गायत्री शक्तिपीठ चित्तौड़गढ़ में भव्य 'शपथ ग्रहण समारोह' संपन्न

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Published on : 01 Feb, 26 16:02

गायत्री शक्तिपीठ चित्तौड़गढ़ में भव्य 'शपथ ग्रहण समारोह' संपन्न

चित्तौड़गढ़: स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार का गरिमामय 'शपथ ग्रहण एवं दायित्व विस्तार समारोह' हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। शांतिकुंज हरिद्वार से आए प्रतिनिधियों के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में पीत-वस्त्रधारी परिजनों के सैलाब और 'माताजी-गुरुदेव' के जयकारों से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

संगठन की शक्ति आपसी समन्वय और सेवा: घनश्याम पालीवाल समारोह के मुख्य वक्ता एवं शांतिकुंज प्रतिनिधि (राजस्थान कार्यक्रम प्रभारी) श्री घनश्याम जी पालीवाल ने नवनिर्वाचित ट्रस्ट मंडल को सफलता के सूत्र देते हुए कहा कि आपसी समन्वय, पारदर्शिता और निस्वार्थ सेवा ही गायत्री परिवार की असली शक्ति है। राजस्थान प्रभारी श्री ओम प्रकाश जी अग्रवाल ने संगठन की मजबूती और वैचारिक क्रांति पर जोर दिया, वहीं पुष्कर उपजोन प्रभारी श्री श्याम सुंदर जी सैन ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया।

नए ट्रस्ट मंडल एवं समितियों की घोषणा मुख्य ट्रस्टी श्री देवीलाल प्रजापति के नेतृत्व में नई टीम ने अपना कार्यभार संभाला। ट्रस्ट के नए स्वरूप में निम्नलिखित सदस्यों की घोषणा की गई:

मुख्य ट्रस्टी: श्री देवीलाल प्रजापति

सहायक ट्रस्टी: श्रीमती किरण यादव

ट्रस्टी गण: श्री तुलसीराम धाकड़, श्रीमती गायत्री धाकड़, श्री बाबू लाल माली, श्रीमती प्रभा पालीवाल एवं श्री अशोक कुमार जैन।

संगठनात्मक ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए जिला समन्वय समिति और देवालय, आश्रम, विधि एवं संगठन प्रबंधन जैसी विभिन्न समितियों का भी गठन किया गया।

भामाशाहों और साहित्य प्रेमियों का सम्मान इस अवसर पर शक्तिपीठ के विकास में सहयोग हेतु श्री पन्नालाल जी पँवार को 'भामाशाह' सम्मान से नवाजा गया। साथ ही, युग साहित्य को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के लिए श्री दीपक जी शर्मा का सपरिवार विशेष सम्मान किया गया। श्री शर्मा प्रतिमाह लगभग ₹1 लाख का साहित्य निर्यात कर वैचारिक क्रांति में अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

युवा ऊर्जा और साधना सत्र कार्यक्रम में श्री नवीन माली और श्री शरद निगम जैसे युवाओं ने संगठन में 'नया घोष' भरने का संकल्प लिया। सत्र के अंत में श्री हिमांशु पालीवाल ने 'सावित्री साधना' के आध्यात्मिक महत्व और उसकी विधि पर विशेष प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्री तुलसीराम जी धाकड़ ने किया। समारोह का समापन शांति पाठ और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ।


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