- कंपनी में 700 से अधिक महिलाएं कार्यरत, जिनमें 200 से अधिक इंजीनियर कोर ऑपरेशनल रोल में
- 2030 तक 30 प्रतिशत डायवर्सिटी हासिल करने का लक्ष्य
उदयपुर, वूमेन इन साइंस इंटरनेशनल डे के अवसर पर, विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक प्रोड्यूसर एवं विश्व में टॉप पांच सिल्वर प्रोड्यूसर में से एक, हिंदुस्तान जिंक ने “शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन” विशेष ऑन-ग्राउंड इनिशिएटिव शुरू किया है, जिसे युवा महिलाओं को माइनिंग और मेटल ऑपरेशन का सीधा अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। अगले 25-30 दिनों में, भारत के जाने-माने साइंस कॉलेजों की चुनी हुई प्रतिभावान युवा महिलाएं हिंदुस्तान जिंक के माइनिंग और मेटल्स ऑपरेशन्स में कदम रखेंगी। यह एक सोशल एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है जिसका मकसद यह बताना है कि मेटल्स सेक्टर में महिलाएं कैसे सोचती हैं और उन्हें कैसे समझा जाता है।
हाल ही में स्टूडेंट्स के पहले ग्रुप ने ऑपरेशन्स का दौरा किया, जिसमें आईआईटी आईएसएम धनबाद,एमएनआईटी जयपुर, बनस्थली विद्यापीठ, सीटीएई उदयपुर, एमएलएसयू उदयपुर और एमबीएम जोधपुर जैसे बड़े इंस्टीट्यूशन्स के पार्टिसिपेंट्स शामिल थे। इस ग्रुप में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, माइनिंग, जियोलॉजी और मेटलर्जी में अलग-अलग एकेडमिक बैकग्राउंड के लोग थे, और उन्हें बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल ऑपरेशन्स, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और कोर एसटीईएम रोल्स में उभरते करियर के अवसरों का सीधा अनुभव मिला।

यह पहल मेटल और माइनिंग सेक्टर के स्केल, कॉम्प्लेक्सिटी और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट के बारे में स्ट्रक्चर्ड, फर्स्ट-हैंड एक्सपोजर देने के लिए डिजाइन की गई है। अंडरग्राउंड माइंस, स्मेल्टर्स और लैब्स में क्यूरेटेड साइट इमर्शन के जरिए, स्टूडेंट्स मॉडर्न माइनिंग प्रैक्टिस, डिजिटल और ऑटोमेटेड ऑपरेशन्स, सेफ्टी सिस्टम्स और कोर एसटीईएम रोल्स में उपलब्ध करियर पाथवेज की बड़ी रेंज की गहरी समझ हासिल करते हैं। यह अनुभव इंजीनियरों और टेक्निकल लीडर्स के साथ डायरेक्ट इंटरेक्शन भी कराता है, जिससे एकेडमिक लर्निंग और रियल-वर्ल्ड इंडस्ट्री एप्लीकेशन के बीच के गैप को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही युवा महिलाओं में इस सेक्टर में लॉन्ग-टर्म करियर के बारे में सोचने का कॉन्फिडेंस भी बनता है।
अपना अनुभव साझा करते हुए, एमबीएम यूनिवर्सिटी, जोधपुर की मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट अंकिता गौड़ ने कहा कि,“मैं अपनी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की किताबों में पढ़े कॉन्सेप्ट्स को माइनिंग ऑपरेशन्स की अपनी विजिट के दौरान हकीकत में अपने समक्ष संचालित होते हुए देखने के लिए बहुत उत्साहित हूँ।”
इस पहल के पीछे के बड़े इरादे और एसटीएम में महिलाओं के लिए भविष्य के रास्ते बनाने पर इसके फोकस पर बात करते हुए, हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा, “मेटल्स और माइनिंग सेक्टर का भविष्य इस बात से तय होगा कि हम अलग-अलग तरह के टैलेंट को कैसे बढ़ावा देते हैं, इनोवेशन को कैसे तेज करते हैं, और भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स कैसे बनाते हैं। हिंदुस्तान जिंक में, हम इनक्लूजन को एक स्ट्रेटेजिक ताकत के तौर पर देखते हैं जो परफॉर्मेंस और लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्रिएशन को बढ़ाती है। ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ शुरुआती एक्सपोजर बनाने और ज्यादा युवा महिलाओं को साइंस, टेक्नोलॉजी और माइनिंग में करियर बनाने और लीड करने के लिए बढ़ावा देने की दिशा में एक अच्छा कदम है। युवा प्रतिभाओं के लिए अपने ऑपरेशन खोलकर, हमारा मकसद कॉन्फिडेंस जगाना, सोच बदलना और सेक्टर के लिए एक मजबूत, अधिक रिप्रेजेंटेटिव टैलेंट भविष्य बनाना है।”
अलग-अलग इंस्टीट्यूशन के स्टूडेंट्स ने पहली बार इंडस्ट्रियल ऑपरेशन्स को करीब से अनुभव करने पर धनबाद की माइनिंग इंजीनियरिंग की छात्रा श्रुति कुमारी ने कहा,
“मैं बड़ी मशीनों और हाई-एनर्जी माहौल को लेकर उत्साहित हूँ जिसका हम अनुभव करेंगे। एक जैसी सोच वाली महिलाओं को देखना प्रेरणा देने वाला है जो किसी भी रोल में उतनी ही कुशल और काबिल हैं। मैं उन महिला कर्मचारियों से मिलने का इंतजार कर रही हूँ जो जमीन से लेकर व्यापार तक में अग्रणी हैं।”
हिंदुस्तान जिंक ने लंबे समय से मेटल और माइनिंग सेक्टर में इनक्लूजन को आगे बढ़ाया है, जिसमें कोर ऑपरेशन्स में महिला प्रोफेशनल्स का अनुपात अपने साथियों की तुलना में सबसे अधिक है। आज, इसके एक चैथाई से अधिक वर्कफोर्स में महिलाएं हैं, जिनमें इंजीनियरिंग से लेकर जियोलॉजी और लैब साइंस तक के जरूरी फील्ड्स की लीडर्स शामिल हैं। हिंदुस्तान जिंक का युवा और डायनैमिक वर्कफोर्स, जिसमें लगभग 62 प्रतिशत कर्मचारी 35 साल से कम उम्र के हैं, कंपनी के फ्यूचर-रेडी कल्चर और उभरते टैलेंट के लिए एक वर्कप्लेस के तौर पर इसकी मजबूत अपील को दर्शाता है। कंपनी 2030 तक कम से कम 30 प्रतिशत महिलाओं का रिप्रेजेंटेशन हासिल करने की राह पर है, जिससे जेंडर डायवर्सिटी के लिए उसका कमिटमेंट और मजबूत होगा और मेटल्स और माइनिंग को महिला साइंटिस्ट्स और टेक्नोलॉजिस्ट्स के लिए एक आकर्षक और इनक्लूसिव करियर ऑप्शन के तौर पर जगह मिलेगी।
इस कैंपेन के अलावा, हिंदुस्तान जिंक ऑर्गनाइजेशन और कम्युनिटी में महिलाओं की सफलता के लिए अपने इकोसिस्टम को निरंतर मजबूत कर रहा है। कंपनी की प्रोग्रेसिव पीपल पॉलिसीज में फ्लेक्सिबल वर्किंग अरेंजमेंट्स, स्पाउस-हायरिंग, मेंटल और फिजिकल वेलनेस लीव, एक्सटेंडेड पेरेंटल सैबेटिकल्स, और सभी ऑपरेशनल शिफ्ट्स में एक्सपैंडेड पार्टिसिपेशन शामिल हैं, जिसमें अब महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट रोल्स भी शामिल हैं, जिससे इक्विवेलेंट करियर पाथवे सुनिश्चित होते हैं। टेली-रिमोट माइनिंग, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और रियल-टाइम एनालिटिक्स सहित हिंदुस्तान जिंक का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मैनुअल लेबर की जरूरत को कम करता है और टेक्निकल रोल्स को अधिक एक्सेसिबल बनाता है, जिससे साइंस में महिलाओं के लिए माइनिंग को आकर्षक, फ्यूचर-रेडी करियर ऑप्शन बनाने के उसके मिशन को और मजबूती मिली है।