सम्पूर्ण जीवन ‘तन-मन-जीवन समर्पण’ के भाव से राष्ट्रकार्य को अर्पित किया। वे केवल जीवनपर्यन्त ही नहीं, बल्कि मरणोपरांत भी समाज के लिए प्रेरणा बने, जब उन्होंने नेत्रदान व देहदान का संकल्प लेकर मानव सेवा और शोधकार्य में योगदान दिया।
कार्यक्रम में राजेन्द्र पामेचा, सुभाष भार्गव, नरेंद्र सोनी, विकास छाजेड़, नरेश यादव, महिपाल सिंह राठौड़, मनीष मेघवाल सहित अन्य वक्ताओं ने उनके साथ जुड़े संस्मरण साझा किए। वक्ताओं ने बताया कि हस्तीमल जी अक्सर कहा करते थे— “कार्य करने की चिंता बस इतनी होनी चाहिए कि हम अपना दायित्व ईमानदारी से निभाएं, एवं चिंता कार्य की नहीं कार्यकर्ता की होनी चाहिए संघ कार्य अपने आप होता है।” ऐसे अनेक प्रेरक विचार और प्रसंगों ने उपस्थितजनों को भावविभोर कर दिया।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि हस्तीमल जी का दृष्टिकोण केवल संगठनात्मक कार्यों तक सीमित नहीं था। उनका परिवार और समाज के प्रति भी गहरा लगाव था। विशेष रूप से बच्चों के प्रति उनका स्नेह उल्लेखनीय था और वे उन्हें संस्कारवान व राष्ट्रभक्त नागरिक के रूप में गढ़ने पर सदैव बल देते थे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं व गणमान्य नागरिकों ने गायत्री मंत्र के साथ दिवंगत कर्मयोगी को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।