मधुमेह रोगियों के लिये खुशखबरी,अब सूंघने वाली इन्सुलिन बाजार में उपलब्ध

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Published on : 15 Jan, 26 13:01

दो दिवसीय 13वां एंडो डायाकॉन वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन कल से

मधुमेह रोगियों के लिये खुशखबरी,अब सूंघने वाली इन्सुलिन बाजार में उपलब्ध


उदयपुर। एमएमएस एंडोक्राइन एवं डायबिटीज रिसर्च ट्रस्ट द्वारा उदयपुर में 17 एवं 18 जनवरी को दो दिवसीय 13वां एंडो डायाकॉन राष्ट्रीय स्तर का चिकित्सा वार्षिक सम्मेलन होटल रमाडा में आयोजित किया जा रहा है।  
ट्रस्ट चेयरमैन डाॅ.डी.सी.शर्मा ने बताया कि इस सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए लगभग 25 राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ चिकित्सक भाग लेंगे। सम्मेलन में डायबिटीज, थायरॉयड विकार, ऑस्टियोपोरोसिस, एवं थाइरोइड सहित हार्मोन से जुड़ी अनेक बीमारियों के आधुनिक उपचार एवं नवीन शोध पर व्याख्यान दिए जाएंगे।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण भारत में हाल ही में उपलब्ध कराई गई इनहेलेशनल इंसुलिन (सांस के माध्यम से ली जाने वाली इंसुलिन) पर विशेष व्याख्यान रहेगा, जो मधुमेह उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नई उपलब्धि मानी जा रही है। यह मधुमेह रोगियों के लिये सबसे बड़ी खुशखबरी है।
उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त सम्मेलन में मोटापे पर एक विशेष पूर्ण सिम्पोजियम आयोजित किया जाएगा, जिसमें टिर्जेपेटाइड एवं मोटापे के उपचार में प्रयुक्त नवीन दवाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। हार्मोन एवं बांझपन पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें हार्मोनल असंतुलन, महिलाओं एवं पुरुषों में बांझपन की समस्याएं तथा उनके आधुनिक उपचारों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे,साथ ही थायरॉयड रोगों पर भी विशेष व्याख्यान होंगे, जिनमें थायरॉयड विकारों का निदान एवं उपचार सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा। सम्मेलन में बच्चों में हार्मोन संबंधी समस्याओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें बच्चों की वृद्धि, समय से पहले यौवन तथा बचपन में मोटापा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस एवं मेटाबॉलिक बोन डिजीज पर भी पूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें हड्डियों के स्वास्थ्य एवं फ्रैक्चर की रोकथाम पर चर्चा होगी। इस दो दिवसीय सम्मेलन में राज्यभर से लगभग 250 चिकित्सक एवं प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
डॉ.शर्मा ने बताया कि यह सम्मेलन चिकित्सकों के साथ-साथ समाज में हार्मोन, मधुमेह एवं जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।


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