जम्मू । रेलवे ने पार्सल सेवाओं को और अधिक कुशल पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अब विशिष्ट पार्सल गाड़ियों और लीज पार्सल वैन के लिए चयनित स्टेशनों/स्थानों पर ट्रांस-शिपमेंट यानी माल की अदला-बदली (एक ट्रेन से दूसरे ट्रेन में लोडिंग) की अनुमति दी गई है। यह कदम पार्सल के गंतव्य तक पहुँचने के समय को कम करेगा, जिससे व्यापारियों को जल्द माल मिलेगा। हालांकि पहले ट्रेन से पार्सल का ट्रांस-शिपमेंट और उसे दूसरी ट्रेन में रीलोड करने की अनुमति नहीं थी। जिसके मद्देनजर व्यापारी वर्ग व पार्सल रेवेन्यू पर बुरा असर पड़ रहा हैं। इसी को ध्यान में रखते हुएए रेलवे द्वारा पार्सल ट्रांस शिपमेंट के प्रावधान में बदलाव किया गया हैं।
इसमें कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नजर डालें तो, सबसे पहले ट्रांस-शिपमेंट केवल अधिसूचित स्टेशनों पर ही किया जाएगा। जिससे अव्यवस्था न हो छोटे व्यापारियों और आम जनता के लिए अपना माल देश के किसी भी कोने तक भेजने की प्रक्रिया आसान होगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’’ को बढ़ावा देना है। पार्सल के गंतव्य तक पहुंचने के समय में कमी और निर्बाध परिवहन से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। यह निर्णय विशेष रूप से खराब होने वाली वस्तुओं और समय-संवेदनशील खेपों के लिए बहुत फायदेमंद होगा। यह नीति के तहत छोटे स्टेशनों पर ट्रांस-शिपमेंट की मिलती हैं। जो सड़क मार्ग के बजाय रेल परिवहन को सस्ता मानक बनाता है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री उचित सिंघल ने पार्सल ट्रांस-शिपमेंट बदलाव पर बताया कि रेलवे का प्राथमिक लक्ष्य पार्सल लॉजिस्टिक में लगने वाले समय को कम करना हैं। पहले सीधे कनेक्टिविटी न होने पर पार्सल देरी से पहुंचते थे। लेकिन अब विशिष्ट स्टेशनों पर ट्रांस शिपमेंट की अनुमति मिलने से हम विभिन्न रूटों को जोड़ सकेंगे। इससे न केवल रेलवे की परिचालन क्षमता बढ़ेगी बल्कि छोटे व्यापारी और ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने माल की सुरक्षित और त्वरित डिलीवरी तुरंत करने में मदद मिलेगी।