श्रीगंगानगर। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त श्री सुरेश ओला के निर्देश पर एक फरवरी से तीन नीतियों, एक जिला एक उत्पाद नीति-2024, राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति-2024 और राजस्थान एमएसएमई नीति-2024 के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। एक जिला एक उत्पाद नीति के तहत मंगलवार को श्रीगंगानगर में पहली डिजिटल स्वीकृति जारी की गई है।
जिला महाप्रबंधक श्री हरीश मित्तल ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद नीति के तहत पहली डिजिटल स्वीकृति श्रीगंगानगर में जारी की गई है। उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र द्वारा ई-कॉमर्स सहयोग के रूप में 60 हजार रूपये की स्वीकृति जारी की गई है। आयुक्त द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि इन तीनों नीतियों के आवेदन की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से ही की जाएगी।
एक जिला एक उत्पाद नीति
राज्य के विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए लागू की गई एक जिला एक उत्पाद नीति-2024 के तहत सभी 41 जिलों में एक-एक उत्पाद की पहचान की गई है। इसके तहत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी अनुदान दिया जाता है। साथ ही, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर पर 5 लाख रुपये तक अनुदान, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और आईपीआर पर 3 लाख रुपये तक पुनर्भरण राज्य सरकार द्वारा देय है। विपणन आयोजनों में भाग लेने के लिए 2 लाख रुपये तक सहायता, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 1 लाख रुपये प्रतिवर्ष का 2 साल तक पुनर्भरण और कैटलॉगिंग और ई-कॉमर्स वेबसाइट विकास के लिए 75 हजार रुपये तक एकमुश्त सहायता का प्रावधान है।
राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति
राज्य के उद्यमियों को निर्यातक बनाने के उद्देश्य से लागू की राजस्थान निर्यात प्रोत्साहन नीति-2024 के तहत निर्यातकों के दस्तावेजीकरण पर 5 लाख रुपये और तकनीकी अपग्रेडेशन पर 50 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी पर 3 लाख रुपये तक का अनुदान और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 2 लाख रुपये तक का पुनर्भरण किया जाता है।
राजस्थान एमएसएमई नीति
राज्य के छोटे उद्यमियों के वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से लागू की राजस्थान एमएसएमई नीति-2024 के तहत ऋण पर अतिरिक्त 2 फीसदी ब्याज अनुदान दिया जाता है। साथ ही, एसएमई एक्सचेंज से धन जुटाने पर 15 लाख रुपये तक की सहायता, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तथा सॉफ्टवेयर पर 5 लाख रुपये तक का अनुदान, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और आईपीआर पर 3 लाख रुपये तक का पुनर्भरण का प्रावधान है। विपणन के लिए आयोजनों में भाग लेने पर 1.5 लाख रुपये तक का अनुदान, डिजिजल उपकरणों पर 50 हजार रुपये तक पुनर्भरण, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फीस पर 50 हजार रुपये तक का पुनर्भरण किया जाता है।