राष्ट्रीय पर्यटन दिवस 25 जनवरी  पर संवाद : प्रकृति पोषक , संस्कृति  व  विरासत रक्षक हो पर्यटन 

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Published on : 25 Jan, 26 17:01

फतेहसागर पर नाइट मार्केट प्रकृति प्रतिकूल व वेटलैंड नियमों के विरुद्ध 

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस 25 जनवरी  पर संवाद :  प्रकृति पोषक , संस्कृति  व  विरासत रक्षक हो पर्यटन 

उदयपुर,  ।   राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर  रविवार को आयोजित संवाद में  सतत व जिम्मेदारीपूर्ण पर्यटन पर विचार मंथन हुआ।

संवाद में झील संरक्षण समिति से जुड़े  डॉ अनिल मेहता ने कहा कि  पर्यटन को प्रकृति पोषक , संस्कृति  व  विरासत रक्षक बनाने से ही   पर्यटन व्यवसाय  सतत  बना रहेगा ।  मेहता ने कहा कि  पर्यटकों की सुविधा के लिए पानी व पर्यावरण को खराब नहीं किया जा सकता है।  

मेहता ने कहा कि फतेहसागर पर नाइट मार्केट, चौपाटी  इत्यादि व्यावसायिक गतिविधियां एन जी टी के निर्देशों की अवमानना है तथा वेटलैंड संरक्षण के नियमों के विपरीत है। यह   उदयपुर रामसर वेटलैंड सिटी के उद्देश्यों के  विरुद्ध भी है।  एन जी टी निर्देशों के अनुसार फतेहसागर  झील का वेटलैंड संरक्षण अधिनियम की  धारा 4 के प्रावधानो  व प्रतिबंधों  के तहत संरक्षण करना सरकार व  प्रशासन की जिम्मेदारी है। सज्जन गढ़ इको सेंसिटिव ज़ोन के लिए निर्धारित सभी नियम फतेहसागर पर भी लागू है।  ऐसे में रानी रोड  जो इको सेंसिटिव जोन के भीतर है , उस पर व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाना न्यायालयी नियमों की अवमानना है। 

झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि झीलें  पेयजल स्रोत  है । इनके  आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाना नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है। पालीवाल ने कहा कि  झीलों के डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में  ही फूड मार्केट होने चाहिए ।पर्यटन बढ़ाने के नाम पर  पक्षियों सहित समस्त झील पर्यावरण तंत्र को  आघात पहुंचाना  ठीक नहीं है। झील किनारों को  शोर व लाइट प्रदूषण से  मुक्त रखना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता नंद किशोर शर्मा ने कहा कि पर्यटन के नाम उदयपुर की पहचान को मिटाना नहीं चाहिए। उदयपुर रोमेंटिक सिटी अथवा वेडिंग सिटी नहीं है , यह एकलिंग नाथ, जगदीश प्रभु,  आयड सभ्यता, शिव और शक्ति , प्रताप, पहाड़, पेड़,पानी , की नगरी है। यह  मूल पहचान  बनाए रखने से ही  पर्यटन  समृद्ध  बनेगा।

युवा पर्यावरण विद कुशल रावल ने कहा कि  उदयपुर की धारण क्षमता से अधिक पर्यटन से प्रदूषण व अपसंस्कृति बढ़ रही है। पानी व हवा खराब हो रहे है। पहाड़ों को काटा जा रहा है। पर्यटन  व्यवसाय की निरंतरता के लिए यह ठीक नहीं है।

वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह ने कहा कि भीतरी शहर में वाहनों की रेलमपेल से स्थानीय लोगों का  जीवन दूभर हो रहा है।  इसका समाधान निकालना चाहिए ।

इस अवसर पर स्वच्छता श्रमदान भी किया गया


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