उदयपुर | लोक कलाओं की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर के 75 वें स्थापना दिवस समारोह पर प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी दो दिवसीय लोकानुरंजन मेले के पहले दिन कठपुतली नाटिका कालीबाई एवं राजस्थानी लोक गीतों ने दर्शकों को लुभाया।
भारतीय लोक कला मण्डल के निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने बताया कि संस्था का 75 वॉं स्थापना दिवस समारोह वर्ष बड़े ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के प्रथम दिन गणमान्य अतिथियों ने संस्था संस्थापक पद्मश्री देवीलाल सामर की तस्वीर पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। उसके पश्चात भारतीय लोक कला मण्डल के कलाकारों ने राजस्थानी लोक गीतों की प्रस्तुति दी उसके पश्चात कलाकारों ने कठपुतली नाटिका कालीबाई का मंचन किया। कठपुतली नाटिका कालीबाई राजस्थान में शिक्षा की अलख जगाने वाली वीर बालिका काली बाई के जीवन पर आधारित है जिसका लेखन एवं निर्देशन डॉ.लईक हुसैन द्वारा किया गया है।
समारोह के दूसरे दिन आज दिनांक 23 फरवरी 2026 को राजस्थानी लोक नृत्य, अलवर का भंपग एवं जोधपुर का फड़ वाचन दल अपनी प्रस्तुतियां सायं 07 बजे से देंगे जिसमें आमजन का प्रवेश निःशुल्क रहेगा। कार्यक्रम राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर के सहयोग से आयोजित होगा l
डॉ. हुसैन ने बताया कि संस्था परिसर में ही जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (ट्राईफेड) द्वारा आदि बाज़ार का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 30 स्टालों के माध्यम से पूरे देश के जनजातीय हस्तशिल्प, कलाए,पेंटिंग, कपड़े, आभूषण, मीनाकारी, बैम्बू क्राफ्ट और जैविक उत्पादों की बिक्री की जाएगी । इनमे प्रमुख रुप से राजस्थान के बगरू प्रिंट वस्त्र और जयपुर ब्लू पॉटरी के सजावटी सामान, गुजरात की पिथौरा पेंटिंग और बंधेज /बांधनी वस्त्र, कर्नाटक का बिदरी आर्ट का घरेलू सजावटी सामान, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा की डोकरा कलाए मध्य प्रदेश के बाघ प्रिंट वस्त्र और गोंड पेंटिंग, तमिलनाडु की टोडा बुनाई के वस्त्र, नॉर्थ ईस्ट के बांस एवं बेंत उत्पाद ,हिमाचल प्रदेश की पट्टू, ऊनी बुनाई, महाराष्ट्र की वर्ली पेंटिंग, उड़ीसा की सोरा पेंटिंग, और मणिपुर की लॉन्गपी (ब्लैकपॉटरी) शामिल हैं।