टाइम बैंक उदयपुर की मासिक बैठक संपन्न, 65 सदस्य जीवनसाथी सहित रहे उपस्थित

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Published on : 02 Feb, 26 16:02

टाइम बैंक उदयपुर की मासिक बैठक संपन्न, 65 सदस्य जीवनसाथी सहित रहे उपस्थित

उदयपुर। सामाजिक सहयोग एवं समय आधारित सेवा विनिमय की अभिनव अवधारणा पर कार्यरत टाइम बैंक उदयपुर की मासिक बैठक रविवार को उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित हुई। बैठक में संस्था के 65 सक्रिय सदस्य अपने जीवनसाथी सहित उपस्थित रहे।
संस्था के एम.के. मथुर एवं के.के. शर्मा ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि 7 सदस्यों से प्रारम्भ हुई टाइम बैंक उदयपुर इकाई ने अपने पाँच वर्ष के सफल कार्यकाल में 430 से अधिक सदस्यों को जोड़ा है। संगठनात्मक विस्तार की दृष्टि से अब शहर को 3 किलोमीटर की परिधि के अंतर्गत पाँच सब-ग्रुप में विभाजित किया गया है। इनमें हिरण मगरी के दो तथा सुभाषनगर के समूह ने कार्य प्रारम्भ कर दिया है। आगे से प्रत्येक सब-ग्रुप की मासिक बैठकें स्थानीय स्तर पर आयोजित होंगी, जबकि सभी सदस्यों की सामूहिक बैठक त्रैमासिक रूप से आयोजित की जाएगी।
मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि बैठक के दौरान सांस्कृतिक गतिविधियों के अंतर्गत गीत, ग़ज़ल एवं रोचक खेलों ने समां बांध दिया। कार्यक्रम का संचालन ई.सी.पी. जैन ने किया। उन्होंने माँ पर स्वरचित कविता प्रस्तुत की। नई सदस्या जगदीश्वरी ने रोचक कहानी सुनाई। एम.पी. मथुर ने अपनी मधुर आवाज़ में विमल शर्मा द्वारा लिखित ग़ज़ल ‘ख़ामोशी की भी चुप्पी’ प्रस्तुत की। भगवत सिंह हाड़ा ने ‘आँसू भरी है’, विपिन गुप्ता ने ग़ज़ल ‘झुकी झुकी सी नज़र’, डॉ. अशोक गुप्ता ने कविता ‘मेरे भारत की माटी’, संजय  गुप्ता देवेश ने - तांडव लय में धनाक्षरी छंद,  एम.जी. वार्ष्णेय ने देशभक्ति गीत, श्रीमती झनक ने भजन तथा राजू बड़वा ने ‘अभी ना जाओ’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देते हुए आगामी दिनों में मेडिकल कैंप एवं निशुल्क चिकित्सकीय परामर्श शिविर आयोजित करने पर विस्तृत मंथन किया गया। साथ ही बैठक में चयनित सदस्यों को फ्री हार्ट किट का वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर संगठन में सात नए सदस्यों का तिलक लगाकर, उपरणा पहनाकर तालियों के साथ स्वागत किया गया एवं परिचय प्राप्त किया गया। वक्ताओं ने टाइम बैंक की मूल भावना — “समय के माध्यम से सेवा” — को और अधिक प्रभावी बनाने का संकल्प लिया।
अंत में आभार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर विमल शर्मा ने अपनी स्वरचित एवं प्रकाशित कविता ‘समय की अमूल्य सौगात’ सुनाई। सदस्यों ने आपसी सहभागिता एवं सौहार्द के साथ कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया एवं राष्ट्र गान व स्नेह भोज उपरांत कार्यक्रम को विराम दिया गया।


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