सिरोही। श्री पावापुरी तीर्थ-जीव मैत्रीधाम के रजत महोत्सव में 47 दिवसीय उपधान तप की आराधना आचार्य श्री उदयवल्लभसूरीजी एवं ह्रदयवल्लभसूरीजी म. सा. की पावन निश्रा में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस उपधान तप के आयोजक का लाभ श्रीमती मंजुला बेन रमणलालजी वाडीलालजी शाह ( चाणस्मा वाले ) आनंद-मंगल परिवार अहमदाबाद वालो ने लिया। उपधान तप में 600 आराधको ने भाग लिया जिसमे से 274 आराधको का मालारोपण 26 जनवरी 2026 को पावापुरी चैमुखा जल मंदिर के पीछे बनाये विशाल पांडाल में हुआ। उपधान तप यानि साधु जीवन का प्रशिक्षण इन आराधको ने तप-जप एवं आराधना करते हुऐ किया। मालारोपण पर आचार्यश्री से आर्शीवाद लेकर 274 आराधको को जीवन में पहली बार मोक्षमाला पहनने का अवसर मिला तो वे माला पहनाते ही खुशी से झुमने-नाचने लगे ओर उनकी इस तपस्या की अनुमोदना के लिए उनके रिश्तेदारों व स्नेहीजनो ने उनका मालाओ से अभिनंदन पर शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उपधान तप के आयोजक परिवार के प्रमुख मालुभाई शाह एवं पावापुरी तीर्थ के संस्थापक के पी संघवी परिवार के प्रमुख किशोर एच. संघवी ने भी तपस्वियों का अभिनंदन करते हुऐ उनके तपस्या की अनुमोदना की।
आचार्यश्री ने सभी आराधको को आर्शीवाद देते हुऐ कहा कि उन्होनें 47 दिन में जो कुछ सीखा है उसे जीवन में उतार कर अपना जीवन निर्मल बनावें। उपधान तप की सम्पुर्ण व्यवस्था में श्री समकित जैन चेरिटेबल ट्रस्ट, मुंबई के कार्यकर्ताओं के योगदान एवं समपर्ण की सभी आराधको ने सराहना करते हुऐ सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उपधान तप में 47 दिन तक प्रतिदिन परमात्मा दर्शन, प्रवचन, प्रतिक्रमण एवं अन्य आराधना आचार्यश्री एवं उनके शिष्यगण क्रिया मंडप में करवाते थे। आचार्यश्री के साथ 28 साधु-साध्वीजी पावापुरी में रहे। उपधान के दौरान 2 युवतियों ने संयम जीवन ग्रहण कर पावापुरी में आचार्यश्री की निश्रा में दीक्षा ली।