अलवर में टाईगर मैराथन सम्पन्न: फिटनेस, पर्यावरण और बाघ संरक्षण का सशक्त संदेश

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Published on : 09 Feb, 26 14:02

गोपेन्द्र नाथ भट्ट

अलवर में टाईगर मैराथन सम्पन्न: फिटनेस, पर्यावरण और बाघ संरक्षण का सशक्त संदेश

कभी देश में टाइगर्स की सबसे बड़ी सैरगाह माने जाने वाले अलवर जिले का सरिस्का पिछले कुछ वर्षों पहले टाइगर्स विहीन हो गया था लेकिन कालान्तर में राज्य सरकार के प्रयासों और देश में पहली बार हवाई मार्ग से टाइगर्स रिहैबिटेशन की कार्यवाही से सरिस्का फिर से बाघों से आबाद हुआ है और अब सरिस्का में भी बाधो के दर्शन होने लगे है। टाइगर्स के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए समय-समय पर जन जागृति पैदा करने के अभियान चलाए जाते रहे है। सरकार के साथ मिल कर अमूल जैसी संस्थाएं इसमें अनेकों बार पहल कर चुकी हैं जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं।

राजस्थान के ऐतिहासिक शहर अलवर में अलवर टाइगर इंटरनेशनल हाफ मैराथन–2026 रविवार को बहुत ही उत्साह, ऊर्जा और जनभागीदारी के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ  राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ध्वज दिखाकर मैराथन को रवाना किया। उन्होंने सरिस्का टाइगर रिज़र्व की पृष्ठभूमि में आयोजित इस मैराथन ने न केवल खेल भावना को नई ऊंचाइयाँ दीं, बल्कि फिट इंडिया, पर्यावरण संरक्षण और बाघ संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण संदेशों को जन-जन तक पहुँचाया। सुबह की ठंडी फिज़ाओं में हजारों धावकों के कदमों की ताल ने अलवर को एक जीवंत उत्सव-नगर में बदल दिया। इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश-विदेश से आए करीब 18 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया। मैराथन की शुरुआत शहर के प्रमुख मार्गों से हुई और विभिन्न श्रेणियों—21 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर टाइम्ड रन, 5 किलोमीटर फन रन तथा 2 किलोमीटर पैरा रन—में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक दौड़ पूरी की। अलग-अलग आयु वर्गों और क्षमताओं के धावकों की भागीदारी ने इस आयोजन को समावेशी और प्रेरक बनाया।
 

इस मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए खेल और फिटनेस अनिवार्य हैं तथा पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के बिना सतत विकास संभव नहीं। मुख्यमंत्री ने सरिस्का सहित प्रदेश के टाइगर रिज़र्वों की सुरक्षा को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताते हुए जनसहयोग पर जोर दिया। इस अवसर पर आयोजन के ब्रांड एंबेसडर, अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया और बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता का आह्वान किया।

इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  भूपेंद्र यादव, राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी,राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा,अभिनेता एवं ब्रांड एंबेसडर रणदीप हुड्डा आदि भी उपस्थित रहें।
कार्यक्रम में सेना, बीएसएफ, एसएसबी और पुलिस समेत अर्धसैनिक बलों के जवानों ने भी भाग लिया, जिससे आयोजन और भी भव्य और राष्ट्रीय भावना से परिपूर्ण दिखाई दिया। इस तरह अलवर मैराथन 2026 में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व, प्रसिद्ध अभिनेताओं के साथ-साथ विभिन्न सुरक्षा बलों और अंतरराष्ट्रीय धावकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को खेल, सामाजिक संदेश और संरक्षण जागरूकता का संगम बनाया। स्थानीय नागरिकों और युवाओं में भी इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा गया। मार्गों के किनारे खड़े दर्शकों ने तालियों और नारों से धावकों का हौसला बढ़ाया। शहर के व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने भी सहयोग कर मैराथन को सामुदायिक उत्सव का रूप दिया। इससे अलवर की पर्यटन छवि को भी बल मिला और सरिस्का क्षेत्र के संरक्षण संदेश को व्यापक मंच मिला।

अलवर टाइगर मैराथन–2026 ने यह साबित किया कि खेल आयोजन सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। फिटनेस के साथ पर्यावरण और बाघ संरक्षण का संदेश देकर यह मैराथन आने वाले वर्षों के लिए एक मानक स्थापित करती है। सफल आयोजन के साथ ही आयोजकों ने अगले संस्करण को और अधिक व्यापक व प्रभावी बनाने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि अलवर विश्व मानचित्र पर खेल, प्रकृति और संरक्षण के संगम के रूप में और सुदृढ़ हो सके।

अलवर टाइगर मैराथन बीते वर्षों में एक स्थानीय आयोजन से बढ़कर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है। इस वर्ष भी विदेशी धावकों की मौजूदगी ने आयोजन को वैश्विक स्वरूप दिया। आयोजन समिति के अनुसार, मैराथन का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि नागरिकों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। इसी सोच के तहत रूट पर स्वच्छता, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए। मैराथन के समापन पर विजेताओं को पदक और पुरस्कार प्रदान किए गए। अलग-अलग श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले धावकों को सम्मानित किया गया, वहीं पैरा रन में भाग लेने वाले विशेष प्रतिभागियों ने दृढ़ संकल्प और साहस का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। आयोजकों ने स्वयंसेवकों, प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग की सराहना करते हुए आयोजन को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए धन्यवाद दिया।

अलवर के सरिस्का में बाघों के प्रति जन जागृति एक अच्छा संकेत है लेकिन अभी भी अलवर जिले के  सरिस्का के मुकाबले सवाईमाधोपुर के रणथंबोर में पर्यटकों की आवाजाही अधिक है इसका सबसे बड़ा कारण रणथंबोर में बाघों की अधिक साइटिंग होना है।सरिस्का के मुकाबले रणथंबोर का क्षेत्रफल कम होना और बाघों की संख्या अधिक होना भी इसका एक प्रमुख कारण हैं लेकिन एक दूसरा कारण रणथंबोर में सरिस्का की तुलना में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर होना भी है। जबकि सरिस्का तक पहुंचने के लिए अलवर से सरिस्का तक का रोड खस्ताहाल है इसलिए पर्यटक इस पर जाना नहीं चाहते। जो जाते है वो भी अगली बार जाने की गलती नहीं करते। कुछ जानकार लोग कोटपुतली थानागाजी मार्ग से सरिस्का जाते है जोकि वहां पहुंचने का बेहतर मार्ग है। लोगों को उम्मीद है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  भूपेंद्र यादव और राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा जोकि दोनों ही अलवर से सांसद और विधायक है तथा प्रदेश की सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी,जोकि प्रदेश की वित्त एवं पर्यटन मंत्री भी है अलवर -सरिस्का सड़क मार्ग को पर्यटकों के अनुकूल बना सकेगी । देखना है बेहतर सड़क मार्ग और सुविधाओं से सरिस्का भी क्या रणथंभौर की तरह सैलानियों की भीड़ जुटा पाएगा ?


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