उदयपुर | लोक कलाओं की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर के 75 वें स्थापना दिवस समारोह पर प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी दो दिवसीय लोकानुरंजन मेला आज से प्रारम्भ।
भारतीय लोक कला मण्डल के निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया कि लोक कलाओं की ख्याति प्राप्त संस्था भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर की स्थापना वर्ष 1952 में स्व. पद्मश्री देवीलाल सामर द्वारा की गयी। स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष राष्ट्रीय लोकानुरंजन मेले और शिल्प मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष संस्था का 75 वॉं स्थापना दिवस समारोह वर्ष बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाएगा। स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर दो दिवसीय लोकानुरंजन मेले का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें पहले दिन आज दिनांक 22 फरवरी 2026 को भारतीय लोक कला मण्डल के कलाकारों द्वारा राजस्थानी लोकगीत एवं कठपुतली नाटिका कालीबाई का मंचन शाम 04ः30 बजे से किया जाएगा।
समारोह के दूसरे दिन दिनांक 23 फरवरी 2026 को राजस्थानी लोक नृत्य, अलवर का भंपग एवं जोधपुर का फड़ वाचन दल अपनी प्रस्तुतियां सायं 07 बजे से देंगे।
उपरोक्त दोनों ही आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में आमजन का प्रवेश निःशुल्क रहेगा।
डॉ. हुसैन ने बताया कि संस्था में दिनांक 21 फरवरी 2026 सेे जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (ट्राईफेड) द्वारा आदि बाज़ार का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्घाट्न माननीय श्री चुन्नी लाल गरासिया, सांसद (राज्यसभा) के करकमलों द्वारा किया गया
आदि बाज़ार दिनांक 21 फरवरी 2026से दिनांक 01 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। जिसमें 30 स्टालों के माध्यम से पूरे देश क ेजनजातीय हस्तशिल्प, कलाए,पेंटिंग, कपड़े, आभूषण, मीनाकारी, बैम्बू क्राफ्ट और जैविक उत्पादों की बिक्री की जाएगी । इनमे प्रमुख रुप से राजस्थान के बगरू प्रिंट वस्त्र और जयपुर ब्लू पॉटरी के सजावटी सामान, गुजरात की पिथौरा पेंटिंग और बंधेज /बांधनी वस्त्र, कर्नाटक का बिदरी आर्ट का घरेलू सजावटी सामान, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा की डोकरा कलाए मध्य प्रदेश के बाघ प्रिंट वस्त्र और गोंड पेंटिंग, तमिलनाडु की टोडा बुनाई के वस्त्र, नॉर्थ ईस्ट के बांस एवं बेंत उत्पाद ,हिमाचल प्रदेश की पट्टू, ऊनी बुनाई, महाराष्ट्र की वर्ली पेंटिंग, उड़ीसा की सोरा पेंटिंग, और मणिपुर की लॉन्गपी (ब्लैकपॉटरी) शामिल हैं।