मोहन व सात्विक वीणा से निकले सुर में व नियाजी निजाम बद्रर्स की सूफियाना कव्वाली में खोयंे श्रोता

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Published on : 06 Mar, 26 16:03

विदेशी कलाकार द्वारा संतूर पर दी गई प्रस्तुति देख मंत्रमुग्ध हुए श्रोता

मोहन व सात्विक वीणा से निकले सुर में व नियाजी निजाम बद्रर्स की सूफियाना कव्वाली में खोयंे श्रोता

 
उदयपुर। पं. चतुरलाल मेमोरियल सोसायटी एवं हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के महान तबला वादक, “ताल के जादूगर” पंडित चतुर लाल की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में आज शिल्पग्राम के खचाखच भरे मुक्ताकाशी रंगमंच पर स्मृतियां कॉन्सर्ट का भव्य आयोजन किया जाएगा। जिसमें पद्म भूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट की वीणा, तंत्री सम्राट पं. सलील भट्ट की सात्विक वीणा से निकले सुर व सुप्रसिद्ध नियाजी निजामी ब्रदर्स द्वारा सूफीयाना कव्वाली में श्रोता खो गये। अंतरराष्ट्रीय कलाकार मोआ डेनियलसन द्वारा संतूर पर दी गई विशेष प्रस्तुति के साथ तबले पर चली प्रांशु चतुरलाल अंगुलियों के जादू पर श्रोताओं ने जमकर तालियों की दाद दी।
कार्यक्रम की शुरूआत हिजिंलि टेलेन्ट हंट के विजेता समर्थ जानवे द्वारा राग वराठी में तीन ताल में छोटा ख्याल में कुंज बिहारी...और ओम नमो भगवते वासुदेवाय भजन की प्रस्तुति से हुई। तबले पर इनके साथ संगत नवीन राव,पखावत पर यशोनन्दन कुमावत,हामोनियम पर दुष्यंत चारण व गायन संगत सलोनी रावत ने की।




इसके बाद स्वीडन की संतूर वादक कलाकार अंतरराष्ट्रीय कलाकार मोआ डेनियलसन ने संतूर से निकली राग भागेश्री तीन ताल विलम्बित 16 मात्रा की ताल मध्यलय व झाला तथा सवाल जवाब से इसका समापन किया। इनके साथ तबला वादक पं. चतुरलाल के पौत्र प्रांशु चतुरलाल ने तबले पर संगत की। तबले पर चली इनकी जादुई अगुंलियांे ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मोआ डेनियलसन ने अपने गुरू पं. भजन सपेारी से संतूर की शिक्षा प्राप्त की।    
पद्मभूषण पं. विश्वमोहन भट्ट ने मोहन वीणा व सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा से सुर छोडे़ तो श्रोता उसी में खो गये। दोनों की जोड़ी ने पं. विश्वमोहन भट्ट द्वारा स्वरचित विश्वरजनी राग में जुगलबन्दी का श्रोताओं ने उसका पूरा आननद लिया। अलाप व जोड़ अलाप के साथ विलम्बित व धु्रत तीन ताल में गत की प्रस्तुति दी।
पं. विश्वमोहन भट्ट व सलिल भट्ट की जोड़ी ने जब पर्यटन नगरी उदयपुर में राजस्थान के प्रसिद्ध लोकगीत केसरिया बाल आवो नी पधारो म्हारे देश  की प्रस्तुति दी तो श्रोताअेंा ने तालियों से इसका अभिवादन किया। इस जोड़ी ने किरवानी पर आधारित लोकधुन हिचकी की प्रस्तुति दे कर इसका समापन किया। तबले पर इनके साथ प्रंाशु चतुरलाल ने संगत की।  
कार्यक्रम के अंत में दिल्ली से आये दरबारी कव्वाल सुप्रसिद्ध नियाजी निजामी ब्रदर्स ने हजरत अमीर खुसरो द्वारा लिखे कलाम छाप तिलक सब छिनी,मोसे नैना मिलाय के... से की तो श्रोताओं ने इसका भरपूर आनंद लिया। इसके बाद जोधा अकबर फिल्म का गीत ख्वाजा मेरे ख्वाजा... सुफियाना कव्वाली की प्रस्तुति पर श्रोता उसी में खो गये। इसके बाद दमादम मस्तकलंदर...,तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी....कव्वाली वर्जन में हंसता हुआ नूरानी चेहरा....,कव्वाली वर्जन में ही ले के पहला पहला प्यार...... की प्रस्तुति दी तो श्रोताओं ने तालियां बजाकर ग्रुप का अभिवादन किया।
हैदर निजामी,हसन निजामी व इमरान निजामी ने कव्वालिया प्रस्तुत की। इनके साथ तबले पर फरहीम खान,ढोलक पर हमसर हुसैन,कोरस दिलशाद खान व अमान अली ,बुलबूल तरंग कहे जाने वाले इलेक्ट्रिक बेन्जो पर नसीर अहमद ने संगत की।  
इससे पूर्व मीता चतुरलाल ने बताया कि यह वर्ष पंडित चतुरलाल के 100 वर्षों की गौरवशाली संगीत यात्रा को समर्पित है। पंडित चतुर लाल उन अग्रणी भारतीय ताल वादकों में थे जिन्होंने भारतीय ताल को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया।
स्मृतियां कॉन्सर्ट का यह 26वाँ वर्ष विशेष रूप से उनकी स्मृति और विरासत को समर्पित रहा।  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर नमित मेहता, विशिष्ठ अतिथि हिजिंलि की सीएसआरहेड  अनुपम निधि, चरणजीत चतुरलाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे।  इस आयोजन को आरएसएमएम लिमिटेड एवं राजस्थान पर्यटन का सहयोग प्राप्त है। कार्यक्रम के हॉस्पिटैलिटी पार्टनर के रूप में प्राइड होटल तथा डिजिटल पार्टनर के रूप में सैंडीज ट्रैवल टेल्स का सहयोग रहा।


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