यूसीसीआई एवं इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स द्वारा तकनीकी कार्यशाला आयोजित

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Published on : 17 Feb, 26 17:02

यूसीसीआई एवं इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स द्वारा तकनीकी कार्यशाला आयोजित

उदयपुर। “अब सरकार का रवैया बदल चुका है। ईज आॅफ डूईंग बिजनेस के तहत सभी कार्य नियमानुसार तरीके से सम्पादित करना एवं पारदर्शिता बरतना आवश्यक है। खनन विभाग के अधिकारी स्वयं खान मालिकों के समक्ष उपस्थित होकर उनकी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं।“
उपरोक्त विचार श्री अभय अग्रवाल ने यूसीसीआई में व्यक्त किये।
उदयपुर चेम्बर आॅफ काॅमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा भारतीय खान ब्यूरो के सहयोग से मंगलवार, दिनांक 17 फरवरी 2026 को दोपहर 3.00 बजे यूसीसीआई के पायरोटेक टेम्पसन्स सभागार में क्वार्ट्ज, फेल्स्पार, माइका, बैराइट्स एवं लाइमस्टोन खनिजों से संबंधित मासिक एवं वार्षिक रिटर्न भरने तथा पंजीयन संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु एक तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में यूसीसीआई के अध्यक्ष श्री मनीष गलूण्डिया ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह जागरूकता कार्यशाला उपस्थित सभी खदान मालिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी तथा रिटर्न फाइलिंग एवं पंजीयन से जुड़ी जटिलताओं को समझने में सहायता करेगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अभय अग्रवाल, खान नियंत्रक, भारतीय खान ब्यूरो ने अपने संबोधन में कहा कि खनन मंत्रालय के निर्देशानुसार उदयपुर सम्भाग के माईनिंग से जुडे उद्यमियों के लाभार्थ यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि क्वार्ट्ज, फेल्स्पार, माइका, बैराइट्स एवं लाइमस्टोन को लघु खनिज से प्रमुख खनिज की श्रेणी में स्थानांतरित किए जाने के कारण खनन पट्टाधारकों को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनके समाधान हेतु यह पहल की गई है।
विशिष्ट अतिथि श्री महेश माथुर, अतिरिक्त निदेशक, खान एवं भूविज्ञान विभाग ने कहा कि अनुपालन से संबंधित विभिन्न खनन नियमों के सरलीकरण की प्रक्रिया जारी है तथा इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एस.ओ.पी.) तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि क्वार्ट्ज, फेल्स्पार, माइका, बैराइट्स एवं लाइमस्टोन के मेजर मिनरल्स (प्रधान खनिज) की श्रेणी में स्थानांतरण के पश्चात खनन पट्टाधारकों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। साथ ही इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स द्वारा माइनिंग लीज की सीमाओं के निर्धारण हेतु ड्रोन सर्वे को व्यावहारिक रूप देने की प्रक्रिया भी जारी है।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में श्री दिलीप जैन, वरिष्ठ खनन भूवैज्ञानिक ने पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से रिटर्न फाइलिंग के महत्व, समय पर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता, पंजीयन प्रक्रिया, मासिक एवं वार्षिक रिटर्न भरने की विधि आदि विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान खदान मालिकों ने विषय से संबंधित अपनी समस्याएं एवं जिज्ञासाएं रखीं, जिनका समाधान इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स के विषय विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से किया गया। यूसीसीआई माइनिंग सबकमेटी के अध्यक्ष श्री एम.एल. लूणावत, खान एवं भूविज्ञान विभाग के खनन अभियन्ता श्री आसिफ अंसारी, सहायक खनन अभियन्ता श्री अजय जटोलिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हितांशु कौशल द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में 75 से अधिक खदान मालिकों एवं खनन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंत में डॉ. हितांशु कौशल ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।


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