गिट्स में आर्यभट उपग्रह की स्वर्ण जयंती पर दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम का सफल समापन

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Published on : 03 Feb, 26 16:02

गिट्स में आर्यभट उपग्रह की स्वर्ण जयंती पर दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम का सफल समापन

 

उदयपुर। गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज ( गिट्स ), डबोक, उदयपुर में भारत के पहले उपग्रह ‘आर्यभट’ के प्रक्षेपण की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय भव्य एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का 3 फरवरी 2026 को वैलिडिक्टरी समारोह के साथ सफल समापन हुआ। यह आयोजन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के स्वर्णिम 50 वर्षों को समर्पित रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण आयामों को जाना।समापन अवसर पर गिट्स के निदेशक डॉ. एन. एस. प्रसन्ना कुमार ने कहा कि आर्यभट उपग्रह ने भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा दिखाई थी। उन्होंने बताया कि आज इसरो जियो-सैटेलाइट, एस्ट्रो मिशन, मंगलयान एवं चंद्रयान जैसे अभियानों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भारत की सशक्त पहचान बना चुका है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं अनुसंधान की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।गौरतलब है कि 19 अप्रैल 1975 को इसरो द्वारा भारत के पहले उपग्रह आर्यभट का प्रक्षेपण तत्कालीन सोवियत संघ की सहायता से कोसमोस-3एम रॉकेट द्वारा दक्षिण-पश्चिमी रूस के कपुस्टिन यार से किया गया था। 360 किलोग्राम वजनी यह प्रायोगिक उपग्रह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए युगांतरकारी उपलब्धि सिद्ध हुआ। 19 अप्रैल 2025 को इसके 50 वर्ष पूर्ण होना भारत के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण रहा।

कार्यक्रम के दौरान यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु से पधारे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने सहभागिता की। प्रमुख अतिथियों में उप निदेशक श्री ए. राजेन्द्र, चंद्रयान-3 के परियोजना निदेशक श्री अरुण कुमार गुप्ता, परियोजना निदेशक श्री एन. एस. मुरली, उप परियोजना निदेशक श्री निधि एम. एस., सेक्शन हेड श्री हरि कृष्ण थोटा एवं श्री गोविंद राव येन्नी शामिल रहे। सभी वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला।समापन दिवस पर आयोजित वैलिडिक्टरी फंक्शन में विशिष्ट अतिथि के रूप में , जीएमसीएच के कुलपति डॉ. राकेश कुमार व्यास, उदयपुर सोलर ऑब्जर्वेटरी एवं फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी के उप निदेशक, डॉ. भुवन जोशी एस वो सी टीम अप नोएडा, के संस्थापक डॉ. सतीश तिवारी,एवं सह-संस्थापक श्री अंकुर सांगल उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंतर्गत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विजेता टीमों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

एम बी ए निदेशक डॉ. पी. के. जैन ने अपने संबोधन में कहा कि आर्यभट के प्रक्षेपण ने इसरो को उपग्रह प्रौद्योगिकी की विशिष्ट दुनिया में प्रवेश करने का आत्मविश्वास प्रदान किया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. प्रदीप सी. गर्ग ने बताया कि इस दो दिवसीय आयोजन में विभिन्न विद्यालयों एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों के 800 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।वहीं वित्त नियंत्रक बी. एल. जांगिड़ ने बताया कि भारत अब उपग्रह प्रौद्योगिकी में उच्चतम स्तर की परिपक्वता तक पहुँच चुका है तथा विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए दर्जनों उपग्रह सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ महविश बलूच द्वारा किया गया।


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