उदयपुर। अरावली पर्वतमाला की पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संरक्षण को लेकर सामुदायिक सहभागिता को सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही स्थायी रूप ले सकता है।
वे शनिवार को यहां जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के भूगोल विभाग द्वारा तरुण भारत संघ एवं जल बिरादरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन चतुर्थ जल कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
“अरावली पर्वतमाला की पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता” विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य अरावली क्षेत्र की जैव विविधता, जल संसाधनों और पारंपरिक पारिस्थितिकी को समझते हुए उनके संरक्षण के लिए व्यवहारिक एवं नीतिगत समाधान तलाशना है।
मुख्य अतिथि राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अरावली क्षेत्र में पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर्यावरण संतुलन के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के बीच संतुलन बनाए रखने से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कर्नल एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिम भारत की प्राचीन धरोहर है। उन्होंने कहा कि अरावली क्षेत्र की जैव विविधता, वनस्पतियां, वन्यजीव और पारंपरिक पारिस्थितिकी जलवायु संतुलन की रीढ़ हैं। इनके संरक्षण से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और मानव जीवन का संतुलन सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जैव विविधता का संतुलन सीधे अरावली से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वन और जल संरक्षण से ही मानव जीवन सुरक्षित रहेगा।
आयोजन सचिव, भूगोल विभागाध्यक्ष एवं आईक्यूएसी निदेशक डॉ. युवराज सिंह राठौड़ ने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश के अनेक अकादमिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। दो दिन के दौरान शोध पत्र प्रस्तुतीकरण, तकनीकी सत्र एवं संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से अरावली संरक्षण पर बहुआयामी विमर्श होगा।
इससे पूर्व, मुख्य अतिथि जलपुरुष राजेंद्र सिंह,अध्यक्ष प्रो.कर्नल एस.एस. सारंगदेवोत, विशिष्ट अतिथि इंद्रा खुराना, अशोक खुराना, अनुपम श्राफ, पुनीत कुमार सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैली मेहता ने किया।
इस अवसर पर प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. पंकज रावल, प्रो. पारस जैन, प्रो. सुनीता मुर्डिया, प्रो. बी.एल. श्रीमाली, डॉ. अमित दवे, डॉ. जय सिंह जोधा, डॉ. हिम्मत सिंह चुंडावत, डॉ. हरीश मेनारिया सहित विभिन्न डीन एवं निदेशक उपस्थित रहे।