नितिन नबीन को 45 वर्ष की उम्र में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी की कमान

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Published on : 19 Jan, 26 18:01

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

नितिन नबीन को 45 वर्ष की उम्र में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी की कमान

बिहार के 45 वर्षीय युवा नेता नितिन नबीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/बीजेपी) के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं। रिटर्निंग ऑफिसर के लक्ष्मण ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन के पक्ष में 37 सेट नॉमिनेशन पेपर फाइल किए गए थे।बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए नितिन नबीन के नाम का प्रस्ताव करने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे। सभी नामांकन पत्र वैध पाए गए।
नितिन नबीन के नामांकन में बीजेपी के निवर्तमान  अध्यक्ष और केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव और किरेन रिजिजू सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण को कागजात का पहला सेट सौंपा, जबकि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और कई राज्यों के नेताओं द्वारा अतिरिक्त नामांकन प्रस्तुत किए गए, जो नबीन के लिए भाजपा के समर्थन की व्यापकता को रेखांकित करता है।निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने के लिए नितिन नबीन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित सभी केंद्रीय और प्रादेशिक नेताओं से बधाईयां मिलना प्रारम्भ हो गई हैं।

भाजपा में नितिन नबीन की ताजपोशी यानी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने की तारीख पहले से तय हो चुकी है। नितिन नबीन औपचारिक रूप से 20 जनवरी  को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का पदभार संभालेंगे। इस दिन उन्हें पार्टी का नया नेतृत्व आधिकारिक रूप से सौंपा जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में यह पदभार ग्रहण समारोह होगा। बिहार के युवा चेहरे नितिन नवीन का बीजेपी में उदय हो चुका है। पूर्व से निकले नितिन नवीन अब तक के सबसे युवा चेहरे के तौर पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने है। अब सभी को नितिन नबीन की नई टीम का इंतजार रहेगा। कहा जा रहा है कि नितिन नवीन की नई टीम भी जल्द सामने आ जाएगी।राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने 60 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को नबीन की नई टीम में वरीयता देने का मन बनाया है। यदि ऐसा होता है तो जे  पी नड्डा की टीम के कई चेहरे नबीन की टीम से नदारद रहेंगे। नितिन नबीन की नई टीम के सामने  सबसे पगली चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी  और अग्नि परीक्षा पश्चिम बंगाल का चुनाव सबसे अहम होंगी।

भारतीय जनता पार्टी जैसे विशाल और विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की कमान किसी युवा नेता को सौंपा जाना अपने आप में एक ऐतिहासिक और दूरगामी राजनीतिक निर्णय है। मात्र 45 वर्ष की उम्र में ‘नितिन’ का भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व संभालना केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पार्टी की वैचारिक निरंतरता, संगठनात्मक परिपक्वता और भविष्य की रणनीति का संकेतक भी है। यह निर्णय उस राजनीतिक संस्कृति को रेखांकित करता है, जिसमें अनुभव और ऊर्जा का संतुलन साधने का प्रयास दिखाई देता है। भाजपा की राजनीति अब केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रह गई है। यह एक सुव्यवस्थित संगठन, कैडर आधारित संरचना और विचारधारा से संचालित आंदोलन का रूप ले चुकी है। ऐसे में किसी युवा नेता को शीर्ष पद पर लाना यह दर्शाता है कि पार्टी भविष्य की चुनौतियों को दीर्घकालिक दृष्टि से देख रही है। नितिन की नियुक्ति इस बात का प्रमाण है कि भाजपा नेतृत्व विकास को केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि क्षमता, संगठनात्मक कौशल और वैचारिक प्रतिबद्धता के आधार पर भी देखती है।नितिन की राजनीतिक यात्रा अपेक्षाकृत कम समय में तेज़ी से आगे बढ़ी है। संगठन के विभिन्न स्तरों पर कार्य करने का अनुभव, युवाओं से संवाद की क्षमता और आधुनिक राजनीति की समझ उन्हें विशिष्ट बनाती है। डिजिटल युग में राजनीति केवल रैलियों और बैठकों तक सीमित नहीं रही; सोशल मीडिया, डेटा विश्लेषण और जनसंपर्क के नए माध्यमों ने राजनीतिक नेतृत्व की परिभाषा बदल दी है। इस संदर्भ में नितिन जैसे युवा नेता पार्टी के लिए एक नई ऊर्जा और नई शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं।हालाँकि, इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी अपने साथ चुनौतियाँ भी लाती है। भाजपा जैसे विशाल संगठन में विविध विचार, क्षेत्रीय संतुलन और वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाएँ नेतृत्व की परीक्षा लेती हैं।

पद भार संभालने के बाद नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे अनुभवहीनता की धारणा को अपने कार्य और निर्णयों से गलत साबित करें। उन्हें संगठन की एकता बनाए रखते हुए युवाओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच सेतु की भूमिका निभानी होगी।राजनीतिक दृष्टि से यह बदलाव विपक्ष के लिए भी एक संदेश है। भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह नेतृत्व के स्तर पर भी नवाचार और पीढ़ीगत परिवर्तन से नहीं डरती। यह कदम आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति में नेतृत्व की उम्र, शैली और सोच पर नए मानदंड स्थापित कर सकता है।कुल मिलाकर, 45 वर्ष की उम्र में भाजपा की कमान संभालना नितिन के लिए सम्मान के साथ-साथ एक कठोर परीक्षा भी है। यदि वे संगठनात्मक अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और समावेशी नेतृत्व का संतुलन साध पाए, तो यह नेतृत्व न केवल भाजपा के लिए बल्कि भारतीय राजनीति के लिए भी एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है।

नितिन नबीन की नई टीम में कौन कौन से चेहरे होंगे।यह भविष्य के गर्भ में छुपा है। जहां तक देश के सबसे बड़े भौगोलिक प्रदेश राजस्थान का सवाल है यहां से सुनील बंसल, सतीश पूनिया और सांसद सीपी जोशी आदि युवा नेताओं के नामों की चर्चा है। वर्तमान में जेपी नड्डा की टीम में राज्य की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष है और राजस्थान के ही सुनील बंसल महामंत्री, अलका गुर्जर राष्ट्रीय मंत्री है अब कुछ नए नामों  की चर्चा सामने आ रही है।भविष्य में नबीन की नई टीम में राजस्थान से कौन कौन होगा होगा ? इसे लेकर फिलहाल अटकलें ही लगाई जा रही है। नितिन नवीन की टीम में राजस्थान से संभावित चेहरों में हरियाणा बीजेपी प्रभारी जाट नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को भाजपा की भावी टीम में प्रमुख स्थान मिल सकता है। इसके अलावा  वर्तमान राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल  यथावत रह सकते है। चितौड़गढ़ सांसद सी पी जोशी , राजस्थान विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ (हालांकि उनका नाम राज्यसभा के लिए भी चर्चाओं में है) भाजपा की वर्तमान राष्ट्रीय सचिव अलका सिंह गुर्जर, अजमेर  विधायक अनिता भदेल आदि के नामों की चर्चा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के बारे में कोई भी फैसला कांग्रेस का शीर्ष नेतृत ही लेगा।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नितिन नबीन अपनी टीम में प्रमुख तौर पर उन्हें ही लेंगे जो शीर्ष नेतृत्व की पसंद और संघ पृष्ठभूमि से है।जिनके पास संगठन का व्यापक अनुभव एवं  कौशल और चुनावी राजनीति की पूरी समझ है।

अब सबसे अहम यह देखना होगा कि नितिन नबीन अपनी नई जिम्मेदारी के निर्वहन में शीर्ष नेतृत्व के भरोसे पर  अपने आपको कितना अधिक साबित कर पायेंगे?
 


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