दिल्ली एआई समिट: वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त छवि

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Published on : 20 Feb, 26 05:02

त्वरित टिप्पणी:गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

आज दिल्ली में आयोजित एआई समिट में विश्व के अनेक राष्ट्राध्यक्षों, नीति-निर्माताओं और तकनीकी दिग्गजों की उपस्थिति ने भारत को वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई) विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया। राजधानी के प्रतिष्ठित सम्मेलन स्थल भारत मंडपन में हुए इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और नवाचार का नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में अग्रसर है।

इस ए आई समिट सेवभारत की वैश्विक छवि को नई मजबूतीमिली है।जब विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रमुख एक मंच पर भारत की मेजबानी में जुटते हैं, तो यह केवल एक सम्मेलन नहीं होता—यह वैश्विक विश्वास का प्रतीक बन जाता है। एआई जैसे अत्याधुनिक और संवेदनशील विषय पर इतनी बड़ी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत को एक जिम्मेदार, लोकतांत्रिक और तकनीकी रूप से सक्षम राष्ट्र के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधार, यूपीआई और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। एआई समिट में इन पहलों का उल्लेख भारत की तकनीकी विश्वसनीयता को और मजबूत करता है।

“ह्यूमन-सेंट्रिक एआई” का भारतीय मॉडल

भारत ने इस समिट के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—एआई का विकास मानव-केंद्रित होना चाहिए। जहां कुछ विकसित देश एआई को आर्थिक प्रतिस्पर्धा और सैन्य क्षमता के नजरिये से देखते हैं, वहीं भारत ने इसे सामाजिक समावेशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जोड़कर प्रस्तुत किया।यह दृष्टिकोण भारत को एक संतुलित और नैतिक नेतृत्व प्रदान करता है। यदि एआई का उपयोग कृषि में उत्पादकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने और शिक्षा को डिजिटल रूप से सशक्त करने में होता है, तो यह विकासशील देशों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।

इसका भारत को कूटनीतिक और रणनीतिक लाभ मिलना तय है।इतने बड़े वैश्विक आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू कूटनीतिक लाभ भी है। जब राष्ट्राध्यक्ष एक मंच पर मिलते हैं, तो द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं के अवसर भी बनते हैं। एआई, डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और डिजिटल व्यापार जैसे विषय भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्रीय मुद्दे हैं।

इस समिट के माध्यम से भारत ने यह संकेत दिया कि वह वैश्विक एआई नियमों और मानकों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। यह भूमिका केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है—क्योंकि भविष्य की शक्ति संतुलन में डेटा और एल्गोरिद्म महत्वपूर्ण कारक होंगे।

इस समिट से भारत में निवेश और आर्थिक संभावनाएँ बलवती हुई है।एआई समिट से भारत को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ भी मिल सकते हैं। विदेशी निवेशक और वैश्विक टेक कंपनियाँ भारत के विशाल बाजार, प्रतिभाशाली युवाओं और डेटा संसाधनों को लेकर उत्साहित हैं। यदि इस मंच के माध्यम से अनुसंधान केंद्र, डेटा सेंटर और स्टार्टअप निवेश की घोषणाएँ होती हैं, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है।

भारत पहले ही स्टार्टअप इकोसिस्टम में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है। एआई क्षेत्र में सरकारी प्रोत्साहन, अनुसंधान अनुदान और कौशल विकास कार्यक्रम भारत को वैश्विक नवाचार हब में परिवर्तित कर सकते हैं।

 

हालांकि उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं, लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। एआई के साथ डेटा गोपनीयता, एल्गोरिद्मिक पक्षपात, साइबर अपराध और रोजगार पर प्रभाव जैसे मुद्दे जुड़े हुए हैं। भारत को अपने नियामक ढांचे को मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि नवाचार और नैतिकता के बीच संतुलन बना रहे।

आज के इस समिट ने भारत को वैश्विक मंच पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है, परंतु यह प्रतिष्ठा तभी स्थायी होगी जब नीतियाँ ठोस परिणाम दें और तकनीकी विकास आम नागरिक तक पहुँचे।

 

कुल मिलाकर नैबदिल्ली में आयोजित एआई समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत 21वीं सदी की तकनीकी क्रांति में अग्रिम पंक्ति में खड़ा है। राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति, व्यापक वैश्विक भागीदारी और भारत द्वारा प्रस्तुत मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण ने देश की छवि को एक जिम्मेदार, प्रगतिशील और दूरदर्शी राष्ट्र के रूप में सुदृढ़ किया है।यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल कूटनीति और तकनीकी नेतृत्व की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा। आने वाले वर्षों में यह समिट उस नींव के रूप में याद किया जा सकता है, जिसने भारत को वैश्विक एआई व्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बना  है।


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