तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले  का समापन

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Published on : 09 Feb, 26 15:02

कृषि मेलों का आयोजन प्रत्येक जिले में प्रतिवर्ष हो - डॉ. सुरेश धाकड़

तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले  का समापन

उदयपुर । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षेत्रीय कृषि मेले के समापन समारोह कार्यक्रम के मुख्य अथिति डॉ. सुरेश धाकड़, विधायक बेगू ने किसानों को संबोधित करते हुए जैविक खेती व पारंपरिक ज्ञान तथा ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। डॉ. धाकड़ ने किसानों से आग्रह किया कि वे बदलाव की शुरुआत अपने घर से करें तथा घरेलू उपयोग की सब्जियां और फसलें स्वयं उगाएं, जिससे बाजार पर निर्भरता कम हो सके। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा मनरेगा में किए गए सुधारों की सराहना की तथा सुझाव दिया कि खेती के कार्यों में परिवार के सदस्यों की भागीदारी बढ़ाई जाए, जिससे रोजगार घर में ही सृजित हो और बाहरी मजदूरों पर निर्भरता कम हो। डॉ. धाकड़ ने कहा कि किसानों के हित के लिए हर वर्ष इस प्रकार के मेलो का राजस्थान के प्रत्येक जिले में आयोजन होना चाहिए, इसके लिए वो सरकार को सुझाव देंगे। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी नवाचार तभी सफल होंगे जब वे किसानों तक पहुंचेंगे।

विशिष्ट अतिथि श्री ताराचंद जैन, माननीय विधायक उदयपुर शहर ने किसानों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों एवं अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान की मेहनत का पूरा लाभ उसे मिलना चाहिए। वर्तमान में मध्यस्थता और बढ़ती लागत के कारण किसान को अपेक्षित आमदनी नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि यदि किसान पारंपरिक तरीकों जैसे गोबर की खाद, जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करें, तो लागत कम होगी और आय में वृद्धि संभव है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. प्रताप सिंह, कुलगुरु, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने कहा कि कृषक अपनी समस्याओं का निराकरण जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर करें। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पाद के विपणन के लिए किसान उत्पादक समुहों का गठन करें एवं उत्पाद की गुणवत्ता, पैकिंग एवं विज्ञापन पर अधिक जोर दें। कृषक महिलाऐं स्वयं सहायता समूहों का गठन कर आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करें। छोटी जोत वाले किसान कस्टम हायरिंग केंद्र बनाकर उन्नत यंत्रों का अधिक से अधिक उपयोग कर सकते हैं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर प्रदर्शित तकनीकों की जानकारी ली तथा अपने सुझाव दिए। इसके अतिरिक्त मेले के समापन समारोह में श्री अशोक कुमार, डॉ. अरविन्द वर्मा, डॉ धृति सोलंकी, डॉ मनोज कुमार महला, डॉ. सुनील जोशी,  श्रीमती निधी धाकड़ तथा अन्य गण मान्य अथितियों की उपस्थिति रही।

डॉ. आर.एल. सोनी, निदेशक, प्रसार शिक्षा ने बताया कि इस तीन दिवस किसान मेले में राजस्थान, गुजरात महाराष्ट्र गोवा के  10,000 से अधिक किसानो ने भाग लिया। कृषि मेले के समापन अवसर पर सह संयोजक डॉ. राजीव बैराठी ने मेले के दौरान आयोजित किए गए विभिन्न कार्यक्रमों की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। डॉ. आर.एल. सोनी, निदेशक, प्रसार शिक्षा ने सभी किसानों, अतिथियों, आयोजकों, प्रतिभागियों एवं प्रेस और मीडिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विशाखा बंसल ने किया।

कृषक-वैज्ञानिक संवादः किसानों के प्रश्न और वैज्ञानिकों के उत्तर

किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं और जिज्ञासाओं के समाधान के लिए कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों ने फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, उन्नत तकनीक, जैविक खेती और विपणन से जुड़े प्रश्न वैज्ञानिकों के सामने रखे। कार्यक्रम में शामिल वैज्ञानिकों-डॉ. वीरेन्द्र सिंह, डॉ. एन. एल. मीणा, डॉ. सी. एम. बलाई, डॉ. सी. एम. यादव, डॉ. रविकान्त शर्मा, डॉ. एम. एल. ओझा, डॉ. हेमन्त स्वामी और डॉ. श्रवण यादव - ने किसानों को सरल, व्यावहारिक और तुरंत अपनाने योग्य समाधान दिए।

किसानों द्वारा पूछे गए प्रमुख प्रश्न

गेहूं की फसल में चूहों की समस्या,आम के पेड़ में फूल न आना (पुष्पम की समस्या,नींबू में फूल नहीं आना,अनार के फलों में कीड़ा लगना; अफीम की जड़ में गांठ बनना,संतरे की फसल से संबंधित प्रश्न,प्राकृतिक खेती के लिए सर्टिफिकेट कोर्स कहाँ से किया जा सकता है,खेती पर जानवरों का प्रकोप

वैज्ञानिकों ने प्रत्येक प्रश्न का विभागीय विशेषज्ञता के अनुसार समाधान प्रस्तुत किया, जिससे किसानों को अपने खेत और पशुपालन में तुरंत व्यावहारिक मदद मिली। किसानों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी और जानकारीपूर्ण बताया तथा ऐसे संवादों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता व्यक्त की।

फसल, फल-फूल-सब्जी प्रदर्शन प्रतियोगिताः प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को प्रथम (27)एवं द्वितीय (19) पुरस्कार से सम्मानित किया। इनमें 26 सब्जियों, 10 फसलों एवं 10 फलों के विजेता कृषक शामिल है ।

कृषि मेले में पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र वितरणः कृषि मेले के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों, कंपनियों और कृषि विज्ञान केंद्रों की 105 स्टॉलों को 6 श्रेणीओ में वर्गीकरण किया गया एवं उनके प्रदर्शन के आधार पर प्रत्येक श्रेणी में प्रथम ,द्वितीय एव सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। इसमे कुल 21 पुरस्कार दिए गये । लक्की ड्रॉ के द्वारा कुल 34 भाग्यशाली किसानो नगद राशी से सम्मानित  किया गया

 प्रेस एवं मीडिया कर्मियों का सम्मानः इस अवसर पर कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी पत्रकार बंधुओं का उनके उल्लेखनीय योगदान एवं कृषि नवाचारों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।


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