जामनगर, गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा ने एक वर्ष का सफर पूरा करते हुए वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के बाद बीते एक वर्ष में वनतारा, घायल और संकटग्रस्त वन्यजीवों के बचाव, अत्याधुनिक उपचार और विज्ञान आधारित संरक्षण के एक समग्र मॉडल के रूप में उभरा है।
उद्योगपति अनंत अंबानी की परिकल्पना से शुरू हुई इस पहल ने पहले ही वर्ष में हजारों वन्यजीवों को नया जीवन देने का प्रयास किया है। शेर, चीते जैसी बड़ी बिल्लियों, सरीसृपों, प्राइमेट्स, पक्षियों और अन्य स्तनधारियों सहित विभिन्न प्रजातियों के जानवरों को बचाकर उनका उपचार किया गया, जबकि कई स्वस्थ होने के बाद दोबारा प्राकृतिक आवासों जैसे जंगलों में लौटाए गए। संरक्षण के प्रति उनके प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और उन्हें ग्लोबल ह्यूमेन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वनतारा को EARAZA और SEAZA की मेंबरशिप, ग्लोबल ह्यूमेन कंज़र्वेशन सर्टिफ़िकेशन, और प्राणि मित्र अवॉर्ड 2025 जैसे पुरस्कारों से नवाजा गया है।
वनतारा ने विशेष रूप से उन जानवरों की देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें शोषण या कठिन परिस्थितियों से मुक्त कराया गया था। लकड़ी ढुलाई, सर्कस और सवारी जैसी गतिविधियों से बचाए गए 250 से अधिक हाथियों को यहां दीर्घकालिक चिकित्सा और पुनर्वास सुविधा मिल रही है। इसके साथ ही हजारों मगरमच्छों और अन्य वन्यजीवों के लिए वैज्ञानिक निगरानी और पोषण आधारित देखभाल व्यवस्था विकसित की गई है।
रोज़ाना हज़ारों जानवरों को सपोर्ट करते हुए, वनतारा पूरी तरह से ऑटोमेटेड सिस्टम के ज़रिए 1,56,000 kg हाई-क्वालिटी न्यूट्रिशन बनाता है, जिसे 50 टेम्परेचर-कंट्रोल्ड गाड़ियों के ज़रिए डिलीवर किया जाता है और 200 क्वालिफाइड प्रोफेशनल्स द्वारा मैनेज किया जाता है, जिससे जानवरों का चारा उगाने वाले 1,000 से ज़्यादा किसानों का सपोर्ट मिलता है। इस तरह की इंटीग्रेटेड केयर के साथ 200 लोगों की चौबीसों घंटे काम करने वाली रिस्पॉन्स टीम भी है। जिसने 50 से ज़्यादा इंटरनेशनल रेस्क्यू ऑपरेशन और 15 वाइल्डलाइफ रैपिड रिस्पॉन्स और रेस्क्यू टीम की तैनाती में मदद की है।
संस्था को पश्चिम भारत के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव रेफरल सेंटर के रूप में भी नामित किया गया है। यहां स्थापित वैज्ञानिक प्रयोगशाला और 11 सैटेलाइट लैब प्रतिदिन हजारों डायग्नोस्टिक नमूनों की जांच करने में सक्षम हैं, जिनमें मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, बायो-बैंकिंग और नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल वन्यजीव स्वास्थ्य को व्यापक ‘वन हेल्थ’ ढांचे से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है।
बीते वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों में गुजरात वन विभाग के सहयोग से बरडा वन्यजीव अभयारण्य में 53 चीतल हिरणों की जंगल में वापसी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्नेक-नेक्ड कछुओं की रीवाइल्डिंग पहल शामिल रही। वनतारा ने संरक्षण चिकित्सा में सैकड़ों पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया, 50 से अधिक नॉलेज-शेयरिंग कार्यक्रम आयोजित किए और बच्चों व युवाओं को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने के लिए विशेष आउटरीच अभियान चलाए।
पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान संस्था ने राहत कार्यों में भाग लेते हुए प्रभावित समुदायों और जानवरों की सहायता भी की, जिससे यह संदेश मजबूत हुआ कि पर्यावरणीय संतुलन और मानव कल्याण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। एक वर्ष के भीतर वनतारा रेस्क्यू, रिसर्च, रीवाइल्डिंग और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ने वाले एकीकृत संरक्षण इकोसिस्टम के रूप में विकसित हुआ है, जिसका उद्देश्य वन्यजीवों को दूसरा जीवन देना और प्रकृति के साथ संतुलित भविष्य की दिशा में ठोस योगदान करना है।