जैसलमेर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना जैसलमेर जिले के पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। योजना के माध्यम से पशुधन की असमयिक मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई कर पशुपालकों को राहत एवं आत्मविश्वास प्रदान किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।
जिले में योजना के प्रथम चरण के तहत 51 हजार पशुओं का स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र जारी कर बीमा पॉलिसी प्रदान की गई। इसके तहत गाय, भैंस, भेड़, बकरी एवं ऊँट की असामयिक मृत्यु पर पशुपालकों को बीमा राशि का भुगतान किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक संबल प्राप्त हुआ। अब तक मृत पशुओं के क्लेम के रूप में लगभग 27 लाख रुपये की बीमा राशि पशुपालकों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है।
संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. उमेश वरंगटीवार एवं उप निदेशक राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग, जैसलमेर हरिहर सिंह ने बताया कि अब तक 207 पशुपालकों के खातों में करीब 27 लाख रुपये की सहायता राशि पहुंच चुकी है। इसके अतिरिक्त 154 पशुपालकों के लगभग 24 लाख रुपये के क्लेम कोष कार्यालय को प्रेषित किए जा चुके हैं, जो शीघ्र ही संबंधित लाभार्थियों के खातों में जमा कर दिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि योजना के द्वितीय चरण में एक लाख पशुओं का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर जिलेभर में पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा बीमा कार्य किया जा रहा है। डॉ. वरंगटीवार ने सभी जनाधार धारित पशुपालकों से अपील की कि वे अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर अपने पशुओं का निःशुल्क बीमा करवाकर योजना का अधिकतम लाभ उठाएं।
जिला नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र तंवर ने जानकारी दी कि वर्तमान चरण में पशुपालक बीमा के लिए आवेदन मोबाइल एप अथवा अधिकारी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन कर सकते हैं। आवेदन के पश्चात नजदीकी पशु चिकित्सक एवं सर्वे एजेंट संयुक्त रूप से पशु का स्वास्थ्य परीक्षण कर प्रमाण-पत्र जारी करते हैं तथा पॉलिसी जारी करने की कार्यवाही के लिए प्रस्ताव उप निदेशक राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग, जैसलमेर को प्रेषित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना न केवल पशुपालकों के आर्थिक जोखिम को कम कर रही है, बल्कि पशुधन संरक्षण एवं ग्रामीण समृद्धि की दिशा में राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच को भी साकार कर रही है। योजना से लाभान्वित पशुपालकों में उत्साह का माहौल है एवं अधिकाधिक लोग इससे जुड़कर अपने पशुधन को सुरक्षित बना रहे हैं।