देखो आया फाग 

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Published on : 27 Feb, 26 18:02

देखो आया फाग 

भेज रही चिट्ठी देखो आया फाग ,
दुआ करती सुरक्षित लौट आए मेरा सुहाग।

लो आ गई होली अब तो आ जाओ सजना ,
इंतजार के‌ पल  चाहते हैं अब थामना ।

पत्थर हो गई आंखें दिल हो गया सूना-सूना,
रंगों से कब रंगीन बनेगा अपना अंगना ।

सीमा पर डटे तुम हो एक बहादुर फौजी ,
कब बंद होगा खेलना खून की होली ।

लाल रक्त से अब तो स्नान करना बंद करो ,
चंग के संग कुछ नए रंग भरो ।

देखो आ गया फाग कोयल कूकी है,
इंतजार में भीगी नहीं मेहंदी अभी सुखी है ।

उल्लास,उन्माद की हवा चहूं ओर है ,
गुलाबी गुलाल से गाल रंगने को आतुर है।

गुजिया, पेठे की खुशबू से महकी दुकान है ,
चरणों पर लगी देश की मिट्टी से रंगना मेरी चौखट का अरमान है ।

देखो आ गया फाग कोयल कूकी है,
पल-पल तकती आंखें तुम्हें देखने को भूखी है।

कोरी चुनरिया, कोरा है तन-मन,
रंगों से बढ़कर है फौजी के लिए ये वतन।

मदमाती हूं जब सपनों में तुम्हारा अक्स कहता है,
मेरे दिल का रंग री लाडो तेरे गालों पर रहता है।

आंख-मिचौली कर सपना गायब हो जाता है,
संदेसा मेरा अनदेखा कर फिर दुश्मन से लड़ने जाता है।

लिखा था चिट्ठी में मैं वापस कुछ दिन में आ जाऊंगा, 
बजाकर चंग फाग तेरे संग ही मनाऊंगा।

देखो आ गया फाग कोयल कूकी है,
तेरी शहादत के रंग से आज मेहंदी भीगी है। 

विरह,व्यथा,वेदना के रंगों से रंग गए मेरे अरमान, 
खेल ऐसा फाग ,बढ़ा गया फौजी वतन का मान।

 


साभार :


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