लेखिकाएं लेखन को राष्ट्र सेवा और समाज सुधार की दृष्टि से जन आंदोलन बनाए

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Published on : 03 Feb, 26 04:02

संभागीय महिला रचनाकार सम्मेलन

लेखिकाएं लेखन को राष्ट्र सेवा और समाज सुधार की दृष्टि से जन आंदोलन बनाए

 

कोटा। कोटा में रंगीतिका संस्था द्वारा राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से रविवार को मदर टेरेसा स्कूल में कोटा संभागीय महिला रचनाकार सम्मेलन आयोजित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि लेखिकाएं वर्तमान समय और समाज के अनुरूप राष्ट्र सेवा को प्रेरित करने और समाज सुधार के लिए लिख कर जन आंदोलन बनाएं।वक्ताओं से खुशी जाहिर की कि हाड़ौती में महिलाएं सभी विधाओं में मुखर हो कर लिख रही है।  
    उदघाटन सत्र में मुख्य अतिथि सहकारिता विभाग के विधिष्ठ सहायक डॉ. सूरज सिंह नेगी ने  जीवन मूल्यों में आ रही कमी और परिवार में संवाद शून्यता जैसे विषयों को लेखन का माध्यम बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा राष्ट्र और समाज को आईना दिखाने का काम साहित्यकार ही कर सकते हैं।
    अध्यक्षता करते हुए राजस्थान साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सिंह सोलंकी ने कहा कि कहा महिलाएं पठन की वृत्ति बढ़ाएं और सार्थक साहित्य लिखेंगी तो पाठक भी मिलेंगे और पहचान भी अपने आप मिलेगी। ऐसे आयोजनों के अवसर पर साहित्यिक पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाने और पुस्तक चर्चाओं के आयोजन करने का सुझाव दिया। अकादमी के नवाचार के बारे में बताया कि पहली बार जेल के बंदियों के पढ़ने के लिए साहित्य की पुस्तकें भेजी गई है। 
     साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही ने कहा हाड़ोती में जिस तेजी से महिलाएं लेखन में आगे आई हैं वह किसी आश्चर्य से कम नहीं है। महिला लेखन की भविष्य में अच्छी संभावनाएं है और अंचल की महिला रचनाकार राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेंगी इसमें संदेह नहीं है। कथाकार और समीक्षक विजय जोशी ने कहा हाड़ौती अंचल की महिला रचनाकारों ने गद्य साहित्य की विविध विधाओं में लेखन कर अपने समय को उभारा ही नहीं वरन् परिवर्तित होते जा रहे सामाजिक सन्दर्भों का संवेदनापरक चित्रण भी किया है।
      शकुंतला रेणु को समर्पित सत्र में श्वेता शर्मा ने हाड़ोती अंचल का समकालीन महिला काव्य, गरिमा राकेश गर्विता ने महिला गीतिका काव्य  तथा डॉ सरला अग्रवाल को समर्पित सत्र में डॉ वैदेही गौतम ने हाड़ोती अंचल में महिला कथा साहित्य तथा सुमन लता शर्मा ने महिलाकथेतर साहित्य में महिला रचनाकारों के सृजनके संदर्भ में महिला रचनाकारों और उनके  साहित्यिक अवदान की विस्तार से चर्चा कर दशा,दिशा और संभावनाओं पर कहा वर्तमान लेखन में बदलाव और सावचेत दृष्टि लिए दिखाई देता है।
   सत्रों के अतिथि डॉ.सरिता जैन,.श्यामा शर्मा, वीणा अग्रवाल, प्रकाश चंद सोनी ,डॉ. अशोक तंवर, शिवांगी सिंह सिकरवार , डॉ. शील कौशिक, डॉ. कांचना सक्सेना, श्रद्धा शर्मा, अक्षयताला शर्मा, सुलोचना शर्मा, डॉ. शशि जैन, विजय जोशी, भगवती प्रसाद गौतम, रामेश्वर शर्मा रामू भैया, शमा फिरोज़, डॉ. युगल सिंह ने अपने विचार रखें। स्नेहलता शर्मा ने सभी का स्वागत किया। डॉ. सुशीला जोशी ने संस्था परिचय दिया। रीता गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन महेश पंचोली, प्रीतिमा पुलक, डॉ. इंदु बाला शर्मा एवं अनुराधा शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। अदिति शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। साहित्यकार विजय शर्मा,साधना शर्मा, अर्चना शर्मा, रेनू सिंह राधे ने सक्रिय सहयोग किया। कार्यक्रम में कोटा,बूंदी,झालावाड़ और बारां से बड़ी संख्या में रचनाकार उपस्थित रहे।


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