स्वर सुधा की द्विमासिक स्नेह मिलन का आयोजन किया गया। अल्पाहार के पश्चात् परंपरानुसार सर्वप्रथम मां शारदे की पूजा-अर्चना एवं वंदना की गई। इसके बाद श्रीमती मधुबाला ने मंच संचालन संभालते हुए सदस्यों की प्रस्तुतियाँ प्रारंभ कीं। सर्वप्रथम प्रियव्रत पंड्या ने मुकेश जी का गीत "हमने अपना सब कुछ खोया" प्रस्तुत किया। तत्पश्चात् श्रीमती मंजू जी गर्ग ने "छुप गया कोई रे", श्री चक्षु जी पंड्या ने "ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी", श्रीमती सुषमा जी अग्रवाल ने "गर्जत बरसत सावन आयो रे", श्रीमती सुरेखा जी बाबेल ने "ओ सनम तेरे हो गए हम", तथा श्री अशोक जी जोशी ने "अभी न जाओ छोड़कर" गाया। इस बीच श्री आर. सी. जोशी ने चुटकुलों एवं हास्य कविताओं से सभी को गुदगुदाया। उसके बाद श्री के. के. त्रिपाठी ने "माने ना मेरा दिल दीवाना", श्रीमती पूनम बिलोची ने "ठंडी हवाएँ लहरा के आएँ", श्रीमती विभा माथुर ने "तुम्हीं मेरे मंदिर, तुम्हीं मेरी पूजा", श्रीमती कुसुम लता त्रिपाठी ने "बाबू जी धीरे चलना", श्रीमती मधुबाला पंडित ने "ठंडी हवा काली घटा", श्री देवव्रत पंड्या ने "प्यासे पंछी नील गगन में गीत मिलन के", श्री हरीश बहादुर सिंह जी ने "कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे", श्री एम. पी. माथुर ने स्वरचित "हम आंधियों में भी", श्रीमती कार्तिका पंड्या ने "आ लेकर के चले", श्री सुधीर माथुर ने "तारों से सजके अपने सूरज से", तथा श्री बी. एन. पाण्डेय ने "जुल्फों हटाले चेहरे से" की सुंदर प्रस्तुति दी।आखिर में 5 वर्षीय नन्हे अद्वैत पंड्या ने लय और स्वर में "ये शाम मस्तानी" गाकर सर्वाधिक तालियों की गड़गड़ाहट से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मीडिया समन्वयक प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया की स्वर सुधा वरिष्ठ सुर साधकों का एक पारिवारिक समूह है जो नियमित रियाज कर अपनी गायकी को समृद्ध बनाये रखता है तथा दिमासिक स्नेह मिलन व पिकनिक के आयोजन कर प्रस्तुति का मंच प्रदान करता है| आज के कार्यक्रम में विशेष रूप से विजय गर्ग एवं हरीश बहादुर सिंह का उल्लेखनीय सहयोग रहा। सूरुचिपूर्ण भोजन के पश्चात् सर्वाधिक लोकप्रिय हाऊजी एवं अंताक्षरी का आयोजन किया गया। अंत में के. के. त्रिपाठी ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला तथा एम. पी. माथुर ने आज के कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।