काव्य गोष्ठी में बही देशभक्ति की धारा.....

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Published on : 01 Feb, 26 04:02

ओ सरहद के प्रहरी ओ खेतों के राजा, अब भूल न जाना तुम, ये वतन तुम्हीं से है

काव्य गोष्ठी में बही देशभक्ति की धारा.....

. कोटा में शनिवार को श्री करनी नगर विकास समिति कर आश्रय भवन में शनिवार को मासिक काव्य गोष्ठी में देश भक्ति की धारा में श्रोताओं में गोते लगाए। गोष्ठी गणतंत्र दिवस और शहीद दिवस को समर्पित रही।  मुख्य अतिथि भगवती प्रसाद गौतम ने " ओ सरहद के प्रहरी ओ खेतों के राजा,अब भूल न जाना तुम, ये वतन तुम्हीं से है कविता से माहौल को देशभक्ति पूर्ण बना दिया।

     संचालन करते हुए रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने  अपने काव्य पाठ मौन है गांधी में " चल रही हैं आंधियां बेचैन गांधी मौन है, पूछता भी तो नहीं इसकी तह में कौन है, किसको फुर्सत है जो देखे, देश की बिगड़ी फिजा,सबके सर पर हावी, तेल लकड़ी नोन है" प्रस्तुत कर गांधी को याद किया।

      महेश पंचोली की देशभक्ति के भावों से भरी राजस्थानी कविता "नमन करुं छूंँ वांनै जांनै आजादी दिलाई छै, आजादी के खातर जांने अपनी जान गवांई छै,छोड्या छै परिवार जांनै छोड्या बाप अर माई छै,देश के खातर जांनै भाया हँस कै फांसी खाई छै, झुक्या कोईने दुसमण सूं वांनै पाछी धूल चटाई छै, नमन करुं छूंँ वांनै जांनै आजादी दिलाई छै" पर श्रोता झूम उठे। 

    नंद किशोर ने  शहीदों का बसंत कविता "रहती है दिल में भारत माँ सांसों में गंगा बहती है,जिनके स्वर में गर्जन होती सीने में ज्वाला होती है" से मन मोह लिया। 

      विष्णु शर्मा हरिहर ने सरस्वती वंदना  के साथ  "आज दिखता हूं झांकी अपने देश महान की" एवं "देश की खातिर मारने वाले जांबाजों को नमन करें,भारत माँ को नमन करें"

से सभी का दिल जीत लिया।

    श्रीमती ओम राणावत की कविता" सीमा पर खड़े रह कर अपना घर नहीं देखा, माँ की ममता याद आई तो आसमान ताक दिया,,बहन की राखी याद आई तो फ़र्ज़ में बांध दिया" पर खूब दाद मिली। 

    विशिष्ठ अतिथि डॉ. प्रभात कुमार सिंघल में मखान लाल चतुर्वेदी की रचना पुष्प की अभिलाषा और हवामहल पर स्वरचित कविता सुनाई। संस्था प्रभारी प्रवीण भंडारी ने अपनी कविता प्रस्तुत कर कहा कि प्रयास हो इस गोष्ठी के माध्यम से अधिक से अधिक साहित्यकारों को अवसर मिले और स्वरचित काव्य पाठ हो। कुसुम लता जैन, दिनेश गुप्ता, तुलसीराम, आर. बी. गुप्ता, निरंजन महबूबानी एवं मोहन कोटवानी ने भी काव्यपाठ किया। गोष्ठी की अध्यक्षता चन्द्र सिंह ने की।


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