राज्य स्तरीय सम्मान समारोह एवं वसंतोत्सव काव्य गोष्ठी आयोजित

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Published on : 24 Jan, 26 15:01

राज्य स्तरीय सम्मान समारोह एवं वसंतोत्सव काव्य गोष्ठी आयोजित

 राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर युगधारा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, उदयपुर तथा केसर देवी जानी स्मृति संस्थान, बड़ीसादड़ी के संयुक्त तत्वावधान में युगधारा स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह एवं वसंतोत्सव काव्य गोष्ठी शुक्रवार को वसंत पंचमी के पावन अवसर पर राजस्थान साहित्य अकादमी सभागार में भव्यता एवं गरिमा के साथ संपन्न हुई।

संस्थापक ज्योतिपुंज ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्री चुन्नीलाल गरासिया रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि साहित्य केवल शब्दों की साधना नहीं, बल्कि समाज की चेतना का संवाहक होता है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक आत्मा को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को मूल्यों से जोड़ते हैं। समारोह की अध्यक्षता केसर देवी जानी स्मृति संस्थान, बड़ीसादड़ी के संस्थापक, वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी योगेशचंद्र जानी ने की।विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार एवं साहित्यकार डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ तथा राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ युगधारा संस्था की अध्यक्ष किरण बाला ‘किरन’ द्वारा सदन में उपस्थित समस्त अतिथियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं के स्वागत उद्घोषण से हुआ। इस अवसर पर उन्होंने युगधारा की पैंतीस वर्षों की साहित्यिक यात्रा प्रस्तुत करते हुए संस्था की स्थापना, उद्देश्यों एवं साहित्यिक अवदानों पर प्रकाश डाला। अपने वक्तव्य में ‘किरन’ ने कहा कि युगधारा निरंतर नव एवं वरिष्ठ रचनाकारों के बीच सेतु बनकर साहित्यिक चेतना को जीवित रखे हुए है।
कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में युगधारा संस्था के संस्थापक डॉ. ज्योतिपुंज का केसर देवी जानी स्मृति संस्थान, बड़ीसादड़ी की ओर से अभिनंदनपत्र, शॉल, पगड़ी उपरना द्वारा अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि युगधारा का उद्देश्य साहित्य को केवल मंच तक सीमित न रखकर समाज की संवेदनाओं से जोड़ना है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में योगेशचंद्र जानी ने कहा कि भारतीय साहित्य परंपरा मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना की सशक्त वाहक रही है। डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ ने अपने संबोधन में डॉ. साहित्य और इतिहास के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य समाज का जीवंत इतिहास होता है और इतिहास साहित्य के बिना अधूरा है।और कहा कि वसंत मेवाड़ से शुरू होता है।

श्रीमती केसर देवी जानी स्मृति संस्थान के अध्यक्ष हेमेंद्र जानी ‘गोपाल’ ने बताया कि इस अवसर पर मानवीय संवेदना के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु डॉ. गरिमा भाटी ‘गौरी’ (फरीदाबाद), चक्रवर्ती लखावत (अजमेर), शोभा ठाकुर (जयपुर), डॉ. बसंत सिंह सोलंकी (उदयपुर) एवं अरविंद सिंह शक्तावत (बड़ीसादड़ी) को सम्मानित किया गया।सम्मान स्वरूप उन्हें स्मृतिचिह्न, सम्मानपत्र, शॉल, पगड़ी, उपरना प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् की 150वीं जयंती एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के अवसर पर सभागार में उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं श्रोताओं द्वारा सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गान किया गया, जिससे वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो उठा। इसी क्रम में युगधारा की परंपरा के अंतर्गत पुस्तक लोकार्पण भी किया गया। वरिष्ठ लेखिका डॉ. विजयलक्ष्मी नेनावटी की पुस्तक ‘संस्कृति की सौरभ’ का अतिथियों द्वारा विधिवत लोकार्पण किया गया, जिसे साहित्यिक जगत में सार्थक और विचारोत्तेजक कृति के रूप में सराहा गया।

द्वितीय सत्र में आयोजित वसंतोत्सव काव्य गोष्ठी में कवियों की ओजपूर्ण एवं संवेदनशील रचनाओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन युगधारा की महासचिव डॉ. सिम्मी सिंह, सचिव दीपा पंत ‘शीतल’ तथा केसर देवी जानी स्मृति संस्थान के महासचिव कृष्णार्जुन पार्थभक्ति द्वारा संयुक्त रूप से अत्यंत सधे एवं प्रभावी ढंग से किया गया। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर की ओर से राजेश मेहता ने समस्त अतिथियों, साहित्यकारों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। अर्जुन ने समस्त सम्मान प्राप्तकर्ताओं का परिचय भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में श्रीमती केसर देवी जानी स्मृति संस्थान के अध्यक्ष हेमेंद्र जानी ‘गोपाल’ विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने संपूर्ण आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन में युगधारा के उपाध्यक्ष प्रकाश तातेड, संपर्क सचिव लोकेश चौबीसा, अन्य सदस्य ब्रजराज सिंह जगावत, एक अन्य उपाध्यक्ष डॉ. निर्मल गर्ग, बिलाल पठान, मंगल कुमार जैन, डॉ. शीतश्री माली, शकुंतला सोनी, अशोक जैन ‘मंथन’, मनोहर श्रीमाली, उमर ओमान, अमित व्यास, संगीता गुजराती, जगजीत निषाद, पुष्कर गुप्तेश्वर, श्रेणीदान चारण, गजेंद्र भट्ट, कुसुम भारद्वाज, रमेश चंद्र बुनकर, कृष्णकांत शर्मा, सरस्वती व्यास, करुणा दशोरा, अनुश्री राठौड़ सहित अनेक गणमान्य साहित्यकारों ने काव्यपाठ किया। कार्यक्रम में साहित्य अकादमी से जयप्रकाश भटनागर, प्रकाश नेभनानी जी सहित सदन लगभग 125 साहित्यप्रेमियों से खचाखच भरा रहा।


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