तेज बुखार और कड़ाके की ठंड में 130 किमी दूर जाकर लिया नेत्रदान

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Published on : 25 Jan, 26 14:01

सुनेल में नेत्रदान बना परिवार की परंपरा, क्षेत्र का तीसरा नेत्रदान संपन्न

तेज बुखार और कड़ाके की ठंड में 130 किमी दूर जाकर लिया नेत्रदान

सुनेल कस्बे में शनिवार रात्रि मानवता और परोपकार की एक प्रेरक मिसाल सामने आई। व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ अनाज व्यापारी एवं समाजसेवी चंद्रप्रकाश चोपड़ा के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने नेत्रदान का सराहनीय निर्णय लिया।

परिवार की सहमति मिलने पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ एवं संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल देर रात को सुनेल पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई और कॉर्निया प्राप्त किए।

भारत विकास परिषद के प्रांतीय नेत्रदान सह प्रभारी दिनेश गुप्ता ने बताया कि शनिवार को हृदयाघात से चंद्रप्रकाश चोपड़ा के निधन के बाद शहर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल (भवानीमंडी) द्वारा परिजनों—भाई कैलाशचंद, पुत्र महेश, पुत्री नीतू एवं दामाद विकास जैन—से नेत्रदान हेतु संपर्क किया गया। चूंकि चोपड़ा परिवार में पूर्व में भी नेत्रदान हो चुका था, इसलिए परिवार ने सहज रूप से स्वीकृति प्रदान की।

सूचना मिलने पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ रात्रि 11 बजे कोटा से 130 किलोमीटर की दूरी तय कर सुनेल पहुंचे। उल्लेखनीय है कि उस समय वे स्वयं तेज बुखार से पीड़ित थे, इसके बावजूद कड़ाके की ठंड में उन्होंने मानवीय कर्तव्य निभाते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण की।

इस अवसर पर अशोक गुप्ता, दिनेश गुप्ता, संजय फोफलिया, देवीलाल सोनी, चैन सिंह गुर्जर, तेज कुमार गुर्जर सहित अन्य सहयोगियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। नेत्रदान के पश्चात परिवार को प्रशस्ति-पत्र एवं नेत्रदान गौरव पट्टिका प्रदान की गई।

शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा भारत विकास परिषद के सहयोग से यह सुनेल क्षेत्र का तीसरा नेत्रदान है। उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पूर्व चंद्रप्रकाश चोपड़ा की धर्मपत्नी सुशीला देवी चोपड़ा का भी नेत्रदान कराया गया था। इस प्रकार पति-पत्नी के रूप में यह सुनेल क्षेत्र का पहला संयुक्त नेत्रदान है।

नेत्रदानी चंद्रप्रकाश चोपड़ा के पुत्र महेश चोपड़ा, पुत्र अंशुल चोपड़ा एवं भाई कैलाशचंद्र चोपड़ा ने शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेत्रदान के माध्यम से उनके पिता की नेत्र-ज्योति सदैव जीवित रहेगी।


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