गोपेन्द्र नाथ भट्ट
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली 23-31 जनवरी आठ दिनों तक देशभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और लोकतांत्रिक परंपराओं के उत्सव में डूबी रहेगी। इस दौरान राजधानी में भव्य गणतंत्र दिवस परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, वीरता पुरस्कार समारोह, झांकियों का प्रदर्शन और विविध जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये आयोजन न केवल भारत की संवैधानिक विरासत और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि देश की विविधता, एकता और विकास यात्रा को भी सशक्त रूप से रेखांकित करेंगे। गणतंत्र दिवस से जुड़े ये कार्यक्रम नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।
77वें गणतंत्र दिवस परेड का आधिकारिक समारोह नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी 2026 को सुबह 9:30 बजे शुरू होगा और यह लगभग 90 मिनट तक जारी रहेगा, यानी लगभग 11:00 बजे समाप्त हो जाएगा। इस वर्ष, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगे जो कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू,उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आदि के साथ मुख्य मंच पर विराजमान होंगे। गणतन्त्र दिवस परेड के मुख्य कार्यक्रम में सैन्य मार्च-पास, भारतीय सेना के तीनों अंगों के कौशल तथा भारत की सैन्य शक्ति के भव्य प्रदर्शन के साथ ही सांस्कृतिक झांकियाँ और भारतीय वायुसेना का फ्लाइपास्ट आकर्षण के केन्द्र रहेंगे। इससे पूर्व ऐतिहासिक इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति मेमोरियल पर देश के अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाएंगे।
राजधानी के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी के मुख्य कार्यक्रम के बाद दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला परिसर में भारत पर्व-2026 की धूम रहेगी।यह पर्व 26 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक चलेगा। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र की सत्ता में आने के बाद यह नवाचार किया है। यह आयोजन 2014 से कोविड काल खण्ड के अलावा लगातार आयोजित किया जा रहा है । भारत पर्व गणतंत्र दिवस के महोत्सव का एक हिस्सा है और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के बाद पांच दिनों तक जारी रहता है। इसमें राष्ट्रीय झांकियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प प्रदर्शनी और अन्य आकर्षक गतिविधियाँ शामिल हैं। दिल्लीवासियों के मध्य यह उत्सव अत्यन्त लोकप्रिय बन गया है।
इस वर्ष 26 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर कुल 30 झांकियां दिखाई देंगी, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास की उपलब्धियों की शानदार झलक पेश करेंगी। इन झांकियों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 17 और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों एवं सेवाओं की 13 झांकियां शामिल होंगी। ये झांकियां *स्वतंत्रता का मंत्र - वंदे मातरम* और *समृद्धि का मंत्र - आत्मनिर्भर भारत* थीम पर आधारित होंगी, जो राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम" के 150 साल पूरे होने का प्रतीक और देश की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक विविधता में डूबी तथा बढ़ती आत्मनिर्भरता के पीछे देश की तीव्र प्रगति का एक अनूठा मिश्रण प्रदर्शित करेगी। इन झांकियों में राजस्थान की बहुरंगी झाँकी भी शामिल है। राजस्थान की झांकी बीकानेर की प्रसिद्ध उस्ता कला की स्वर्णिम छटा बिखेरेगी।
देश की सांस्कृतिक विविधता, आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना और राष्ट्रीय चेतना को सशक्त रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियों के विषय तय किए गए हैं। इन झांकियों के माध्यम से भारत की परंपरा, स्वतंत्रता आंदोलन, नवाचार, सैन्य शक्ति और सामाजिक-आर्थिक विकास की झलक दिखाई जाएगी। इन झांकियों में असम की आशारिकांडी टेराकोटा शिल्प ग्राम की लोककला, छत्तीसगढ़ और गुजरात द्वारा वंदे मातरम् को स्वतंत्रता, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के मंत्र के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश की झांकी देवभूमि, वीरभूमि की पहचान को उकेरेगी, जबकि जम्मू-कश्मीर अपनी समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा और लोकनृत्यों को प्रदर्शित करेगा।केरल की झांकी वॉटर मेट्रो और 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल का संदेश देगी। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में दिखाया जाएगा। मणिपुर कृषि से वैश्विक बाजार तक की यात्रा, नागालैंड हॉर्नबिल महोत्सव के माध्यम से संस्कृति और पर्यटन, तथा ओडिशा ‘मिट्टी से सिलिकॉन तक’ परंपरा और तकनीक के संगम को प्रस्तुत करेगा।पुदुचेरी अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऑरोविल की परिकल्पना को सामने लाएगा, वहीं तमिलनाडु आत्मनिर्भर भारत के माध्यम से समृद्धि का संदेश देगा और उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड की संस्कृति को प्रदर्शित करेगा। पश्चिम बंगाल स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करेगा, जबकि मध्य प्रदेश पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के योगदान को स्मरण करेगा। पंजाब में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के 350 वर्ष को समर्पित झांकी प्रस्तुत की जाएगी।
केंद्रीय विभागों की झांकियां भी विशेष आकर्षण का केन्द्र होंगी। वायु मुख्यालय की पूर्व सैनिक झांकी राष्ट्र निर्माण में सेना की भूमिका को दर्शाएगी, नौसेना मुख्यालय ‘समुद्र से समृद्धि’ की अवधारणा को उजागर करेगा, जबकि सैन्य कार्य विभाग की त्रि-सेवा झांकी ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से संयुक्त सैन्य शक्ति की विजय को प्रस्तुत करेगी।
इसके अलावा संस्कृति मंत्रालय की झांकी वंदे मातरम् – राष्ट्र की आत्मा की पुकार विषय पर आधारित होगी। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से विकसित भारत की दिशा में शिक्षा की उड़ान दिखाएगा। आयुष मंत्रालय ‘आयुष का तंत्र, स्वास्थ्य का मंत्र’ को केंद्र में रखेगा। गृह मंत्रालय भुज भूकंप के 25 वर्षों की दृढ़ता, नई जन-केंद्रित आपराधिक न्याय प्रणाली तथा आपदा प्रबंधन की क्षमता को दर्शाएगा।आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय वंदे मातरम् के 150 वर्ष के स्मरणोत्सव को, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ‘भारत कथा: श्रुति, कृति, दृष्टि’ को, पंचायती राज मंत्रालय स्वामित्व योजना को तथा विद्युत मंत्रालय ‘प्रकाश गंगा’ के माध्यम से ऊर्जा-समृद्ध भारत को प्रदर्शित करेगा। वहीं कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय भविष्य-तैयार, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में कौशल की भूमिका को सामने लाएगा।इन झांकियों के जरिए भारत की सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक प्रगति और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश देश और दुनिया के सामने रखा जाएगा। झांकियों के साथ लगभग 2,500 कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि गणतंत्र दिवस परेड 2026 भारत की विरासत, एकता और प्रगति का एक शानदार दृश्य उत्सव है ।
गणतंत्र दिवस परेड का जलसा औपचारिक रूप से ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के साथ 29 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के विजय चौक पर समाप्त होगा जिसमें बैंड प्रदर्शन और परेड का सांकेतिक समापन दर्शाया जाता है। इसके बाद भी 31 जनवरी 2026 तक लाल किला की प्राचीर के ठीक नीचे स्थित परिसर में भारत पर्व के कार्यक्रम चलते रहेंगे।
इस तरह 77वें गणतंत्र दिवस पर इस बार भी देश की राजधानी नई दिल्ली आठ दिनों तक पूरी तरह देशभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और लोकतांत्रिक परंपराओं के उत्सव में डूबी रहेगी।