उदयपुर 30 जनवरी/ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि व शहीद दिवस पर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति सचिवालय के सभागार में शुक्रवार को उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि गांधी जी देश में स्वराज्य के साथ रामराज्य के भी प्रबल पक्षधर थे। वे इन दोनों को अन्योन्याश्रित मानते थे और उनके मन मस्तिष्क में इन दोनों की तस्वीरें बिल्कुल साफ थी। ‘‘ मेरे सपनों का भारत ’’ में उन्होंने लिखा था कि भारत मूल रूप में कर्मभूमि है , कर्मभूमि को लेकर मेरा सबसे बड़ा स्वप्न है रामराज्य की स्थापना। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन ही समाज के लिए एक आदर्श है। गांधीजी दुनिया के ऐसे राजनेता है जिन्हे लोग नेता से बढ़कर संत के रूप में याद करते है। गांधीजी के सिद्धांतों ने विश्व को सत्य और अहिंसा का आधुनिक दर्शन दिया। मार्टिन लूथर किंग जूनियर से लेकर बराक ओबामा तक उन्हें आदर्श मानते थे। भारत ही नहीं पूरे विश्व में न केवल उनके विचारों की व्यापक स्वीकार्यता है बल्कि उनके सिद्धांतों को प्रासंगिक मानकर उन पर चलने का प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी महात्मा गांधी का नाम लिया जाता है तब सबसे पहले जहन में दो शब्द आते है वो है सत्य और अंहिसा। गांधी जी ने सत्य के प्रति अडिग रहकर अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया, उन्होंने अपने विचारों से न केवल भारत को आजादी दिलायी, बल्कि समाज में अनेक सुधार भी किए। गांधी जी के सत्य, अहिंसा, स्वराज और सत्याग्रह के विचार शाश्वत है। उनकी ताकत थी सादा जीवन उच्च विचार एवं प्रकृति के प्रति अटूट प्रेम। इसी के बल पर वे भारतीयों के बापू बन गये। उनका प्रकृति और मनुष्य के प्रति प्रेम जग जाहिर है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अहिंसा का मार्ग है।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. चन्द्रेश छतलानी, डॉ. उदयभान सिंह, निजी सचिव कृष्णकांत कुमावत, जितेन्द्र सिंह चौहान, डॉ. हेमंत साहू, लहरनाथ, सवाराम डांगी, डॉ. रोहित कुमावत, डॉ. उत्तम शर्मा, कोमल भाटी सहित कार्यकर्ताओं ने बापू के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हे नमन किया।