भारत-फ्रांस का सांस्कृतिक आदान-प्रदानः

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Published on : 09 Feb, 26 15:02

ऐश्वर्या ग्रुप ऑफ कॉलेजेस में फ्रेंच अ कैपेला ट्रायो ‘लेज इटिनेरांत’ ने बांधा समां

उदयपुर। ऐश्वर्या ग्रुप ऑफ कॉलेजेस, उदयपुर में अंतरराष्ट्रीय संगीत संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें फ्रांस के प्रसिद्ध अ कैपेला ट्रायो लेज इटिनेरांत ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक आदान-प्रदान का जीवंत उदाहरण बना, जहाँ शास्त्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों का स्वागत भारतीय परंपरा के अनुरूप किया गया, जिसने पूरे वातावरण को आत्मीयता से भर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ऐश्वर्या सिंह के स्वागत संबोधन से हुई। अपने संबोधन में उन्होंने संगीत को संस्कृतियों को जोड़ने वाला सेतु बताते हुए ऐसे आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगीत सीमाओं से परे संवाद की भाषा है और ऐसे अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान से विद्यार्थियों का दृष्टिकोण व्यापक होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान का उद्देश्य शिक्षा के साथ कला और संस्कृति को समान महत्व देना है, ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक नितिशा महावर ने प्रभावशाली ढंग से किया और मंच संचालन के माध्यम से पूरे वातावरण को ऊर्जावान बनाए रखा।
फ्रेंच अ कैपेला ट्रायो लेज इटिनेरांत की सदस्य एलोडी पोंट, मैनन कूजिन और पॉलिन लांगलुआ दे स्वार्ते ने अपनी सामूहिक स्वर लहरियों से सभागार को एक अंतरराष्ट्रीय सांगीतिक अनुभव प्रदान किया। कलाकारों ने भारतीय श्रोताओं के स्नेह और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि उदयपुर में प्रस्तुति देना उनके लिए अत्यंत भावनात्मक और यादगार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और संगीत के प्रति यहाँ के युवाओं का लगाव उन्हें गहराई से प्रभावित कर गया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण उस्ताद फैय्याज मंसूरी की प्रस्तुति रही, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की गहराई और परंपरा का सशक्त प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों विभव, याना, हर्षिल और फरहान ने भी अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोक और अर्धशास्त्रीय संगीत की सुंदर झलक पेश की।
कार्यक्रम के अंत में सहायक प्राध्यापक हर्षा मारवाल ने सभी अतिथियों, कलाकारों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ संस्थान में रचनात्मकता और सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत करती हैं। यह संध्या संगीत के माध्यम से वैश्विक मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव का एक यादगार उदाहरण बन गई।


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