’’उदयपुर | झेवरचन्द मेघाणी अकादमी एवं गुजराती विभाग, सरदार वल्लभभाई पटेल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्कथा.कथनरू शैलीए सिद्धांत एवं प्रस्तुति कार्यक्रम में भारतीय लोक कला मण्डल ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के कलाकारों के साथ राजस्थान की विशिष्ट कथा शैलियों फड़ वाचन, शिवजी का ब्यावला तथा कावड़ वाचन की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर विद्वानों एवं कला,रसिकों को भाव विभोर कर दिया।
संस्था के निदेशक डॉण् लईक हुसैन ने राजस्थान की तीनों प्रमुख कथा शैलियों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि राजस्थान अपनी कला और संस्कृति के कारण न केवल भारत बल्कि विश्व में भी विशिष्ट स्थान रखता है। यहाँ की लोककलाएँ अपनी वेशभूषा, नृत्य, संगीत और अदायगी के कारण सहज ही सभी को आकर्षित करती हैं। विशेष रूप से कथा-शैली की कलाएँ, कठपुतली, फड़, भपंग, कावड़ बातपोशी और चारबेत कहानी कथन की परंपरा में अग्रणी मानी जाती हैं। संगीत के माध्यम से कथावाचन की कावड़ जैसी शैलियाँ अत्यंत अद्भुत और विशिष्ट हैं।
राष्ट्रीय समारोह में जहाँ विद्वानों ने अपने प्रवचन एवं शोध पत्र प्रस्तुत किए वहीं डॉण्. हुसैन ने अपने प्रस्तुति परक संबोधन से राजस्थान की समस्त कथा वाचन शैलियों का विस्तार से परिचय देते हुए उनकी प्रस्तुति पद्धति पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय फड़ वाचक सुगना राम भोपा एवं उनके दल ने फड़ के माध्यम से पाबूजी की जीवनी प्रस्तुत की। नूरदीन मेवाती -भपंग वादक ने भपंग की संगत में शिवजी के विवाह प्रसंग ष्शिवजी का ब्यावला का सजीव वर्णन किया। वहीं जगदीश पालीवाल एवं उनके दल ने मेवाड़ की कावड़ परंपरा के अंतर्गत रामायण के प्रसंगों का प्रभावपूर्ण प्रदर्शन किया।
समारोह का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर निरंजन नाथ पटेलए प्रोण् चंद वार्डिया ,अध्यक्ष, झेवरचंद मेघाणी अकादमी, डॉ. लईक हुसैन तथा लोककला मर्मज्ञ प्रोण् बलवंत धनी द्वारा दीप-प्रज्वलन कर किया हुआ।