राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल का अभिभाषण : एक नीतिगत और राजनीतिक विश्लेषण

( 1313 बार पढ़ी गयी)
Published on : 28 Jan, 26 18:01

गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल का अभिभाषण : एक नीतिगत और राजनीतिक विश्लेषण

देश की राजधानी नई दिल्ली में बुधवार को 28 जनवरी 2026 को संसद के बजट सत्र के शुरू होने के साथ ही राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र का शुभारंभ हुआ। संसद के संयुक्त अधिवेशन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोधित किया। वहीं राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े का अभिभाषण हुआ।

सर्वप्रथम राजस्थान विधानसभा पहुंचने पर राज्यपाल हरिभाऊ बागडे का अभिनंदन हुआ। राज्य विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास और विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। राज्यपाल को विधानसभा के मुख्य द्वार पर आरएसी बटालियन जिसका नेतृत्व एक महिला अधिकारी कर रही थी ने सलामी दी। राज्यपाल ने  बटालियन का निरीक्षण भी किया। बाद में राज्यपाल को अभिभाषण के लिए सदन में एक प्रोसेशन में सदन में ले जाया गया। इस प्रोसेशन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा शामिल थे। राज्यपाल ने 16वीं विधानसभा के पंचम सत्र की शुरुआत अपने अभिभाषण से की । उन्होंने विधानसभा में 1 घंटे 21 मिनट 23 सेकंड में अपना अभिभाषण पूरा किया। हालांकि प्रतिपक्ष ने उनके अभिभाषण के दौरान दो तीन बार हल्की टोका टोकी का प्रयास किया लेकिन राज्यपाल ने धाराप्रवाह अपना अभिभाषण जारी रखा और मेरी सरकार के स्थान पर अपनी सरकार का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियों और भावी रोडमैप के बारे में जिक्र किया।

विधानसभा के पहले दिन की उल्लेखनीय बात यह भी रही कि 27 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा आयोजित की गई सर्वदलीय बैठक का असर दिखा और पिछले सत्रों की तुलना में राज्यपाल के अभिभाषण में प्रतिपक्ष की ओर से कोई हंगामा नहीं किया गया और पिछले कुछ सत्रों से विधानसभा में नहीं आ रहे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा सदन के ना पक्ष  में प्रतिपक्ष के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ अग्रिम पंक्ति बैठे दिखें।

राजस्थान विधानसभा में दिया गया राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े का अभिभाषण संवैधानिक औपचारिकता भर नहीं था, बल्कि इसमें राज्य सरकार की राजनीतिक दृष्टि, प्रशासनिक दिशा और विकास मॉडल का स्पष्ट संकेत दिखाई दिया। संविधान के अनुच्छेद 176 के अंतर्गत प्रस्तुत यह अभिभाषण वस्तुतः राज्य सरकार की पॉलिसी का ब्ल्यू प्रिंट (नीति-पुस्तिका) के रूप में उभरा, जिसमें राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख और भविष्य की प्राथमिकताओं की रूपरेखा दोनों शामिल रहीं। अभिभाषण का केंद्रीय स्वर सुशासन, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास रहा। यह संकेत देता है कि राज्य सरकार विकास को केवल आर्थिक संकेतकों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे सामाजिक संतुलन और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने वाली नीति के रूप में प्रस्तुत कर रही है। प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बार-बार दिया गया जोर यह दर्शाता है कि भजन लाल सरकार शासन की गुणवत्ता को अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता का आधार मान रही है।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार की विभिन्न उपलब्धियों को गिनाया और कहा कि *अपनी सरकार* ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय  उपलब्धियां अर्जित की है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार ने युवा नीति 2026 को बढ़ावा दिया है तथा 1 लाख सरकारी नौकरी का भर्ती कैलेंडर जारी किया गया है। प्रदेश में खेल के लिए सरकार ने उचित माहौल दिया। खेलो इंडिया खेल से प्रदेश के खिलाड़ियों को बढ़ावा मिला है। राज्यपाल  बागडे ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने पदक जीतकर राजस्थान का मान बढ़ाया है। प्रदेश में सरकार ने शिक्षा में नवाचार किए है। शिक्षा के मंदिरों में संस्कारवान शिक्षा दी जा रही है। गरीब एवं जरूरत मंद बच्चों को निजी स्कूल में शिक्षा दी जा रही है। राइट टू एजुकेशन के माध्यम से प्रदेश के 2 लाख से अधिक बच्चों को निःशुल्क शिक्षा मिल रही है। 482 करोड़ रुपए की राशि से स्कूलों छात्र छात्राओं को स्कूल ड्रेस दिलवाई गई है।


राज्यपाल बागडे ने कहा कि राजस्थान में युवाओं को सरकारी नौकरी के साथ साथ निजी क्षेत्र में भी रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। युवाओं को स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। निवेशक भी राजस्थान की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में 35 लाख करोड़ रुपए के एम ओ यू हुए हैं। उनमें से 8 करोड़ के एम ओ यू धरातल पर उतर चुके हैं। कर्मभूमि से मातृ भूमि अभियान को गति मिली है। अभियान में प्रवासी राजस्थानियों में उत्साह पूर्वक भूमिका निभा रहे है। राज्यपाल बागडे ने यह भी कहा कि प्रवासी राजस्थानियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नीतिगत कदम उठाए हैं। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भूमि आवंटन सहित राशि आवंटन किया गया है। कर्मभूमि से जन्म भूमि की ओर हो रहे काम में प्रदेश के प्रवासियों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। निवेश में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार ने कई नीतिगत फैसले लिए हैं।लॉजिस्टिक पॉलिसी, डाटा सेंटर पॉलिसी, अपेरल फॉर ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी जैसी नीतियां लागू कर राजस्थान को वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।प्रत्येक जिले में पांच गौरव अभियान शुरू किए हैं जिससे पीएम मोदी के लोकल फॉर लोकल को बढ़ावा मिलेगा। राजस्थान भी आत्मनिर्भर की यात्रा में सफल होगा। किसानों को मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से मदद की गई है। गेहूं के समर्थन मूल्य की खरीद पर 150 रुपए का बोनस दिया गया है।    

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का विस्तार हमारी सरकार की प्राथमिकता है।शैक्षणिक क्षेत्र 2025–2026 में दौरान प्रदेश के अब तक 6 मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए गए हैं। जहां एमबीबीएस की सीट बढ़ी है। नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 5 नए नर्सिंग कॉलेज प्रारंभ कर चुके हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर पर संगठन ने राजस्थान को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया है। सर्वपल्ली डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद महाविद्यालय जोधपुर में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय', होम्योपैथी चिकित्सालय भवन का निर्माण कराया गया है। राज्यपाल ने कहा कि चिकित्सा पद्धति के प्रथम बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। ऊर्जा एक आवश्यक घटक है। अपनी सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान ना केवल स्वयं की,बल्कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दे. 4215 आवास दो वर्ष में आवासन मंडल में आवंटित किए गए हैं।


कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अभिभाषण का विशेष फोकस राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। राजस्थान जैसे अर्ध-शुष्क राज्य में सिंचाई, जल प्रबंधन और फसल बीमा का उल्लेख यह बताता है कि सरकार किसानों की अस्थिर आय और जल संकट को एक संरचनात्मक चुनौती के रूप में देख रही है। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण आय का वैकल्पिक स्रोत बताना सरकार की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें कृषि को बहु-आय मॉडल से जोड़ा जा रहा है। यह संकेत आगामी बजट और नीतियों में ग्रामीण निवेश बढ़ने की ओर भी इशारा करता है।
युवाओं और रोजगार से जुड़ा हिस्सा अभिभाषण का राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील खंड रहा। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध परीक्षाओं पर जोर, पिछले वर्षों में हुए विवादों और जन असंतोष की पृष्ठभूमि में पढ़ा जाना चाहिए। कौशल विकास, उद्यमिता और स्टार्टअप को बढ़ावा देने की बात यह स्पष्ट करती है कि सरकार केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रोजगार मॉडल से आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि, यह भी एक खुला प्रश्न छोड़ता है कि निजी क्षेत्र और औद्योगिक निवेश से रोजगार सृजन को जमीन पर कैसे उतारा जाएगा।महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़े संदर्भ सरकार की सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति को दर्शाते हैं। महिला कल्याण योजनाएँ, छात्रवृत्तियाँ और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम न केवल सामाजिक न्याय की बात करते हैं, बल्कि राजनीति में स्थायी समर्थन आधार  के निर्माण की ओर भी संकेत करते हैं। अभिभाषण में महिलाओं की भागीदारी को विकास की अनिवार्य शर्त बताना एक वैचारिक वक्तव्य के साथ-साथ नीतिगत प्रतिबद्धता का संकेत भी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य को मानव पूंजी के निर्माण से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। डिजिटल शिक्षा, आधारभूत ढांचे और चिकित्सा सेवाओं के विस्तार का उल्लेख यह दर्शाता है कि सरकार दीर्घकालिक विकास को केवल भौतिक परियोजनाओं तक सीमित नहीं रख रही। पेयजल, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा अभिभाषण का वह हिस्सा रहा, जहाँ विकास और पर्यावरण के संतुलन की बात उभरकर सामने आई। जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा पर दिया गया जोर यह संकेत देता है कि सरकार जलवायु और संसाधन संकट को नीतिगत चुनौती के रूप में स्वीकार कर रही है। यह दृष्टिकोण राजस्थान जैसे राज्य के लिए दीर्घकालिक रूप से निर्णायक साबित हो सकता है।कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और डिजिटल प्रशासन से जुड़े संदर्भ प्रशासनिक सख्ती और सुधारवादी छवि को मजबूत करते हैं। भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता का उल्लेख राजनीतिक नैरेटिव का अहम हिस्सा है, हालांकि इसकी सफलता क्रियान्वयन और संस्थागत मजबूती पर निर्भर करेगी। ई-गवर्नेंस और जन-सुनवाई प्रणालियों का विस्तार शासन को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की कोशिश को दर्शाता है।
समग्र रूप से देखें तो यह अभिभाषण स्थिरता, भरोसे और क्रमिक सुधार की राजनीति को प्रतिबिंबित करता है। इसमें न तो आक्रामक वैचारिक टकराव है और न ही अतिरंजित घोषणाएँ। यह सरकार के उस प्रयास को दर्शाता है, जिसमें वह प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक संतुलन और राजनीतिक निरंतरता के माध्यम से विकास का नैरेटिव गढ़ना चाहती है।

राज्यपाल बागड़े ने पर्यटन सड़क विकास आधारभूत ढांचा निर्माण सहित जन कल्याण और विकास से जुड़ी अन्य योजनाओं का भी जिक्र किया। विशेष कर शेखावाटी अंचल  में यमुना जल पहुंचाने की योजना,ग्रीन हाई स्टेट हाई वे का निर्माण तथा पश्चिम राजस्थान के पचपदरा में निर्माण के अंतिम चरण तक पहुंचीं तेल रिफाइनरी और पेट्रो कॉम्प्लेक्स का विशेष रूप से उल्लेख किया।

अंततः, राज्यपाल का यह अभिभाषण सरकार के लिए नीतिगत प्रतिबद्धता का सार्वजनिक दस्तावेज़ है, जबकि विपक्ष के लिए जवाबदेही तय करने का आधार। इस सत्र की बहसें और बजटीय निर्णय इस बात का परीक्षण करेंगे कि अभिभाषण में व्यक्त संकल्प किस हद तक धरातल पर उतरने वाले हैं। राज्य सरकार को आत्म विश्वास है कि प्रदेश सर्वांगीण विकास के रास्ते पर निरन्तर आगे बढ़ रहा है।

राज्यपाल के अभिभाषण के पश्चात विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदन में पिछले दिनों जिन शख्शियतों का निधन हुआ उनके प्रति शोकभिव्यति के बाद दो मिनट का मौन रखवाया। बाद में विधानसभा अध्यक्ष  देवनानी की अध्यक्षता में विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में बजट सत्र की कार्यसूची को अंतिम रूप दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदेश का वर्ष 2026- 27 का वार्षिक बजट आगामी 11 फरवरी को सदन के पटल पर रखा जाएगा। राजस्थान विधानसभा के बुधवार को शुरू हुए बजट सत्र के एक माह तक चलने की उम्मीद है।


साभार :


© CopyRight Pressnote.in | A Avid Web Solutions Venture.