झीलों की नगरी में सजेगा सुर-ताल का महाकुंभ: 'छठे अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य-संगीत महोत्सव' के पोस्टर का विमोचन

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Published on : 26 Feb, 26 15:02

झीलों की नगरी में सजेगा सुर-ताल का महाकुंभ: 'छठे अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य-संगीत महोत्सव' के पोस्टर का विमोचन

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर एक बार फिर विश्व स्तरीय शास्त्रीय कलाओं के महाकुंभ की साक्षी बनने जा रही है। कथक आश्रम उदयपुर और बड़ाला क्लासेस की ओर से ऑल इंडिया डांसर्स एसोसिएशन (आईडा) के बैनर तले आगामी 26 और 27 मार्च को 'छठे अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत महोत्सव' का भव्य आयोजन हिरण मगरी स्थित अटल सभागर में किया जाएगा। आयोजन को लेकर हाल ही में भव्य पोस्टर का विमोचन किया गया, जिसमें बडाला क्लासेस के राहुल बडाला, कथक आश्रम की निदेशक चंद्रकला चौधरी और इवेंट सहयोगी ग्लोरी इवेंट की कनिष्का श्रीमाली मौजूद रहीं। इस छठे संस्करण में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं।
​बडाला क्लासेस के राहुल बडाला और कथक आश्रम की चंद्रकला चौधरी ने संयुक्त रूप से बताया कि दो दिवसीय इस महोत्सव में पूरे भारतवर्ष सहित विदेशों से लगभग 500 से 600 प्रतिभागी हिस्सा लेने उदयपुर पहुंचेंगे। महोत्सव का स्वरूप बेहद खास रखा गया है, जिसमें दिन के सत्र में विभिन्न शास्त्रीय विधाओं की नृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, वहीं शाम का सत्र 'डांस फेस्टिवल' के नाम रहेगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नामी कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। कार्यक्रम में केरल, रायपुर, बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों के साथ-साथ दुबई, मलेशिया और थाईलैंड से भी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने आ रहे हैं।
​आईडा (AIDA) के निदेशक रितेश बाबू ने बताया कि इस बार दर्शकों के लिए कुछ विशेष प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसमें दिल्ली के एक प्रतिष्ठित ग्रुप द्वारा 'उपकत्थक' के माध्यम से भगवान कृष्ण की लीलाओं को जीवंत किया जाएगा, तो वहीं रायपुर के भरतनाट्यम ग्रुप द्वारा शिव तांडव की ओजस्वी प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही केरल की पारंपरिक कथकली कला अपनी भव्य वेशभूषा और भाव-भंगिमाओं से शहरवासियों को मंत्रमुग्ध कर देगी। पांचवें संस्करण की अपार सफलता के बाद, इस छठे आयोजन को और भी भव्य बनाने के लिए आयोजक जुटे हुए हैं, ताकि शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध विरासत को वैश्विक मंच मिल सके।


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